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नकली भीम ऍप बनाकर ठगी करने वाले को मुरादाबाद क्राइम ब्रांच ने किया गिरफ्तार

लेनदेन के लिए बेहद सुरक्षित होने का दावा करने करने वाले नरेंद्र मोदी द्वारा लांच किया जाने वाला भीम ऍप की डुप्लीकेट एप्लीकेशन तैयार करके लोगो के बैंक खातों से रूपये उड़ाने वाले एक युवक को क्राइम ब्रांच ने सायबर सेल की सहायता से बैंगलोर से गिरफ्तार किया है

 Alok Mishra |  2017-09-02 09:33:28.0

नकली भीम ऍप बनाकर ठगी करने वाले को मुरादाबाद क्राइम ब्रांच ने किया गिरफ्तार

मुरादाबाद : लेनदेन के लिए बेहद सुरक्षित होने का दावा करने करने वाले नरेंद्र मोदी द्वारा लांच किया जाने वाला भीम ऍप की डुप्लीकेट एप्लीकेशन तैयार करके लोगो के बैंक खातों से रूपये उड़ाने वाले एक युवक को क्राइम ब्रांच ने सायबर सेल की सहायता से बैंगलोर से गिरफ्तार किया है . आरोपी के कब्जे से एक लैपटॉप तीन मोबाइल बरामद किये है .बैंगलोर कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पुलिस ने उसे शुक्रवार को मुरादाबाद कोर्ट में पेश किया ,जहां से उसे जेल भेज दिया गया .

सीओ क्राइम ब्रांच अर्चना सिंह ने बताया कि पकड़ा गया आरोपी मोहातिर मोहम्मद सीफत निवासी रक्सौल (बिहार )का रहने वाला है .वह वर्तमान में बैंगलोर स्थित नारायणपुर हिन्नूर में रहता था .जहां से उसे गिरफ्तार किया गया है .
आरोपी ने कोतवाली के बनवटा गंज में रहने वाले सर्राफ मनीष गोयल के खाते से 21 दिसंबर 2016 को 25 हजार रूपये निकाले थे . कोतवाली थाने में दर्ज साइबर क्राइम के मामले में साइबर एक्सपर्ट रवि की मदद से उसे पकड़ा गया . जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने ठगी के लिए भीम ऍप,के अलावा आईसी आईसी आई ,इंडसंड बैंक ,बिंगो अमिताभ ,कोको रेल ,जॉब वॉलेट ,मल्टी बी ,ई-बैंकिंग ,एटीएम बैंकिंग ,ऐंड्रॉयड स्टूडियो प्रोजेक्ट ,इंस्टंट हेल्थ इंश्योरेंस ,प्राइवेट ब्राउजर और एम ट्रेस नाम से भी अप्लीकेशन तैयार कर राखी थी .जिनका इस्तेमाल करने पर यूजर के बैंक खाते की जानकारी आरोपी के पास एक ऐंटी वायरस के जरिये पहुंच जाती थी ,जिसके बाद वह खातों से रूपये उड़ाता था .
क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा मोहातिर मोहम्मद सीफत ने पुलिस हिरासत में खुलासा किया है कि वह रोजाना लोगो के खाते से लाखों की ठगी करता था .रूपये उड़ाने के बाद वह शॉपिंग करता था ,खरीदे गए सामान को बेचकर वह नकदी हासिल करता था .पुलिस का दावा है कि आरोपी को पूछताछ के लिए जल्द ही रिमांड पर लिया जाएगा .
ऐसे आया गिरफ्त में
सूत्रों के मुताबिक़ पुलिस आरोपी की तलाश लगभग आठ माह से कर रही थी .वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था .पुलिस को उम्मीद थी कि वह बकरीद पर अपने रेस्टोरेंट पर जरूर आएगा .पुलिस ने उसके रेस्टोरेंट के पास ही एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में अपना डेरा डाल लिया . पुलिस ने बताया कि आरोपी को एक महीने पहले से खुद पर नजर रखे जाने का डर था .इसलिए उसने फेसबुक से सारी पोस्ट डिलीट कर दी थी .खुद को रेस्टोरेंट और बैंगलोर में एक कमरे में बंद रखता था .वह सिगरेट की ऐश फेंकने के लिए बालकनी में आया तो उसे देखा और दबोच लिया .
पीड़ित ने खुद फेसबुक के जरिये किया था ट्रेस
पीड़ित सर्राफ व्यवसायी ने बताया कि उन्होंने कोतवाली पुलिस से शिकायत पर घटना के 21 दिन बाद एफआईआर दर्ज की गयी थी .शिकायत मिलते ही साइबर सेल की टीम ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी थी .शुरुआत में पता चला कि जिस लैपटॉप के जरिये आरोपी ने ठगी की घटना को अंजाम दिया था ,वो लैपटॉप किसी दूसरे व्यक्ति का था .लैपटॉप के असली मालिक के बारे में जानकारी कर उससे पूछताछ की तो ठग के बारे में जानकारी हुई .इसके बाद आरोपी को ट्रेस करने के लिए उसके फेसबुक अकॉउंट को सर्राफ व्यवसायी ने खंगालना शुरू किया .और उसके फेसबुक दोस्तों की मदद से उसे ट्रेस क्र लिया था .उससे लोगो का डाटा खरीदने का सौदा तय हुआ .इसके बाद साइबर सेल के हत्थे आरोपी का मोबाइल नंबर लग गया ,जिसके बाद लोकेशन ट्रेस कर उसे पकड़ा गया .
पुलिस ने बताया कि आरोपी ने करीब 15 से ज्यादा अप्लीकेशन और पेज तैयार किये है .इनमेसे कुछ अप्लीकेशन उसने इंटरनेट यूजर्स के लिए बनाई है .जिनसे वह ठगी नहीं करता था .इनमे बच्चो को खेलने के लिए गेम्स भी शामिल है .
आरोपी ने ठगी के पैसे से रेस्टोरेंट भी खोला हुआ है ,जिसमे उसका मामा पार्टनर है .पुलिस का कहना है कि ठग को यही से गिरफ्तार किया गया था .आरोपी अपने ही रेस्टोरेंट से घटना को अंजाम देता था .
वही आरोपी को ब्रांडेड कपड़े पहनने ,महंगा मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने का शौक था .उसकी एक गर्लफ्रेंड भी है ,ठगी की रकम वह अय्यासी में उडाता था .उसके कब्जे से बरामद मोबाइल और लैपटॉप एप्पल कम्पनी के है .
मुझे एक मौका दो मै पकिस्तान को कंगाल बना दूंगा
आरोपी को जब पुलिस ने गिरफ्तार किया तो उसने खुद को छोड़ देने कि मांग की .आरोपी ने पुलिस से कहा कि वह उसे छोड़ दे तो वह पकिस्तान के लोगो को ठगी का शिकार बनाकर कंगाल बना देगा .पकिस्तान के नागरिकों के बैंकखातों के बारे में भी वह जानकारी कर रहा था .
ऐसे पहुँचती थी बैंकखातों की डिटेल
आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने डुप्लीकेट अप्लीकेशन तैयार कर रखी थी .जिनमे एक ऐंटी वायरस जुड़ा होता था .जब भी यूजर उसके द्वारा बनाए गयी ऍप मोबाइल में इंस्टोल करते थे तो उनके बैंकखातों का डाटा उसके पास पहुंच जाता था .लाखों लोगो के बैंकखातों की जानकारी उसके पास मौजूद थी .
ऐसे बचे डुप्लीकेट ऍप के इस्तेमाल से
सीओ क्राइम अर्चना सिंह ने बताया कि डुप्लीकेट अप्लीकेशन का यूआरएल नंबर एचटीटीपीएस से शुरू नहीं होता है ,जबकि असली ऐप्लिकेशन का यूआरएल नंबर एचटीटीपीएस से शुरू होता है .
इसके साथ ही डुप्लीकेट ऍप बनाने पर उसमे अबाउट अस के ऑप्शन को चेक करने पर यह जानकारी मिलेगी कि उस ऍप को बनाने वाला व्यक्ति या संस्थान है .किसी व्यक्ति द्वारा बनायी गयी बैंक या भीम ऍप डुप्लीकेट होती है .इसके साथ ही सीओ ने बताया कि सभी लोगो को अपने एटीएम ,डेविट कार्ड के पिन कोड को समय समय पर बदलते रहना चाहिए .जिससे कि शॉपिंग करने के वक़्त इस्तेमाल किये गए पिन कोड के बदल दिए जाने पर जालसाज लोग ठगी की वारदात को अंजाम नहीं दे सके .

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