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मिशन "मेघ प्रहार" दुश्मनों को कैसे नेस्तनाबूत कर देते हैं सेना के जवान, देखें वीडियो

 Special Coverage News |  2016-07-15 06:46:40.0  |  मथुरा

मिशन मेघ प्रहार दुश्मनों को कैसे नेस्तनाबूत कर देते हैं सेना के जवान, देखें वीडियो

मथुरा: गुरुवार की सुबह यमुना किनारे अचानक टैंक, तोप लेकर सेना के जवान आ पहुंचे और देखते ही देखते दुश्मन के ठिकानों पर गोलाबारी शुरू कर दी। यमुना पार दुश्मन के ठिकानों पर बमबारी होते ही धुएं के गुबार उठने लगे। हेलीकॉप्टर से हवाई निगरानी शुरू कर दी गई। दुश्मन को घेरने के लिए टैंक पानी में तैरने लगे। 45 मिनट में ही सेना ने दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर डाला।

यहां यमुना पार गोकुल बैराज के पास सेना की स्ट्राइक वन कोर ने आधुनिक टैंकों के साथ युद्धाभ्यास किया। इसको 'मेघ प्रहार' नाम दिया गया। जिसमें सेना के जवानों ने आधुनिक टैंकों से नदी की तेज धारा को चंद मिनटों में पार कर दुश्मनों को मारकर विजय हासिल की।

नदी के पानी में एक साथ तीन टैंकों को तेज गति से उतारा गया। यह नजारा बड़ा ही रोमांचकारी था। सेना के जवानों T90 और BMP2 टैंक को पानी में उतारा तो उनकी ताकत का अंदाजा लगाना नामुमकिन था। सेना के जवानों को सूचना मिली कि नदी के उस पार दुश्मन छिपे हैं। दुश्मनों की संख्या और उसकी ताक़त की रेकी के लिये दो-दो हेलीकॉप्टर से जवानों को नदी के उस पार उतारा गया। इसके बाद वे जवान दुश्मनों की सारी जानकारी अपनी टीम दे देते हैं। इस जानकारी के आधार पर सेना हमला कर देती है। इस दौरान सेना के जवानों ने थल, जल, नभ से दुश्मनों पर वार किया। गोले बरसाए और दुश्मनों को नेस्तनाबूत कर दिया।

यमुना किनारे स्ट्राइक वन कोर के कमांडिग अफसर लेफ्टिनेंट जनरल शौकीन चौहान पूरे ऑपरेशन को ऑपरेट कर रहे थे। कुछ ही देर में सेना की टुकड़ी ने दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए। विजयी संदेश आते ही सैनिक भारत माता की जय और जय हिद के नारे लगाने लगे।


युद्धाभ्यास के बाद मथुरा स्थित सेना की स्ट्राइक 1 कोर के कमांडिग अफसर लेफ्टिनेंट जनरल शौकीन चौहान ने बताया कि यमुना नदी के प्रवाह को पार करने के लिए किए गए युद्धाभ्यास को "मेघ प्रहार"नाम दिया गया था। इस प्रदर्शन में हिसार स्थित आर्म्ड डिवीजन की फार्मेशन के विभिन्न उपकरणों, संयुक्त कार्य क्षमता, व्यावसायिक दृष्टि और डॉट डिवीजन की युद्धक क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन किया गया। इसमें आधुनिक टी-90 और बीएमपी-2 टैंकों ने नदी अवरोधक को पार करते हुए युद्ध लड़ने की क्षमता का परीक्षण किया।

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