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तीन तलाक़ दी तो जेल जाना तय, मोदी कैबिनेट ने लगाई अध्यादेश पर मुहर, बिफरी कांग्रेस और जेडीयू

मोदी सरकार ने तीन तलाक अध्यादेश जारी कर इसे तत्काल प्राभाव से लागू तो कर दिया है लेकिन मुश्किल यह है कि यह अध्यादेश सिर्फ छह महीने के लिए ही मान्य होगा.

 Yusuf Ansari |  19 Sep 2018 10:21 AM GMT  |  Delhi

तीन तलाक़ दी तो जेल जाना तय, मोदी कैबिनेट ने लगाई अध्यादेश पर मुहर, बिफरी कांग्रेस और जेडीयू
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नई दिल्ली: मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से आजादी दिलाने का वादा पूरा करते हुए मोदी सरकार ने बड़ा फैसला किया है. आज हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में तीन तलाक पर अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई है. तीन तलाक विधेयक लोकसभा से पारित हो चुका है, लेकिन राज्यसभा में लंबित है. राष्ट्रपति की मुहर लगते ही तीन तलाक पर कानून पास हो जाएगा. संसद से बिल पारित होने से पहले 6 महीने तक अध्यादेश से काम चलेगा.

गौरतलब है कि मानसून सत्र के आखिरी दिन राज्यसभा में जो संशोधित विधेयक आया था उसे ही सरकार ने अध्यादेश के ज़रिए कानून बनाने को मंजूरी दी है. पिछले शीतकालीन सत्र में सरकार Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Bill, 2017 नाम से तीन तलाक विधेयक लाई थी. यह बिल 28 दिसबंर 2017 को लकसभा से पास हुआ था लेकिन राज्यसभा में अटक गया था. मानसूत्र सत्र में सरकार लइसे कुछ संशोधनों के सथ पास कराना चाहती थी लेकिन विपक्ष के हंगामे के चलते सदन की कर्यवाही नहीं चल पाई थी. तब से यह विधेयक राज्यसभा में अटका हुआ है.

सरकार ने फोड़ा कांग्रेस के सिर ठीकरा

कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कहा, ''कैबिनेट ने आज तीन तलाक पर अध्यादेश को मंजूरी दे दी. मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ आरोप लगा रहा हूं कि कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता एक प्रतिष्ठित महिला नेता, इसके बाद भी अभी तक शुद्ध वोटबैंक की राजनीति के लिए तीन तालक जैसे बर्बर अमानवीय कानून को कत्म करने की इजाजत नहीं दी.'' कानून मंत्री ने बताया कि जनवरी 2017 से 13 सितम्बर 2018 तक तीन तलाक़ की 430 घटनाएं सामने आई हैं. अलग अलग राज्यों की बात करें तो असम में 11, बिहार में 19, दिल्ली में 1, झारखंड में 35, मध्यप्रदेश 37, महाराष्ट्र 27, तेलंगाना 10 और सबसे ज्यादा 246 मामले उत्तर प्रदेश से सामने आए.

बिफरी कांग्रेस और जेडीयू

वहीं कैबिनेट के फैसले पर कांग्रेस ने फौरन पलटवार किया. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ''मोदी सरकार इसे मुस्लिमों के लिए न्याय का मुद्दा बनाने के बजाए राजनीतिक मुद्दा बना रही है.'' गौरतलब है कि कांग्रेस ने लोकसभा में इस विधोयक का समर्थन इस शर्त पर किया था कि सरकार इसमें संशोधन करके तलाक देने वाले को जेल भेजने का प्रावधान हटाएगी. सरकार ने तब तो इस पर कोई कदम नहीं उठाया लेकिन राज्यसभा में सरकार संशोधन के साथ विधायक लाई तो वहां हंगाने के चलते यह विधेयक पास नहीं हो पाया. बिहार मे बीजेपी का सहयोगी ने तीन तलाक मामले का सामाधान मुस्लिम समाज पर छोड़न को कहा है. जेडीयू का मानन है कि सरकरा को किसी समुदाय विशेष के अंदरूनी मामलों में दखलंदाज़ी से बचना चाहिए.

अध्यादेश के बाद भी संसद का सामना करने की चुनौती बरकरार

कोई कानून दो तरह से बनाया जाता है. विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा से पास करवाया जाए या फिर उस पर अध्यादेश लाया जाए. अध्यादेश पर राष्ट्रपति की मुहर लगते ही ये कानून बन जाता है. यहां सरकार के सामने ये मुश्किल यह है कि यह अध्यादेश सिर्फ 6 महीने के लिए ही मान्य होता है. छह महीने के भीतर इसे संसद से पास करवाना पड़ता है. यानि सरकार के सामने एक बार फिर तीन तलाक विधेयक को इस विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा से पास करवाने की चुनौती होगी. संविधान के अनुच्छेद 123 के मुताबिक जब संसद सत्र नहीं चल रहा हो तो केंद्र के आग्रह पर राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं.

मोदी सरकार ने मूल कानून में किए तीन संशोधन

तीन तलाक विधेयक पर सख्त रुख अपनाने वाली मोदी सरकार को आखिर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के एतराज़ के आगे झुकना पड़ा. विपक्ष के दबाव में मोदी सरकार ने तीन तलाक विधेयक में तीन संशोधन किए है. ये संशोधन इस तरह हैः

पहला संशोधन: अगर कोई पति अपनी पत्नी को एक साथ तीन तलाक देता है और रिश्ता पूरी तरह से खत्म कर लेता है तो उस सूरत में एफआईआर सिर्फ पीड़ित पत्नी, उसके खूनी और करीबी रिश्तेदार की तरफ से ही की जा सकती है. पहले ये था कि तीन तलाक देने के बाद किसी की तरफ से भी एफआईआर दर्ज हो सकती थी.

दसूरा संशोधन: पति-पत्नी तलाक के बाद अपने झगड़े को खत्म करने के लिए सुलह-समझौता पर राजी हो जाते हैं तो पत्नी की बात सुनने के बाद मजिस्ट्रेट शर्तों के साथ दोनों के बीच सुलह-समझौता पर मुहर लगा सकता है. इसी के साथ पति को जमानत पर रिहा किया जा सकता है. मूल विधेयक मॆं सुलह, सफाई, समझौता और जमानत मुमकिन नहीं था.

तीसरा संशोधन: तलाक देने के बाद पति को तीन साल तक जेल की सजा हो सकती है. सजा गैर जमानती होगी यानि सज़ा के दौरान ज़मानत नहीं मिलेगी. मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अख्तियार होगा. मूल विधेयक में मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार नहीं था.

प्रधानमंत्री ने लाल किले से किया था ऐलान

15 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में भी मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने का ऐलान किया था. प्रधानमंत्री ने कहा था कि तीन तलाक प्रथा मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय है. तीन तलाक ने बहुत सी महिलाओं का जीवन बर्बाद कर दिया है और बहुत सी महिलाएं अभी भी डर में जी रही हैं. पीएम मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए तीन तलाक पर रोक लगाने वाला सख्त कानून बनाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था

गौरतलब है कि 22 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सलाक को गैरकानूनी और असंवैधिनिक करार दिया था. पांच जजों की बेंच में से तीन जजों ने इसे असंवैधानिक करार दे दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस मामले पर कानून बनाने को कहा था. इस केस की सुनवाई करने वाले पांचों जज अलग-अलग समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं.

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