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संघ और शिवसेना को बीजेपी का दो टूक जवाब, राम मंदिर के लिए नहीं बनेगा कानून!

हालांकि बीजेपी ने यह साफ किया है कि वो अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है?

 Yusuf Ansari |  21 Oct 2018 1:07 PM GMT  |  दिल्ली

संघ और शिवसेना को बीजेपी का दो टूक जवाब, राम मंदिर के लिए नहीं बनेगा कानून!
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यूसुफ़ अंसारी

बीजेपी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने या संसद में कानून बनाने की संघ परिवार और शिवसेना की मांग ठुकरा दी है. दोनों को दो टूक जवाब देते हुए बीजेपी ने साफ कर दिया कि मोदी सरकार इस मसले पर न अध्यादेश जारी करेगी और न ही संसद में क़ानून बनाएगी बल्कि वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतेज़ार करेगी. हालांकि बीजेपी ने यह साफ किया है कि वो अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले या दोनों पक्षों की रज़ामंदी से ही इस मसले का हल चाहती है.

बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिंह राव ने हैदराबाद के एक कार्यक्रम में राम मंदिर निर्माण पर पार्टी का रुख साफ करते हुए यह बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भाजपा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर प्रतिबद्ध तो है लेकिन वो इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने के हक़ में है. राव ने कहा कि पार्टी के कुछ नेता और मंदिर आंदोलन से जुड़े संगठन मंदिर निर्पमाण के लिए अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं. पार्टी ऐसे लोगों की भावनाओं को समझती है लेकिन उनकी यह मांग उनकी यह मांग व्यावहारिक नहीं है. उन्होंने कहा, 'जहां तक भगवान राम के लिए भव्य मंदिर के निर्माण का मुद्दा है तो पार्टी अपनेन पुराने रुख पर कायम है. हम हमेशा से अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण के पक्ष में रहे हैं. देश के करोड़ों लोगों, हिन्दुओं की आकांक्षा और भावना यही है.'

ग़ौरतलब है कि अक्टूबर के पहले हफ्ते में संतो के एक प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविद से मुलाकात करके अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए मोदी सरकार से अध्यादेश जारी करवाने की मांग की थी. दशहरा से एक दिन पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी मोदी सरकार को नसीहत देते हुए कहा था कि विवादित भूमि पर जल्द से जल्द से जल्द राम मंदिर बनाने केलिए संसद में कानून बनवाएं. भगवत के बयान के बाद शिवसेना प्रमुख उधव ठाकरे ने भी सीधे पीएम मोदी से पूछा था कि अयोध्या में राम मंदिर कब बनेगा. ठाकरे ने तो यहां तक कहा था कि जब वो दिल्ली जाएगें तो पीएम से इस बारे में सीधी बात करेंगे.

इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चा तेज़ हो गई रही है. भागवत के इस बयान को पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा गया. भगवत के बयान पर मोदी सरकार या बीजेपी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आने से लग रहा था कि बीजेपी विधानसभा चुनावों और फिर अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में राम मंदिर को बड़ा मुद्दा बनाना चाहती है. बीजेपी पहले भी चुनावों में राम मंदिर के मुद्दे को हवा देकर चुनावी फायदा उठाती रही है. संघ और शिवसेना के सवालों पर मोदी सरकार और बीजेपी चुप्पी का मतलब यही निकाला जा रहा था कि वो इसे चुनावी मुद्दा बना रही है.

अब बीजेपी ने इस पर अपना रुख साफ कर दिया है. फिलहाल बीजेपी किसी बड़े विवाद में नहीं फंसना चाहती. इसी लिए नरसिंह राव से बहुत सधा हुआ बयान दिलवाया गया है. उन्होंने साफ कहा है, "हम चाहते हैं कि राम मंदिर निर्माण का फैसला सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हो या फिर समुदायों के बीच किसी तरह के समझौते के जरिये हो, जो अब तक तो नहीं हो पाया है. इसलिए हमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतेज़ार करना चाहिए.' मुस्लिम संगठन पहले ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानने की बात कह चुके हैं. अब बीजेपी ने भी फैसले का इंतेज़ार करने की बात कह कर साफ कर दिय कि वो इस मसले पर संविधान के दायरे से बाहर जाकर कोई काम नहीं करना चाहती.


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