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भाजपा में बढ़ती आपसी खींचतान!

केंद्रीय नेतृत्व से लेकर उत्तर प्रदेश के राज्य नेतृत्व तक भारतीय जनता पार्टी में आप सी टकराव की खबरें मिल रही हैं?

 Majid Ali Khan |  30 Oct 2018 7:23 AM GMT  |  दिल्ली

भाजपा में बढ़ती आपसी खींचतान!
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माजिद अली खान (राजनीतिक संपादक)

केंद्रीय नेतृत्व से लेकर उत्तर प्रदेश के राज्य नेतृत्व तक भारतीय जनता पार्टी में आप सी टकराव की खबरें मिल रही हैं. भाजपा जब केंद्र की सत्ता पर बैठी थी उस वक़्त ऐसा लगता था की मानो ये सरकार अगले दस पंद्रह साल तक चलती रहेगी और चुनाव तो होंगे लेकिन भाजपा की मज़बूत किलाबंदी को कोई तोड़ नहीं पायेगा. पिछले कुछ कुछ दिनों में सत्ता और पार्टी के गलियारों से जो बातें पता चल रही हैं उससे अंदाज़ा लगाना ज़्यादा मुश्किल नहीं की दिल्ली, लखनऊ और नागपुर तक अंदर अंदर बेचैनी बढ़ रही है और कुछ नई खिचड़ी पक रही है.

अगर हम दिल्ली की बात करें तो नई बात ये सामने आयी है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का गणित भी सही फिट नहीं बैठ रहा है. सूत्रों के मुताबिक़ राफेल और सीबीआई जैसे मुद्दों पर ज्यों ज्यों सरकार घिरती जा रही है वैसे वैसे ही सरकार में शामिल लोगो की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं. इन दोनों मुद्दों पर सबसे ज़्यादा परेशानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की बढ़ने वाली है. क्यों की ये दोनों मुद्दे सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े हुए हैं और भाजपा हाईकमान भी सीधे इनमे शामिल रहे हैं.

अभी बाबरी मस्जिद और राम मंदिर मामले को लेकर जिस तरह की सियासत गर्मायी है इसमें भाजपा के लोगो के अलग अलग बयान आये हैं उससे भी ये ज़ाहिर होता है की आपसी खींचतान शुरू हो गयी है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई के टाले जाने के बाद हिन्दू अतिवादी संघटनो की तरफ से जिस तरह सरकार पर मंदिर के लिए विधेयक लाने का दबाव बन रहा है उसे लेकर भी केंद्रीय मंत्रियो के अलग अलग बयान आ रहे हैं. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा की सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करती है और इस मामले में भी करेगी लेकिन दूसरे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का कहना है की सरकार को तुरंत विधेयक लाना चाहिए. तीसरा सबसे महत्वपूर्ण बयान भाजपा अध्यक्ष ने खुद दिया की सुप्रीम कोर्ट को आस्था से जुड़े मामलों में फैसले नहीं देने चाहिए या ऐसे फैसले देने चाहिए जिसका पालन हो सके. इस प्रकार ये सब बयान इशारा कर रहे हैं कि खिचड़ी तो पक रही है. इसी तरह नागपुर के सुर भी बदल रहे हैं. भाजपा को केंद्र में सत्ता तक पहुँचाने में संघ का अहम् रोल रहा है. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मोदी सरकार को ये कह कर परेशानी में डाल दिया है कि राम मंदिर बनाने के लिए सरकार को विधेयक लाना चाहिए. संघ के क़रीबी सूत्रों का कहना है कि अब मोदी या अमित शाह संघ कि पसंद नहीं हैं. संघ कि पसंद नितिन गडकरी हैं या कांग्रेस कि सरकार चाहिए. संघ का मोदी और भाजपा सरकार से मोह भंग होने का कारण है अर्थव्यवस्था का कमज़ोर होना. मोदी सरकार कि आर्थिक नीति कि वजह से लोगो की परेशानी बढ़ी है जिसे लेकर भाजपा सरकार के साथ साथ संघ को भी लोगो की आलोचना का शिकार होना पड़ा है. हिंदुत्व के मुद्दे पर भी मोदी सरकार विफल रही जिसककी वजह से भी संघ की इमेज ख़राब हुई है. इन सब से उबरने के लिए संघ ने नई रणनीति बनायीं है जिसके तहत अब मोदी की जगह नितिन गडकरी पर बाज़ी खेलनी है या कांग्रेस को ही समर्थन देकर सरकार बनाने का मौक़ा दिया जाये. इसके अलावा भाजपा संघ की खींचतान उत्तर प्रदेश में भी जारी है.

उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की अंदरूनी खींचतान की खबरें आ रही हैं. कल मंत्रिमंडल का विस्तार होना था लेकिन कुछ ऐसा हुआ की मुख्यमंत्री ही बैठक में नहीं पहुंचे. इसकी वजह जो सामने आ रही है वह है मुख्यमंत्री का नाराज़ होना. सूत्रों से जो रिपोर्ट मिली है उनके मुताबिक़ प्रदेश में बहुत दिनों बाद गृह मंत्री की नियुक्ति होनी है और लम्बे समय से प्रदेश में परम्परा ये थी की मुख्यमंत्री ही गृहमंत्रालय संभालते थे. लेकिन भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व केशव प्रसाद मौर्य को गृहमंत्री बनाने का फैसला कर चुका है जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहुत नाराज़ बताये जा रहे हैं. जिस प्रकार की खबरें भाजपा का अंदर से मिल रही हैं उससे ये लगता है की योगी सरकार शायद ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाए. हो सकता है की भाजपा में भी टूट फूट हो. अब ये बदलते सियासी हालात क्या परिणाम लाते हैं आने वाले वक़्त में ही पता चल पायेगा.

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