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..कभी राजीव गांधी के करीबी रहे सुब्रमण्यम स्वामी के बारे में जानिए 10 खास बातें

 Special News Coverage |  19 Dec 2015 11:13 AM GMT


Subramanyam Swami


नई दिल्ली : नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को आज पचास-पचास हजार के निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया है। अब इस मामले की अगली सनवाई 20 फरवरी को होगी। सालों पुराने इस मामले को याचिकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने खोला था।

सुब्रमण्यम स्वामी को गणित और आर्थिक मामलों के साथ-साथ कानून का भी जानकार माना जाता है। वे कभी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी हुआ करते थे, तो समय-समय पर भाजपा के भी खास रहे हैं। हालांकि अटल बिहारी वाजपेयी ने हमेशा उनसे दूरी रखने की कोशिश की, फिर भी भाजपा के कुछ बड़े नेताओं का उनसे जुड़ाव रहा। एक जमाना वो भी था, जब स्‍वामी आयरन लेडी इंदिरा गांधी से टकरा गए थे और कोर्ट से जीतकर भी आए थे।


हम आपको सुब्रमण्यम स्वामी के जीवन के बारे में कुछ ऐसी 10 बातें बताने जा रहे है जिन्हें शायद ही कोई जानता होगा।

1. सुब्रमण्यम स्वामी एक गणितज्ञ के बेटे थे अपने पिता की ही तरह वह भी गणितज्ञ बनना चाहते थे। उन्होंने हिंदू कॉलेज से गणित में स्नातक की डिग्री ली थी। उन्होंने भारतीय सांख्यिकी इंस्टीच्यूट, कोलकाता से अपनी आगे की शिक्षा पूरी की।

2. 1963 में उन्होंने एक शोध पत्र के आधार पर यह बताया कि महालानोबिस की सांख्यिकी का तरीका मौलिक नहीं है, वह अपने पुराने तरीके पर ही आधारित है।

3. स्वामी ने 24 वर्ष की आयु में हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर ली थी। 27 साल की उम्र में वह हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी में ही पढ़ाने लगे। 1968 में अमृत्य सेन के आमंत्रण पर वह दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकॉनामिक्स में पढ़ाने लगे और 1969 में आईआईटी दिल्ली से जुड़ गए।

4. स्वामी ने सेमिनारों में भाषण भी दिए और पंचवर्षीय योजनाओं को खत्म करने को कहा। जिस पर इंदिरा गांधी का कहना ता कि यह विचार वास्तविकता से बिल्कुल अलग है।

5. 1972 में उन्हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। इसके लिए वह अदालत तक गए जहां फौसला उनके पक्ष में था वह एक दिन के लिए IIT गए और उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया।

6. स्वामी ने 1974 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की। नानाजी देशमुख ने उन्हें जनसंघ के लिए राज्यसभा में भेजा था।

7. स्वामी की राजीव गांधी से अच्छी मित्रता थी। बोफोर्स कांड के दौरान वे सदन में ये सार्वजनिक तौर पर ये कह चुके थे कि राजीव गांधी ने कोई पैसा नहीं लिया है।


8. स्वामी चंद्रशेखर के प्रधानमंत्री काल में वाणिज्य और कानून मंत्री रहे। नरसिम्हा राव सरकार के समय विपक्ष में होने के बावजूद स्वामी को कैबिनेट रैंक का दर्जा मिला।

9. स्वामी जनता पार्टी के सदस्य थे। 1990 में वह जनता पार्टी के अध्यक्ष थे।

10. सोनिया गांधी को मुश्किल में डालने वाले स्वामी ने 1999 में वाजपेयी सरकार को गिराने की कोशिश की थी। इसके लिए उन्होंने सोनिया और जयललिता की अशोक होटल में मुलाकात भी कराई। हालांकि, ये कोशिश नाकाम हो गई। इसके बाद वह हमेशा गांधी परिवार के खिलाफ ही नजर आए।

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