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महामिलावटियों का एक ही सिद्धांत है, जहां वोट नहीं, वहां विकास नहीं- पीएम मोदी

विकास के हर प्रयास का विरोध इन महामिलावटी लोगों की आदत है

 Sujeet Kumar Gupta |  11 May 2019 11:11 AM GMT  |  नई दिल्ली

महामिलावटियों का एक ही सिद्धांत है, जहां वोट नहीं, वहां विकास नहीं- पीएम मोदी
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रॉबर्ट्सगंज। पीएम श्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के रॉबर्ट्सगंज में जनसभा को संबोधित करने गये तो विपक्ष पर करारे तरह से गिन-गिन कर सच्चाई बताई। कहां कि कोई भी देश कमजोर सरकारों के रहते शक्तिशाली नहीं बन सकता है। जितनी ज्यादा मजबूत सरकार उतना ही शक्तिशाली भारत। आपका एक वोट देश में शक्तिशाली भारत का गठन करेगा। 21 साल पहले आज ही का वो दिन था, जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया था, ऑपरेशन शक्ति को सफलतापूर्वक पूरा किया था। मैं उन सभी वैज्ञानिकों को नमन करता हूं, जिन्होंने अपनी मेहनत से देश को गौरवान्वित किया। इस परीक्षण से ये साफ हो गया कि भारत के पास इतना बड़ा सामर्थ्य पहले से था। लेकिन वाजपेयी सरकार से ठीक पहले की सरकार में वो हिम्मत नहीं थी, कि ऐसा कर सके। कहां कि ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि तब हासिल होती है, जब राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि हो। तभी आपमें परमाणु परीक्षण जैसे बड़े फैसले करने की हिम्मत पैदा होती है। तभी आप अंतरिक्ष में भी मिशन शक्ति की हिम्मत दिखाते हैं। तभी आप आतंकवाद को भी मुंहतोड़ जवाब दे पाते हैं। भाजपा ने-एनडीए ने, हमेशा इसी मूलमंत्र को अपनाए रखा।

पीएम मोदी ने महामिलावटी को भी लेकर हमलावर होते हुए कहते है कि जब भी देश के अंदर महामिलावटी सरकार होती है। तो वो राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरे में डाल देती है। याद कीजिए जब तीसरे मोर्चे की महामिलावटी सरकार थी, समाजवादी पार्टी मंत्रिमंडल में थी, तब इन्होंने देश का क्या हाल कर दिया था। इन महामिलावटी सरकार ने हमारे पूरे खूफिया तंत्र को दीमक लगा दिया था, खोखला कर दिया था, बर्बाद कर दिया था। इसका खामियाजा देश को लंबे समय तक भुगतना पड़ा था। अटल जी की सरकार के बाद देश ने फिर ऐसी कमजोर सरकार देखी, ऐसे महामिलावटी लोगों की सरकार देखी, जिसने देश की साख को दांव पर लगा दिया। इतना भ्रष्टाचार, लाखों करोड़ों के घोटाले, आसमान छूती महंगाई, हर तरफ जैसे त्राहि-त्राहि मची हुई थी।

पिछले सरकार में देश घोटालों से घिर गया था। जिससे देश का नाम दुनिया भर में बदनाम हुआ, लेकिन वो कहते रहे- 'हुआ तो हुआ'। सत्ता के गलियारों पर दलालों ने कब्जा कर लिया, रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाने वाले देश को आगे बढ़ाने के लिए बड़े फैसले नहीं ले पाए और कहते रहे- 'हुआ तो हुआ, कांग्रेस ने देश के लोगों के साथ विश्वासघात किया, देश की उम्मीदों को तोड़ा और ताल ठोक कर कहते रहे "हुआ तो हुआ"। जब राष्ट्रहित के बजाय, सिर्फ अपने परिवार का हित सर्वोपरि होता है, तो यही अहंकार, यही घमंड बोलता है "हुआ तो हुआ। जब जनता जाग जाती है, जब वो इस अहंकार को पहचान जाती है तो "हुआ तो हुआ" कहने वालों को "हवा हो जावो"-"हवा हो जाओ" कहने की हिम्मत जनता में होती है।

सपा और बसपा के नेता ऐसे होते है जो ये नहीं बताते कि राष्ट्र के लिए उनकी नीति क्या है। वो जो भी बात करते हैं, उसमें सबसे ऊपर होती है, मोदी को गाली देना सपा-बसपा, जिन्होंने पहले यूपी को बर्बाद किया। वो अब खुद को बर्बादी से बचाने के लिए गले मिल रहे हैं। जो पहले एक दूसरे को जेल भेजना चाहते थे। वो आज उन्हें महल में भेजना चाहते हैं। देश को मजबूत बनाने का उनका तरीका क्या होगा, आतंकवाद से वो कैसे निपटेंगे, नामदार हों, बहन जी हों या बबुआ जी, वो आपको इस बारे में कुछ नहीं बोलेंगे। अब बहन जी ये भी शुरु किया है कि मोदी की क्या जाति है। मोदी का कहना है कि इस देश के गरीबों की जो जाति है, वो मेरी जाति है। महामिलावटियों का एक ही सिद्धांत है, जहां वोट नहीं, वहां विकास नहीं। आपके इस सेवक ने राजनीति की इस सोच को बदलने का प्रयास किया है। सपा-बसपा वालों ने पूरे सोनभद्र को भ्रष्टाचार और अनदेखी का शिकार बनाया है। इन लोगों ने यहां की संपदा में लूट-खसूट को अपनी नीति का हिस्सा बना लिया था। विकास के हर प्रयास का विरोध इन महामिलावटी लोगों की आदत है। जन धन योजना हो, स्वच्छ भारत अभियान हो, स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएं हों, घर बनाने से जुड़ी योजनाएं हों, गरीबों से जुड़े हर काम पर इन लोगों ने हमारा मजाक उड़ाया है या काम को रोकने की कोशिश की है।

सरदार पटेल अगर देश के प्रधानमंत्री होते तो देश के किसानों की स्थिति कुछ ओर होती। हमने गुजरात में सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाई तो ये लोग उसका भी विरोध करने लगे। पिछले पांच वर्ष में जैसे हमने गांव-गांव, घर-घर बिजली पहुंचाने का काम किया, उसी तरह अगले पांच साल पानी पहुंचाने का काम करेंगे। इसके लिए हमने अगली सरकार में अलग से जल शक्ति मंत्रालय बनाने का फैसला किया है।

आप से मै यही कहने आया हूं रॉबर्ट्सगंज में कप प्लेट के निशान पर बटन दबाना है और आपको तो मालूम है कि मेरा तो बचपन से ही इन कप प्लेट से नाता रहा है। आज वो चौकीदार कप प्लेट को चमकाने आया है, जिसे वह बचपन में धोता था।

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