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बदल दी इस आईपीएस ने सहारनपुर की तस्वीर, अब हैरान है सब दंगाई!

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बदल दी इस आईपीएस ने सहारनपुर की तस्वीर, अब हैरान है सब दंगाई!
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इस अफसर की दिलेरी से सहारनपुर जलने से बच गया है. एक बड़ा षंड्यंत्र सहारनपुर में लगभग एक महीने से आग लागाने की फिराक में है. लगभग 20 दिन पहले यहाँ के एसएसपी बनाये गए सूबे के सबसे ईमानदार आईपीएस अफसरों में से एक सुभाष चंद्र दुबे पर यहां खुद को साबित करने का भारी दबाव है.


अचानक से सहरानपुर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों की सुर्खियों में है. यहाँ दलित और ठाकुरो के बीच के दो युवा संगठन जय राजपुताना और भीम आर्मी में वर्चस्व की जंग छिड़ी है. जिसने जातीय संघर्ष रूप ले लिया है. यहाँ के एक गांव में पहले दोनों समुदायों में जयंती को लेकर संघर्ष हुआ जिसमें राजपूत समाज के एक युवक की मौत हो गयी. सूबे में मुख्यंमंत्री और डीजीपी दोनों राजपूत समाज से है. उसके बाद दलितों के घर में आगजनी हुई.


इसके बाद 9 मई को दलितों के एक संग़ठन भीम आर्मी ने सहारनपुर की सड़को पर अराजकता का नंगा नाच किया. जिसमे भारी नुकसान हुआ. पूरी घटना को देखकर ऐसा लगा जैसे इसकी तैयारी लंबे समय से चल रही थी. घटना की गंभीरता को समझते हुए सहारनपुर पुलिस ने जिस संयम से काम लिया वो काबिल ए तारीफ है. उन्होने नेताओ के पेंच कसे है और गंभीर धाराओं में मुक़दमे दर्ज कर गिरफ्तारियां की है.


खुद पुलिस कप्तान सुभाष चंद्र दुबे ने अपने अनुभव और दिलेरी का अदुभुत नजारा पेश करते हुए एक बहुत बड़े षंड्यंत्र को निष्फल कर दिया. अपनी हिकमते अमली और दूरदर्शिता से उन्होंने हालात पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है. सहारनपुर के हालात अब सामान्य हो गए है. जो संभवत नगर निगम के हाल ही होने वाले चुनाव के मद्देनजर बिगाड़ दिए गए है. दुबे का प्रथम पंक्ति का नेतृत्व उन्हें श्रेष्ठ सिद्ध कर रहा है. उनकी माहौल को नियंत्रित करने कार्ययोजना को अफसरों की सराहना मिली है.


सहारनपुर में जिस तरह की स्थिति पैदा की गयी थी उसमे संघर्ष तय था मगर दुबे ने गाँव गाँव प्रधान पूर्व प्रधान आदि को भरोसे में लेकर एक योजना तैयार की. अब इस योजना का असर दिख रहा है ,असमाजिक तत्वों की सुचना तुरंत पुलिस तक पहुंच रही है और ऐसे तत्व दिखाई नही पड़ रहे. पहली पारी दंगाईओ ने खेल दी है और अब पुलिस की बारी है. कुछ पुराने जमे पड़े अफसरों से पुलिस निष्क्रिय जैसी थी. नए पुलिस कप्तान ने नई टीम भी जोड़ ली है. कमाल की बात यह है जातीय तनाव होने के बावजूद उनकी पुलिस लगातार गुडवर्क भी कर रही है. फिलहाल जनपद पर पुलिस ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और ऐसा नये पुलिस कप्तान सुभाष चंद्र दुबे की कार्यक्षमता और बौद्धिक फैसलों के दम पर हुआ है.


उन्होंने भीम आर्मी को मिलने वाली सहानभूति को तोड़ने का काम किया और संगठन की असलियत को लोगो के सामने रखा. जिससे भीम आर्मी के समर्थन में कमी आयी. दूसरे दलित संघठनो को अपने साथ जोड़ा और वो यह यकीन दिलाने में कामयाब हो गए की भीम आर्मी संविधान विरोधी गतिविधियों में लिप्त है. सिर्फ 10 दिन में उन्होंने बिजली की तेजी से काम किया और भीम आर्मी की सबसे बड़ी ताकत सोशल मीडिया पर नियंत्रण कर लिया. अब सहारनपुर उनके पूरे नियंत्रण में है.

आसमोहमद कैफ

शिव कुमार मिश्र
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