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सितम्बर में शुरु होगा संसद का वर्चुअल मानसून सत्र, नही हो सकेगें सवाल-जवाब

बहरहाल एक लंबी अवधि के बाद संसद का मानसून सत्र सितंबर के तीसरे हफ्ते में शुरू होने जा रहा है। तिथि की घोषणा 2 सितंबर तक होने की संभावना है।

 Shiv Kumar Mishra |  29 Aug 2020 8:18 AM GMT  |  दिल्ली

सितम्बर में शुरु होगा संसद का वर्चुअल मानसून सत्र, नही हो सकेगें सवाल-जवाब
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कोरोना काल में लगे लॉकड़ाऊन के कारण लंबे समय से संसद भी लगभग ठप्प सी हो गई थी। हालाकि इस बीच अनेक देशों की संसदों ने वर्चुअल सत्र चलाए लेकिन भारत में मोदी सरकार ने संसद का वर्चुअल सत्र चलाना उचित नही समझा।

बहरहाल एक लंबी अवधि के बाद संसद का मानसून सत्र सितंबर के तीसरे हफ्ते में शुरू होने जा रहा है। तिथि की घोषणा 2 सितंबर तक होने की संभावना है।

खबरें ये सामने आ रही है कि भले ही सत्र शुरू होने जा रहा है लेकिन इसको छोटा ही रखा जाएगा। इसके साथ ही पूरा सत्र वर्चुअल ही होगा। हालांकि इस दौरान संसद की स्थायी समिति की यदि बैठक होती है तो वह सोशल डिस्टेंसिंग के साथ सदस्यों की उपस्थिति में होगी।

इस सत्र की एक खास बात यह भी होगी कि वर्चुअल सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा। अर्थात सांसद संबंधित मंत्रियों से सवाल नहीं पूछ सकेंगे। अलबत्ता तारांकित प्रश्नों के उत्तर डिजिटल फॉर्म में उपलब्ध कराया जाएगा।

इसी तरह शुक्रवार को प्राइवेट मेंबर बिल पर चर्चा नहीं कराया जाए, इसके लिए सांसदों से विचार-विमर्श किया जाएगा। सत्र में शून्य काल, स्पेशल मेंशन और नो कांफिडेंश मोशन जैसे प्रस्ताव लाने का विकल्प रहेगा।

ये जानकारी लोकसभा सचिवालय से जुड़े अधिकारियों के हवाले से सामने आई है। सचिवालय के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि विधेयकों और अध्यादेशों की प्रति सांसदों को नहीं सौंपी जाएगी। सांसदों को इन अध्यादेशों या विधेयकों की डिजिटल कॉपी दी जाएगी।

वर्चुअल माध्यम से विभिन्न विधेयकों और मुद्दों पर चर्चा सुचारू रूप से चले इसके लिए पुख्ता व्यवस्था की गई है। यदि कोई दल या सांसद, किसी प्रस्ताव के विरोध में वॉक आउट करना चाहे तो इसके लिए वर्चुअल व्यवस्था होगी। इसके तहत पार्टी या सांसद अपनी सीट से उठ कर चले जाएंगे और इसका प्रसारण दिखेगा।

राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि सत्र शुरू होने से पहले संसद में हर दल के लिए जो कमरे हैं, वहां के प्रभारियों को तकनीक के बारे में डेमो दिया जाएगा ताकि वह अपने दलों के सांसदों को डिजिटल सत्र के बारे में तकनीकी पहलुओं को बता सके।

पूरे सत्र के दौरान तकनीकी टीम मौजूद रहेगी। हर सांसद को बोलने के लिए टाइम निर्धारित होगा और उसी समय सीमा के अंदर उन्हें अपनी बात रखनी होगी।

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