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'हार नहीं मानूंगा-रार नहीं ठानूंगा', 93 साल के हुए 'भारत रत्न' अटल बिहारी वाजपेयी, जानिए- दिलचस्प बातें

'भारत रत्न' अटल बिहारी वाजयेपी के जन्मदिन पर जानते हैं कुछ दिलचस्प बातें-

 Arun Mishra |  2017-12-25 06:06:53.0  |  New Delhi

हार नहीं मानूंगा-रार नहीं ठानूंगा, 93 साल के हुए भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, जानिए- दिलचस्प बातेंपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को 93वें जन्मदिन पर शुभकामाएं

नई दिल्ली : 'भारत रत्न' से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री व कवि अटल बिहारी वाजपेयी 25 दिसंबर 2017 को 93 साल के हो गए हैं। उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। उनका व्यक्तित्व और उनकी बातें ऐसी थी कि ना सिर्फ समर्थक, बल्कि उनके विरोधी भी तालियां बजाए बिना नहीं रहते थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन समेत कई बड़े बीजेपी के दिग्गज वाजपेयी के घर उनसे मिलने पहुंचे। बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी पिछले काफी समय से बीमार हैं, लंबे समय से वह अपने घर से बाहर भी नहीं आए हैं। इन सभी के अलावा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने पूर्व प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।

अटल बिहारी वाजयेपी के जन्मदिन पर जानते हैं कुछ दिलचस्प बातें-
जब 1942 का भारत छोड़ों आंदोलन अपने चरम पर था तो 18 साल का युवा अटल बिहारी वाजयेपी भी बेचैन हो उठा और राजनीति में कूद पड़ा। कांग्रेस के विरोध की राजनीति करने वाले अटल बिहारी वाजयेपी अपने करियर की शुरुआत में ही अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे। 1977 में जनता पार्टी की सरकार में विदेश मंत्री बने। 1996 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने। उसके बाद 1998 और 1999 में भी प्रधानमंत्री बने। पहला कार्यकाल 13 दिनों का था और 16 मई 1996 से 1 जून 1996 तक पीएम रहे। दूसरा और तीसरा कार्यकाल 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक रहा।

अटल बिहारी वाजयेपी को अपनी कोई संतान नहीं है, लेकिन उन्होंने नमिता कौल को दत्तक पुत्री के तौर पर पाला पोसा है। उनकी दत्तक पुत्री नमिता कौल की शादी रंजन भट्टाचार्य से हुई है।

अटल बिहरी वाजयेपी रहने वाले ग्वालियर के थे, लेकिन 1991 से अपने आखिरी चुनाव तक यानि 2004 तक लखनऊ लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया। वाजयेपी ऐसे अकेले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने पूरा 5 साल का अपना कार्यकाल पूरा किया।

अटल बिहारी वाजपेयी का हिंदी से प्यार किसी से छिपा हुआ नहीं है। जब वो विदेश मंत्री बने तो उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण दिया। ऐसा करने वाले वो पहले विदेश मंत्री थे।

अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 में अपनी सरकार के दौरान पोखरण-2 का परीक्षण किया और देश को परमाणु संपन्न देश बनाया। उनके दौर पर पाकिस्तान से करगिल युद्ध हुआ और इस जंग में उन्होंने भारत की जीत दिलाई।

अटल बिहारी वाजपेयी का शुमार एक बेहतरीन प्रधानमंत्री के तौर पर होता है, लेकिन वो सिर्फ एक बेहतरीन पीएम ही नहीं थे, बल्कि सबसे बेहतरीन सांसद भी चुने गए। वाजपेयी 10 बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे।

अटल जी का जन्मदिन हो, तो भला उनकी कविताओं को कैसे भूला जा सकता है। अटल बिहारी वाजपेयी की कविताएं आज भी कई बड़ें मंचों पर पढ़ी जाती हैं। 'गीत नया गाता हूं' से लेकर 'कदम मिलाकर चलना होगा' कविताओं को लोग बड़े आनंद के साथ सुनते हैं। यहां पेश हैं उनकी कुछ कविताएं:

-पहली अनुभूति
बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं
टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूं
गीत नहीं गाता हूं
लगी कुछ ऐसी नज़र बिखरा शीशे सा शहर
अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूं
गीत नहीं गाता हूं
पीठ मे छुरी सा चांद, राहू गया रेखा फांद
मुक्ति के क्षणों में बार बार बंध जाता हूं
गीत नहीं गाता हूं

-दूसरी अनुभूति
गीत नया गाता हूं
टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात
प्राची मे अरुणिम की रेख देख पता हूं
गीत नया गाता हूं
टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी
अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा,
काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं
गीत नया गाता हूं..

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