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पुलिस स्टेट में बदल चुका है गुजरात, जमीन बचाने का संघर्ष जारी है

देश को पुलिस स्टेट बनाने की तैयारी, शहीद स्मारक भावी पीढ़ियों को मिट्टी (जमीन) बचाने की प्रेरणा देते रहेंगे।

पुलिस स्टेट में बदल चुका है गुजरात,  जमीन बचाने का संघर्ष जारी है
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डॉ सुनीलम पूर्व विधायक

मिट्टी सत्याग्रह यात्रा आज पांचवे दिन हरियाणा के सिरसा होते हुए मानसा - पंजाब पहुंची। यात्रा के अनुभव आपके साथ साँझा कर रहा हूँ। यात्रा 30 मार्च को दांडी से शुरू हुई थी। नमक सत्याग्रह स्थल, सरदार पटेल के निवास बारदोली, किसान आंदोलन स्थल,साबरमती आश्रम , गांधी जी द्वारा स्थापित गुजरात विद्यापीठ,मंडी गुजरात में जहां भी गए, वहां पुलिस की भारी उपस्थिति पाई। सभी कार्यक्रमों के आयोजकों को यात्रा की व्यवस्था करने वाले संगठनों और व्यक्तियों को पुलिस अधिकारी द्वारा दबाव डालते देखा और सुना।

गुजरात के जिस विकास मॉडल को लेकर मोदी जी को देश में सत्ता सौंपी गई थी तथा जो विकास मॉडल बताया गया था वह संपन्नता गांव देहात में तो देखने को नहीं मिली लेकिन विकास के नाम पर गांव गांव में किसानों की जमीनों को कैसे कंपनियां बड़े पैमाने पर खरीद रही है, यहां तक कि किसान की गोचर ( निस्तार की जमीन) को भी सरकार के द्वारा कंपनियों को सौंपने की तमाम कहानियां सुनी।

एपीएमसी की मंडियों में खरीद के बारे में किसान नेता विपिन पटेल ने बताया कि भरूच में पिछली बार 50 हजार कपास की गांठें खरीदी गई थी, इस बार 15 हजार गांठें ही खरीदी गई।

हमें गुजरात का जो मॉडल देखने को मिला वह पूरी तरह तानाशाही पूर्ण - लोकतंत्र विरोधी है। इस मॉडल में साबरमती से दांडी यात्रा करने वालों को रोक दिया जाता है। किसान नेता युद्धवीर सिंह को प्रेस कांफ्रेंस करने से रोका गया। विधायक जिग्नेश मेवानी बताते हैं कि गुजरात में जब भी कहीं कोई संगठन आंदोलन की घोषणा करता है तो उसके नेताओं को आंदोलन के दिन पुलिस नजर बंद कर देती हैं।

कुल मिलाकर भय का वातावरण पैदा कर दिया गया है। जिस गुजरात के गांधी जी ने आज़ादी के आंदोलन के दौरान देश को निडरता ( अभय ) की सीख दी थी, उसी गुजरात के नरेंद्र मोदी - अमित शाह मिलकर डर पैदा कर राज कर रहे हैं।

गुजरात जिस तरह पुलिस स्टेट में तब्दील हुआ है, उसी तरह देश को पुलिस स्टेट में तब्दील किया जाना तय है। यह स्पष्ट चेतावनी देशवासियों के लिए गुजरात दे रहा है। मोदानी मॉडल ( मोदी सरकार द्वारा अडानी जैसे पूंजीपतियों को कम समय में अधिक से अधिक कमाने हेतु नीतियां बनाने वाला मॉडल )

को लागू करने के लिए मोदी सरकार देश को पुलिस स्टेट में तब्दील करने का मन बना चुकी है। पहले यह मॉडल भाजपा शासित राज्यों में, बाद में यह पूरे देश में लागू होगा। वैसे यह मॉडल कश्मीर व पूर्वोत्तर में कई दशकों से लागू है। सत्ताधीश सत्ता पर कायम रहने के लिए इसी मॉडल को श्रेष्ठ मानते आए हैं।

गुजरात से राजस्थान जाने पर बागड़ किसान संगठन के साथी बतलाते हैं कि अभी कुछ समय पहले जब छात्रों ने आदिवासियों के लिए आरक्षित पदों को भरने का आंदोलन चलाया था, तब गोली चालन कराया गया जिसमें दो आंदोलनकारी शहीद हुए तथा पुलिस ने साढ़े चार हजार आंदोलनकारियों पर मुकदमे लगा दिए। तमाम आंदोलनकारी आज भी जेल में है, यानी कांग्रेस सरकार के राज्य में भी पुलिस दमन जारी है। वहीं दूसरा उदाहरण भी हमें उसी राजस्थान के मुंडोती जिला अजमेर में देखने को मिला जहां ग्रामवासियों ने खनन माफियाओं से जमीन बचाने के लिए आंदोलन किया तथा सरकार से आवंटन रद्द करा दिया यानी मिट्टी की लड़ाई मुंडोती के किसानों ने लड़ी और जीत हासिल की ।

राष्ट्रीय स्तर पर भी यह संघर्ष 127 दिन से 550 किसान संगठनों के संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में जारी है।आंदोलन के दौरान अब तक 315 किसानों की शहादत हो चुकी है, जिनके शहीद स्मारक 5 - 6 अप्रैल को बनाए जाने वाले हैं। यात्रा के दौरान बानसुर ( राजस्थान) में किसान महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर के शहीद स्मारक और शाहजहांपुर बॉर्डर के शहीद स्मारक के लिए योगेंद्र यादव जी को गुजरात के 800 तथा राजस्थान के 200 गांव से लाई गई मिट्टी के कलश सौंपे गए।

आज सिरसा में जहां किसानों ने पक्का मोर्चा लगाया हुआ है, वहां सभा के बाद हमने किसान चौक पर स्तम्भ बनाया। पिछली बार जब उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के इस्तीफे की मांग को लेकर मैंने पुलिस को वाटर केनन चलाते और बल प्रयोग करते देखा था, वही पुलिस आज सब कुछ चुपचाप खड़े खड़े देखते रहे। इसका मतलब है कि पुलिस पर हरियाणा में किसानो का दबाव बढ़ा है।

मिट्टी सत्याग्रह यात्रा तो 6 अप्रैल को पूरी हो जाएगी। स्वाभाविक तौर पर हरियाणा के नरवाना और रोहतक , पंजाब के सुनाम में कार्यक्रम बड़ी भागीदारी के साथ होंगे। आज चल रहा किसान आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है । संयुक्त किसान मोर्चे ने बॉर्डर से दिल्ली के भीतर जाने की घोषणा कर दी है। सरकार ने 3 कानूनों को 18 महीने के लिए स्थगित करने की घोषणा बहुत पहले ही की है।

अब सरकार को कानून रद्द करने के बारे में गंभीरता से सोचना होगा। हो सकता है कि सरकार 2 मई के चुनाव नतीजों का इंतज़ार कर रही हो। बंगाल चुनाव पर यदि संयुक्त किसान मोर्चे की भाजपा हराओ अपील का असर पड़ता है तो सरकार जल्दी निर्णय लेने को मजबूर होगी, अन्यथा किसानों और सरकार के बीच टकराव बढ़ेगा । सरकार दमन का रास्ता अपनाएगी और किसान अहिंसक प्रतिरोध का।

मिट्टी सत्याग्रह यात्रा शहीद स्मारक के माध्यम से अमिट छाप छोड़ जाएगी। यह छाप देशभर के गांव से लाई गई मिट्टी की होगी, जिससे किसानों की भावी पीढ़ियों को अपनी मिट्टी (जमीन) बचाने की प्रेरणा मिलती रहेगी।

डॉ सुनीलम पूर्व विधायक एवं अध्यक्ष किसान संघर्ष समिति , राष्ट्रीय संयोजक- जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय; वर्किंग ग्रुप सदस्य-अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति संयुक्त किसान मोर्चा

Shiv Kumar Mishra
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