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भगवाधारियों की गुण्डागर्दी के सामने पुलिस कानून की लाचारी क्यों ?

भगवाधारियों की गुण्डागर्दी के सामने पुलिस कानून की लाचारी क्यों ?
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भारत विश्वगुरु बनना चाहता है, हमारे देश की सम्रद्ध वैदिक ज्ञान की परम्परा के बल पर हम दावे करते हैं कि भारत भूमि पर बसने वाले ऋषिमुनियों की सोच वासुदेव कुटुंब की थी। इस धरती से अहिंसा परमो धर्म का ज्ञान महावीर स्वामी गौतम बुद्ध ने सम्पूर्ण विश्व को दिया था। इस धरती से सन्देश मिला कि समाज में पिता की आज्ञा मानना पुत्रों के लिए आवश्यक है। राजा दशरथ के पुत्र भगवान राम ने पिता के आदेश पर ही राजसी जीवन त्याग करके वनवास भोगा था ताकि समाज में पिता के कहे शब्द पुत्रो के लिए आदेश बन जाए। पिता के आदेश के सामने समपर्ण करना उनका पालन करना धर्म है। भगवान राम ने राजा होने के बाद धोबी के कहने से सीता माता की अग्नि परीक्षा ली थी ताकि राजा, प्रजा के सवालों का समाधान करके समाज में राजा, प्रजा दोनों की मर्यादा को अपने आचरण से स्थापित करें। साधू जीवन में परमार्थ का भाव सबसे ऊपर होता है।

गौतम बुद्ध ने बार बार बिच्छु के डंक से काटे जाने के बाद भी नदी में डूबकर मरने जा रहे विच्छु को नदी से बाहर निकाल कर उसकी जान बचाई थी। महात्मा बुद्ध ने इस घटना से समाज को सन्देश दिया कि बिच्छु जहरीला जानवर है, काटना उसका धर्म है। बिच्छु बार बार डंक मारकर अपने बिच्छु धर्म का सन्देश दे रहा है तो फिर साधू होकर भी मैं अगर इसे नही बचाउंगा तो मेरा साधू धर्म कहा रहेगा। इसलिए महात्मा बुद्ध ने बार बार डंक खाकर भी उस बिच्छु की जान बचाई ताकि मानव में मानवता बनी रहे। साधू धर्म के त्याग, परोपकार, प्यार बांटने की परम्परा को हमारे देश में सभी धर्म के सूफी संतो ने आगे बढाया है। सभी धर्मो के धर्म ग्रंथो में इसी प्रकार के अनेक उदाहरण पढने से मिल जाते है। नि: संदेह दुष्टों को उनके दुष्टकर्मो का उचित दंड देना भी राजा का राजधर्म होता है।

इन दिनों राजनीतीक लाभ के लिए पूरे विश्व में भृष्ट नेता अपने क्षणिक लाभ के लिए समाज में उन्माद भर रहे है। धार्मिक उन्माद, तनाव के लक्षणों के दुष्प्रभाव अब समाज में देखने को भी मिल रहे है। कही पुत्र सम्पत्ति विवाद में जन्म देने वाले माँ बाप को मार रहे है तो कही भाई भाई को मार रहा है। पत्नीयां अपने शारीरिक सुख के आनंद के लिए जन्म जन्मान्तर का साथ निभाने के सात फेरे लेकर भी अपने प्रेमी से मिलकर पति की ह्त्या करने के जुर्म में पकड़ी जा रही है। समाज का कैसा घोर दानवी करण किया जा रहा है, धर्म के नाम पर देश में आदमी की जान जानवर से सस्ती हो गई है। मजेदार तथ्य यह है कि हिन्दू मुस्लिम दोनों ही समाजो में उन्माद, धार्मिक कट्टरता भरने वाले मुल्ला, पंडित, साधू भृष्ट नेता सत्ता का आनंद लेकर ठाठ से अपना जीवन जी रहे हैं। कश्मीर के अधिकाँश नेताओ के बच्चे विदेशो में डॉक्टर, इंजीनियर बनने की पढ़ाई कर रहे है और कश्मीर के बच्चो को ये मुल्ले हथियार बंद सेना के जवानो पर पत्थर फैकने के लिए उकसा रहे हैं। हथियार बंद सेना के जवानो की गोलियों से मरने वाले गरीबो के बच्चों का दर्द का एहसास धार्मिक मुल्लो को नही है। भगवा आतंक को पैदा करने वाला संघ परिवार देश में माले गाँव, अजमेर दरगाह में बम विस्फोट कराकर अपना रूप दिखा चुका है। राजस्थान के अलवर जिले के बहरोड़ कस्बे में भाजपा के उन्मादी विधायक ज्ञान देव आहूजा अपनी जहरीली वाणी का प्रभाव दिखा चुके हैं।

एक गोपालक किसान पहलु खां को भगवा गुंडों की भीड दिन दहाड़े पीट पीट कर मार डालती है। दुर्भाग्य से राजस्थान सरकार के कूप मंडूक गृहमंत्री गुलाब चन्द कटारिया किसान पहलु खां को गो-तस्कर बताकर बेशर्मी से बयान दे देते है। उत्तर प्रदेश में दादरी का अखलाख हत्याकांड, गुजरात का उना दलितकांड, हरियाणा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश में हर कहीं भाजपा के पाले जहरीले नाग जहर घोलकर बेगुनाह लोगों की हत्याए कर रहे हैं। भगवा आतंक की फेक्ट्री के साँचो में पले बढ़े कूप मंडूक नेता फिर इन हत्याओं को धर्म से जोड़कर जायज करार देकर न जाने इस स्वंतत्र राष्ट्र को किस दिशा में ले जाना चाहते है। आज देश में हिन्दू तालीबानी शासन का खतरा दिखाई दे रहा है।

देश के बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में मिली भाजपाईयों के बड़ी जीत पच नही रही है। जीत के अहंकार से ग्रसित होकर अब ये भगवा गुण्डे देश के संवेधानिक ताने-बाने को नष्ट करने में लगे हैं। देश की राजधानी में किसान अपना मूत्र पी रहा है। किसानो की, व्यापारियों की एवं देश की जनता की परेशानियों को सुनकर उनका हल करने के बजाय सरकारे हठ धर्मी कर रही है। सभी परेशान होकर चीख रहे है पर देश का मीडिया और सरकार जन समस्याओं से अनजान बनकर अपनी धुन में मगन हो रहे है। देश तानाशाही के नये दोर से देश गुजर रहा है। शायद न्याय पालिका पर भी अब तो सत्ता का प्रभाव दिखने लगा है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में भाजपा के भगवा सांसद ने बगैर इजाजत के अम्बेडकर जयंती पर जुलुस निकाल कर जिले को हिन्दू मुस्लिम दंगो की आग में जलाने का प्रयास किया। सहारनपुर जिले के जाबांज पुलिस कप्तान लव कुमार ने स्वयं दीवार बनकर भगवा आतंक के वाहक बने सांसद को बेगुनाहों के खून से होली खेलने का खेल नही खेलने दिया। निरंकुश हत्यारा बनकर सांसद अपने पालतू भगवा गुंडों के बल पर कस्बे को लाशों से पाट देना चाहता था। लेकिन ईमानदार कर्तव्य निष्ट पुलिस अधिकारी लव कुमार ने भाजपा सांसद को दरिंदा बनने से रोक दिया। उसी का परिणाम था की वहशी दरिंदो की भगवा फोज को लेकर सहारनपुर सांसद पुलिस अधीक्षक के घर जा धमका। सांसद राघव लखन पाल ने गुंडों की भीड़ के बल पर पुलिस अधीक्षक के घर में घुसकर पुलिस अधिकारी के परिवार को भी धमकाया। इसी प्रकार आगरा में पुलिस कोतवाल को मारापीटा गया, एक थाने में भी आग लगा दी गई। इन सभी घटनाओ में कानून को तोड़ने वाले समान रूप से भाजपा के पाले पोसे गुण्डे थे।

देश की जनता और सम्पूर्ण विश्व देख रहा है कि देश की धरती पर होने वाला भगवा आतंकियों का हिंसा का तांडव बेकाबू होता जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री के साथ उनकी पार्टी के अधिकांश नेता भगवा भीड़ की पाशविक हिंसा की कभी घोर निंदा नही करते है। इसके कारण भी बड़े साफ़ है ये नफरत की हिंसा फैलानी वाली घटनाए भाजपा की सत्ता की राजनीती को देश में बरकरार रखने के लिए बहुत जरुरी है। देश की जनता के बुनियादी सवाल, भाजपा के जुमले, प्रधानमंत्री के वादों को भुलाने के लिए एक तय रणनीति के तहत देश में इस प्रकार की घटनाए जनता का ध्यान बंटाने के लिए की जाती है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशेली के कारण देश के प्रधानमंत्री व उनकी पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह में असुरक्षा का भाव गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जुमले बाजी की राजनीती पर अब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ताबड़ तोड़ काम करने की शैली भारी पड़ रही है। प्रधानमंत्री को अब योगी से खतरा नजर आने लगा है। इस कारण सहारनपुर के घटना में वहां के सांसद का लिप्त होना भी इशारा करता है कि इस खेल की पटकथा दिल्ली में लिखी जा रही है। दिल्ली दरबार स्वयं ही योगी की सरकार को विफल करने का षडयंत्र बुन रहा है। भाजपा के नेताओ का इतिहास रहा है कि उनकी पार्टी की लोक प्रियता तभी बढती है जब वे देश में हिन्दू मुस्लिम दंगे कराकर हजारो लोगों को मारें।

लालकृष्ण आडवाणी अपनी रथ यात्रा के बल पर दंगे कराकर हजारों को मार चुके हैं। वर्ष 2002 के दंगो ने प्रधानमंत्री की राजनीती को मजबूती देकर उनके देश का प्रधानमंत्री बनने का रास्ता तय करवाया है। भाजपा में ही नही कांग्रेस पार्टी ने भी संत जर्नेल सिंह भिंडरावाला का उदय कराकर उसका जमकर अकाली दल के विरुद्ध धार्मिक उपयोग किया था। भाजपा में आज हर कोई नफरत फैलाकर रातो रात दंगे कराकर हिन्दू समाज का सच्चा रक्षक बनने को बेताब दिखाई देता है। यूपी में मुख्यमंत्री बने योगी की राजनीती का सफ़र भी इसी प्रकार का है। भाजपा के शिखर पर बैठे लोगो का सियासी राजनैतिक सफ़र की दास्तान भी इसी प्रकार की है I भाजपा के शिखर पर बैठे लोगो की राजनैतिक शुरुआत ही जब दंगो की राजनीती के कारण हुई हो तो फिर वे क्यों ओर किस मुंह से धार्मिक उन्माद की दंगो की राजनीती को रोकेंगे ?

दुर्भाग्य से भाजपा की जननी संघ भी भाजपा के दंगाई उग्र हिंदुत्व के पक्षधर माने जाने वाले नेताओ को ही आगे बढाता है। आने वाले समय में देश में भाजपा की इस उग्र धार्मिक राजनीती के कारण अनेक दंगे होने की सम्भावना से कोई इनकार नही कर सकता है। दंगो के कारण लोग मरे या फिर लोगो की रहने के आशियाने जले, बेगुनाह लोगो की लाशो से व गरीबो के घरो में आग लगाने से भाजपा की राजनीती में वोटों का इजाफा होता है। इस राजनैतिक लाभ के लिए ही देश भर में भाजपाई जहर घोल रहे हैं। अब तो इनका दुससाहस और बढ़ गया है I मुस्लिमो की जगह दंगो को रोकने वाली पुलिस बल के जवान अधिकारी भी अब तो भाजपाइयों को उनके दुश्मन नजर आ रहे है। मच में देश बदल रहा है देश में हिन्दु तालीबानी शासन का आगाज हो गया है।

दुर्भाग्य से इन सब सुलगते सवालों के जवाब देश का मीडिया भाजपा की सरकार से नही बल्कि भाजपा के तालिबानी शासन का विरोध करने वालो से ही पूछ रहा है। देश का मीडिया छदम राष्ट्रवाद के खतरे को भांपने में विफल होकर कार्पोरेट घरानों की लूट में सहायक बनी केंद्र की भाजपा सरकार के विरोध को भी राष्ट्र विरोधी करार दे रहा है । देश और देशवासियों के लिए इस प्रकार के राजनीती शुभ संकेत नही है।

मो. हफीज, व्यूरो चीफ, राजस्थान
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