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भारत ने पाकिस्तान में अपने राजनयिकों से कहा- 'वहां बच्चों को स्कूल न भेजें'

 Special Coverage News |  2016-07-26 09:08:28.0  |  New Delhi

भारत ने पाकिस्तान में अपने राजनयिकों से कहा- वहां बच्चों को स्कूल न भेजें

नई दिल्ल्ली: भारत-पाक के संबन्धों में बढ़ती कडवाहट के बीच भारत सरकार ने सोमवार को इस्लामाबाद में अपने उच्चायोग में तैनात राजनयिकों और अधिकारियों से इस अकादमिक सत्र से अपने बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था पाकिस्तान से बाहर करने की सलाह दी है। भारत सरकार ने कहा कि या तो अपने बच्चों को भारत भेजे या फिर किसी और देश में पढ़ायें।

यह घोषणा सरकार द्वारा अपने राजनयिक मिशनों के कर्मचारियों और नीतियों तथा पाकिस्तान की स्थिति की समीक्षा के बाद की गयी है। भारत सरकार के इस फैसले से करीब 60 भारतीय बच्चों पर असर पड़ेगा। जिनमे तकरीबन 50 बच्चे अमेरिकन स्कूल में और 10 रूट्स इंटरनेशनल स्कूल में पढ रहे हैं।

जम्मू और कश्मीर के मौजूदा हालात के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने सोमवार को कहा की, 'अपने राजनयिक मिशनों के कर्मचारियों एवं संबंधित नीतियों, जिनमें संबंधित स्थानों की वर्तमान स्थिति भी शामिल है, की समीक्षा करना सभी देशों के लिए सामान्य परिपाटी है।' उन्होंने कहा, 'इस अकादमिक सत्र से, इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था अगले नोटिस तक पाकिस्तान से बाहर करने की सलाह दी गयी है।'

रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय अफसरों के करीब 50 बच्चे इस्लामाबाद के अमेरिकन स्कूल में पढ़ते हैं। भारतीय अधिकारी भी पाकिस्तान को 'जैसे को तैसा' जवाब देने से हिचकिचा नहीं रहे हैं। बीते दिनों भारत स्थित पाकिस्तानी उच्चायुक्त के अधिकारियों ने अपने बच्चों को भारत के स्कूलों से निकाल लिया था।

कश्मीर में जारी हिंसा के बाद भारत को पाकिस्तान में रह रहे अपने नागरिकों की काफी चिंता है। 2014 में पेशावर के एक स्कूल में हुआ आतंकी हमला भी भारत को इस बात पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। इस खौफनाक हमले में 148 मासूम छात्रों ने अपनी जान गवाई थी। कश्मीर के मौजूदा हिंसा को लेकर पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद भारत ने अपनी नाराज़गी जताई और पाकिस्तान से इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायुक्त के अधिकियों की सुरक्षा कड़ी करने की अपील की।

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