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डिब्बाबंद वस्तुओं पर GST के नए दाम का स्टीकर लगाना अनिवार्य वरना होगी जेल!

 Special Coverage News |  2017-07-07 11:26:19.0  |  दिल्ली

डिब्बाबंद वस्तुओं पर GST के नए दाम का स्टीकर लगाना अनिवार्य वरना होगी जेल!

नई दिल्ली: जीएसटी लागू होने के बाद सभी उत्पादों और सेवाओं के दाम में बदलाव आ गया है. उत्पादों के नए रेट को लेकर ग्राहक भी परेशान हैं और दुकानदार भी. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने फैसला लिया है कि 1 जुलाई 2017 से पहले निर्मित, डिब्बा बंद और ना बिकी हुई वस्तुओं पर तीन महीने की अवधि के लिए परिवर्तित खुदरा बिक्री मूल्य की घोषणा की जा सकती है.

यानी की हर सामान पर जीएसटी लगने के बाद उसकी कीमत के बारे में उस पर स्टीकर लगाना होगा.
उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि जीएसटी के बाद हर चीज के दाम में बदलाव हुआ है, कुछ सस्ते हुए हैं और कुछ महंगे भी हुए हैं. लिहाजा सामान बनाने वाले मैन्यूफेक्चरर को हर सामान पर पुराने एमआरपी के साथ जीएसटी युक्त नया एमआरपी का स्टीकर भी लगाना होगा.
इससे ग्राहक को भी पता चल सकेगा कि कौन सा सामान जीएसटी लगने के बाद महंगा हुआ और कौन सा सस्ता. 30 सितंबर 2017 तक ये प्रक्रिया जारी रहेगी. उसके बाद मैन्यूफेक्चरर को नई एमआरपी ही लगानी होगी.
उदाहरण के लिए अगर डिब्बा बंद जूस 31 जुलाई से पहले सौ रुपए का था और उस पर वो ही एमआरपी लगा हुआ था. अगर जीएसटी के बाद उसका दाम 105 रुपए हो गया है, तो नए दाम का स्टीकर लगाना होगा. यहां तक कि छोटी दुकानों पर पहुंच चुके माल पर भी नए रेट का एमआरपी स्टीकर लगाना अनिवार्य होगा.
ये मैन्यूफेक्चरर की जिम्मेदारी होगी कि वो हर सामान पर स्टीकर कैसे लगवाए. सरकार का कहना है कि अगर कोई मैन्यूफेक्चरर ऐसा नहीं करेगा, तो उस पर दस हजार रुपए तक का जुर्माना और सजा का भी प्रावधान किया जाएगा.
केंद्र सरकार ने ये भी कहा है कि हर मैन्यूफेक्चरर को अपने सामान पर एमआरपी, नेट-क्वांटिटी और उपभोक्ता सहायता संबंधी विवरण बड़े अक्षरों में लिखना होगा, जिससे उपभोक्ता उसे आसानी से पढ़ सके. दोहरे अधिकतम खुदरा मूल्य यानी डूअल एमआरपी पर भी सरकार सख्त होने जा रही है. पहले से डिब्बा बंद किसी भी तरह की एक समान वस्तुओं के लिए अलग-अलग एमआरपी घोषित नहीं की जा सकती.
आमतौर पर देखने को मिलता है कि बड़े होटल, सिनेमा घरों या एयरपोर्ट जैसे स्थानों पर पानी की बोतल जैसे सामान पर अलग एमआरपी छपी होती है, जो आमतौर पर बाजार मेें मिलने वाले से काफी ज्यादा होती है. जो भी मैन्यूफेक्चरर ऐसा करेगा, उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. पासवान के मुताबिक उपभोक्ता इस तरह की किसी भी शिकायत को 14404 पर फोन कर जानकारी दे सकता हैं.

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