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क्या शहीद भी दलित होता है, ये तो हद्द ही हो रही है अब - डॉ कुमार विश्वास

 Special Coverage News |  1 April 2019 11:17 AM GMT  |  दिल्ली

क्या शहीद भी दलित होता है,  ये तो हद्द ही हो रही है अब - डॉ कुमार विश्वास

हिंदी के पुरोधा और देश ही नहीं विदेशों में माँ भारती का नाम रोशन करने वाले डॉ कुमार विश्वास को लेकर कुछ लोंगों ने अपनी घटिया मानसिकता प्रदर्शित की है. इस बात को लेकर उन्होंने नाराजगी भी व्यक्त की है.

डॉ कुमार विश्वास ने कोटा में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर पहुंचे शहीद हेमराज मीणा के माँ और बाप के पाँव छुकर आशीर्वाद ले लिया. उन्होंने सहजता से इसको इन शब्दों में बयाँ करते हुए तस्वीरें भी पोस्ट कर दी. कुमार ने लिखा, मंचीय कवि के जीवन की हज़ारों रातों में यह सौभाग्य शायद ही कभी प्राप्त होता है कि देश-धर्म पर परम बलिदान देने वाले जाँबाज़ के जन्मदाताओं के चरण स्पर्श कर सके. कल कोटा में 'है नमन उनको' #KVMusical के दौरान पुलवामा हमले में देश को अपनी शहादत देने वाले कोटा के जाँबाज़ हेमराज मीणा जी के परिवार से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. ऐसे परिवार को हज़ारों प्रणाम, जिसने देश के लिए इस त्याग को स्वीकार किया.





इस बात को लिखने पर कई लोंगों ने उन्हें तरह तरह के कमेंट लिखे जो कि लिखना गलत था. तब हिंदी के प्रोफेसर रहे डॉ कुमार विश्वास को नाराजगी आई और उन्होंने एक और पोस्ट लिख डाला और यह भी कहा कि कि इस पोस्ट को जरुर पढ़ें ताकि आपके मन में जो कुढन है वो समाप्त हो जाय.




कुमार विश्वास ने लिखा अजीब हाल हो गया है हमारे देश का ! कोई कुछ सुनने-समझने को तैयार ही नहीं है ! पुलवामा के अमर शहीद हेमराज मीणा के पूज्य माता-पिता दो दिन पहले कोटा के मेरे शो में पधारे तो हम सबने उन्हें कृतज्ञ आग्रह-पूर्वक मंच पर आमंत्रित किया ! उसी क्षण मैंने उन वीरप्रसूता माता और देश पर क़ुर्बान उस नरनाहर के पूज्य पिता को बैठकर चरण-स्पर्श किया ! आज परदेस में मैसेज बॉक्स देखा तो कई जाति-कुल के कुएँ में पड़े कूपमंडूक मूर्खों ने मुझे भर-भर गालियाँ देकर कोसा है कि, मैंने अपने ब्राह्मण होनें को कलंकित किया है मीणा परिवार के सार्वजनिक रूप से पैर छू कर ! सिरियसली 😳? क्या जहालत यहाँ तक आ गई है ? हर आदमी अपनी निजी तुच्छता और ओछेपन को बाहर लाकर जाति-धर्म की ढाल बनाकर, घृणा और विद्वेष फैला रहा है और हम ऐसों के बहाव में बह रहे हैं ! हद्द है भई 😡👎 !

तो सुनो हर तरफ़ के और हर तरह के जाहिलो, देश-समाज विभाजको ! तुम्हारी धमकियाँ और सलाह जूते की नौेंक पर ! समझे ! मुझे तुमसे न धर्म समझना न मेरे ब्राह्मणत्व की परिभाषा ! ज़्यादा अतिसार है तो इस पेज से विदा लो और अपनी जाति-धर्म की आत्ममुग्धताएँ अपने घर रखो !

इन लोंगों ने फिर साबित किया कि देश के उपर अपनी जान न्यौछावर करने वाला शहीद होता है. उसका कोई जाती धर्म नहीं होता है.

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