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जगन्नाथ रथ यात्रा को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, इन शर्तों के साथ मिली इजाजत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पुरी रथ यात्रा स्वास्थ्य से समझौता किए बिना मंदिर समिति, राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय के साथ आयोजित की जाएगी.

 Arun Mishra |  22 Jun 2020 11:42 AM GMT

जगन्नाथ रथ यात्रा को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, इन शर्तों के साथ मिली इजाजत
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पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा को सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दिखा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ रथयात्रा की इजाजत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पुरी रथ यात्रा स्वास्थ्य से समझौता किए बिना मंदिर समिति, राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय के साथ आयोजित की जाएगी. इससे पहले कोलरा और प्लेग के दौरान भी रथ यात्रा सीमित नियमों और श्रद्धालुओं के बीच हुई थी.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली दो जजों की बेंच के सामने भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा पर सोमवार को सुनवाई की गई. केंद्र ने कोर्ट ने सामने कहा कि बिना भीड़ के धार्मिक रीतियों को पूरा करने की अनुमति दी जानी चाहिए, पूरी सावधानी के साथ यात्रा पूरी की जाएगी.

केंद्र की ओर से SG तुषार मेहता ने कहा कि सदियों की परंपरा को रोका नहीं जा सकता. यह करोड़ों लोगों की आस्था की बात है. यदि भगवान जगन्नाथ कल नहीं आएंगे, तो वे परंपराओं के अनुसार 12 साल तक नहीं आ सकते हैं. यह सुनिश्चित करने के लिए की महामारी ना फैले, सावधानी बरतते हुए राज्य सरकार एक दिन के लिए कर्फ्यू लगा सकती है.

SG तुषार मेहता – कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या से समझौता नहीं किया गया है और लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है.

CJI ने पूछा, UOI (यूनियन ऑफ इंडिया) को रथयात्रा का संचालन क्यों करना चाहिए? शंकराचार्य को क्यों शामिल किया जा रहा है? पहले से ट्रस्ट और मंदिर कमेटी ही यात्रा आयोजित करती रही है तो शंकराचार्य को सरकार क्यों शामिल कर रही है?

SG तुषार मेहता – दिशानिर्देशों के कारण केंद्र तस्वीर में आया है. हम तो मशविरा की बात कर रहे हैं. वो धार्मिक सर्वोच्च गुरु हैं.

उड़ीसा सरकार की तरफ से हरीश साल्वे – यात्रा पूरे राज्य में आयोजित नहीं की जा सकती. कर्फ्यू लगा दिया जाय. रथ को सेवायत या पुलिस कर्मी खींचें जो कोविड निगेटिव हों.

याचिकाकर्ता की ओर से वकील रंजीत कुमार – ढाई हजार पंडे मंदिर व्यवस्था से जुड़े हैं. सबको शामिल करने से दिक्कत और अव्यवस्था बढ़ेगी.

CJI – हमें पता है. ये सब माइक्रो मैनेजमेंट राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. केंद्र की गाइडलाइन के प्रावधानों का पालन करते हुए जनस्वास्थ्य के हित मुताबिक व्यवस्था हो.

SG तुषार मेहता – गाइडलाइन के मुताबिक व्यवस्था होगी.

CJI – आप कौन सी गाइड लाइन की बात कर रहे हैं?

SG तुषार मेहता – जनता की सेहत को लेकर गाइड लाइन का पालन होगा.

वकील रंजीत कुमार – 10 से 12 दिन की यात्रा होती है. इस दौरान अगर कोई प्राब्लम होती है तो वैकल्पिक इंतजाम जरूरी है.

टीवी पर लाइव देख सकते हैं लोग

मेहता ने कहा कि श्री शंकराचार्य की ओर से तय किए गए अनुष्ठानों में वो सभी सेवायत भाग ले सकते हैं जिनका कोरोना टेस्ट नेगेटिव है. लोग टीवी पर लाइव टेलीकास्ट देख सकते हैं और आशीर्वाद ले सकते हैं. पुरी के राजा और मंदिर समिति इन अनुष्ठानों की व्यवस्था की देखरेख कर सकते हैं.

18 जून को जारी हुआ था रोक का आदेश

मालूम हो कि रथयात्रा पर रोक का आदेश 18 जून को चीफ़ जस्टिस की तीन जजों की बेंच ने दिया था. इस आदेश में संशोधन की मांग को लेकर दर्जन भर याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई हैं, जो सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई के लिए एक जज की बेंच जस्टिस एस रविन्द्र भट्ट के सामने लगी थीं.

यहां पर क़ानूनी पेंच यह था कि एक जज तीन जजों की बेंच के आदेश में संशोधन नहीं कर सकती, इसलिए केंद्र सरकार ने आज ये मामला सुप्रीम कोर्ट में बैठे दो जजों वाली जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच के सामने रखा गया. जिस पर जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि वह चीफ़ जस्टिस से मशवरा करके सुनवाई की, क्योंकि 18 जून को रथयात्रा पर रोक लगाने का आदेश चीफ़ जस्टिस की बेंच ने दिया था.

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