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मध्य प्रदेश में फ्लोर टेस्ट इन 7 विधायकों पर टिका, बदल देगा सरकार की तस्वीर जानिए कैसे?

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद से मध्य प्रदेश में राजनीतिक हालात अस्थिर हो गए हैं. सिंधिया ने होली के दिन ही कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद 22 विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया. ये सभी सिंधिया के खेमे में हैं.

 Sujeet Kumar Gupta |  15 March 2020 11:37 AM GMT  |  नई दिल्ली

मध्य प्रदेश में फ्लोर टेस्ट इन 7 विधायकों पर टिका, बदल देगा सरकार की तस्वीर जानिए कैसे?
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भोपाल। मध्य प्रदेश का सियासी घमासान अंतिम चरण में पहुंच गया है। जयपुर से पांचवे दिन कांग्रेस के 86 में से 85 विधायक रविवार को भोपाल पहुंचे। एक एमएलए दो दिन पहले ही भोपाल आ गए है। वही कमलनाथ सरकार के खिलाफ भाजपा ने मोर्चा खोल दिया।

शनिवार को विधानसभा अध्यक्ष ने सिंधिया समर्थक 6 विधायकों के इस्तीफे मंजूर हो गये है। कांग्रेस की सदस्य संख्या 114 से घटकर 108 रह गई है। 16 पर फैसला बाकी है। अगर इनके इस्तीफे भी मंजूर होते हैं तो कांग्रेस के पास कुल 99 विधायक रह जाएंगे। विधानसभा में कुल विधायकों की संख्या 206 हो जाएगी। बहुमत के लिए 104 का आंकड़ा जरूरी होगा। अब यदि विधानसभा अध्यक्ष सिंधिया गुट के बाकी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार नहीं करते हैं तब भी बहुमत के लिए कांग्रेस को काफी जोर लगाना होगा। एक बार राज्य विधानसभा की दलीय स्थिति पर नजर डालिए।


मध्यप्रदेश विधानसभा की दलीय स्थिति और बहुमत के लिए आवश्यक सदस्य संख्या

कुल सीटें: 230

खाली सीटें: 2

13 मार्च तक संख्या बल

कांग्रेस: 114

भाजपा: 107

बसपा: 2

सपा: 1

निर्दलीय: 4

14 मार्च के बाद संख्या बल

कांग्रेस: 108

भाजपा: 107

बसपा: 2

सपा: 1

निर्दलीय: 4

(अब बहुमत के लिए 112 संख्या बल चाहिए)

बता दें, ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद से मध्य प्रदेश में राजनीतिक हालात अस्थिर हो गए हैं. सिंधिया ने होली के दिन ही कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद 22 विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया. ये सभी सिंधिया के खेमे में हैं. सिंधिया बीजेपी में चले गए हैं और विधायकों के इस्तीफे से कांग्रेस की कमलनाथ सरकार फिलहाल अल्पमत में नजर आ रही है।

यदि कांग्रेस को बसपा और सपा का समर्थन हासिल रहता है तो भी उसके पास बहुमत के लिए जरूरी 112 की संख्या नहीं है। वहीं भाजपा अपने बूत सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में उसे निर्दलीय विधायकों के साथ ही साथ सपा या बसपा में भी सेंध लगानी होगी।

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने रविवार को भोपाल में मीडिया को बताया कि, 'सभी विधायक हमारे साथ हैं. सिर्फ छह विधायक कम हुए हैं. सरकार के पास बहुमत का आंकड़ा है. कांग्रेस के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने के बाद भी 121 से ज्यादा विधायक हमें विश्वास प्रस्ताव पर मतदान में समर्थन करेंगे. बीजेपी के छह-सात विधायक भी कमलनाथ को समर्थन देंगे.' उन्होंने कहा, 'हम पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि सदन में बहुमत साबित करेंगे.'

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