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बीजेपी में दो नए चेहरे सुर्खियों में, एक नफरती राजा तो एक मैनेजमेंट गुरु!

उधर जफर इस्लाम बीजेपी का नया मुस्लिम चेहरा बनकर उभरे हैं पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए भेज दिया है मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी में लाने मैं उनकी ही भूमिका मानी जाती है

 Shiv Kumar Mishra |  7 Sep 2020 4:53 AM GMT  |  दिल्ली

बीजेपी में दो नए चेहरे सुर्खियों में, एक नफरती राजा तो एक मैनेजमेंट गुरु!
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बीजेपी में टी राजा सिंह और जफर इस्लाम अलग-अलग वजहों से सुर्खियों में हैं. तेलंगाना से बीजेपी विधायक टी राजा सिंह के सुर्खियों में होने की वजह यह है कि फेसबुक ने उनके अकाउंट पर बैन लगा दिया है. तो उधर जफर इस्लाम बीजेपी का नया मुस्लिम चेहरा बनकर उभरे हैं. पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए भेज दिया है. मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी में लाने मैं उनकी ही भूमिका मानी जाती है.

इन दोनों का संक्षिप्त परिचय पूनम पांडे और मनीष श्रीवास्तव की कलम से जानिए


भड़काऊ बयान बने इनकी पहचान

तेलंगाना में बीजेपी के इकलौते विधायक टी राजा सिंह सिर्फ फेसबुक के प्रतिबंध के बाद ही चर्चा में नहीं आए बल्कि अपने नफरत भरे बयानों के लिए भी पहले भी चर्चा में रहे हैं .2018 में उन्होंने रोहिंग्या मुसलमानों को गोली मारने के लिए कहा था क्योंकि वे विदेशी है? इससे पहले उन्होंने कुरान पर रोक लगाने को कहा था और बॉलीवुड फिल्म पद्मावत को स्क्रीनिंग कराने पर तेलंगाना के सिनेमाघरों को जलाने की भी धमकी दी थी.

2017 में टी राजा सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने का विरोध करने वालों का सिर्फ कलम करने की बात कही थी. साल 2018 में ही उनके ऊपर 43 क्रिमिनल केस हैदराबाद के पुराने शहर को मिनी पाकिस्तान कहने पर उनके खिलाफ कई शिकायत दर्ज कराई गई थी. उन्होंने कश्मीरी मुसलमानों को गद्दार कहा था और उनके व्यापार का बहिष्कार करने के लिए भी लोगों को भड़काया था.

उनका पूरा नाम टाइगर राजा नवल सिंह है. लेकिन वह टी राजा सिंह के नाम से जाने जाते हैं. यह हैदराबाद के भूत महल विधानसभा से चुनाव जीते पहले तेलुगू देशम के साथ थे बाद में बीजेपी में शामिल हुए .राजा ने तेलंगाना राष्ट्र समिति के उम्मीदवार को 40,000 से ज्यादा वोटों से हराया और बीजेपी के खाते में तेलंगाना विधानसभा में दी थी. तब उन पर भड़काऊ भाषण और नफरत भरे बयान देने के 7 केस दर्ज थे. इससे पहले 2014 में भी वे चुनाव जीते थे तब उन्होंने 46 हजार से ज्यादा वोटों से कांग्रेसी उम्मीदवार को हराया था.

टी राजा सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत काउंसलर के तौर पर की. वे मंगला हाट डिवीजन में पार्षद रहे थे. 2009 में कांग्रेसी उम्मीदवार को हराकर टी राजा काउंसलर बने थे. फेसबुक के बैन के बाद उन्होंने माना कि उनके भाषण भड़काऊ होते थे उन्हें इस पर कोई पछतावा नहीं है. बल्कि उन्होंने कहा कि भड़काऊ भाषण देने वाले भी अकेली नहीं है. राजा ने कहा कि राहुल गांधी सहित दूसरी पार्टी के नेता भी भड़काऊ भाषण देते हैं. टी राजा के भड़काऊ भाषणों की वजह से बीजेपी ने उनका प्रचार में इस्तेमाल किया है. उन्होंने यूपी और कर्नाटक जाकर भी बीजेपी उम्मीदवारों का प्रचार किया था. टी राजा बीजेपी तेलंगाना राज्य गौ रक्षा के संयोजक भी है.


बीजेपी को यूपी से मिला नया मुस्लिम चेहरा

आईआईएम अहमदाबाद और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट की डिग्री लेकर निकले 52 वर्षीय जफर इस्लाम भारत में ड्यूश बैंक के एमडी रहे हैं. फाइनेंस मैनेजमेंट पर उनकी अच्छी पकड़ है. बीजेपी ने भी यही सोच कर उन्हें आगे बढ़ाया है. पहले उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया. कई अखबारों में उन्होंने मोदी और मुस्लिम को मुस्लिमों को लेकर लेख लिखें. टीवी डिबेट में भी बे मजबूती से अपना पक्ष रखते रहे हैं.

कभी मॉर्गन अनस्ट्रीली बैंक में रह चुके सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी उनके गहरे रिश्ते थे. सियासी गलियारों में यह माना जाता है कि सिंधिया को बीजेपी लाने में बीजेपी में लाने में और कमलनाथ सरकार गिराने में उनकी अहम भूमिका है. ऑपरेशन लोटस मैं उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है. 2013 में जब भी पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (जिन्हें वे साहब कहते हैं) से मिले. तो इससे पहले वे केवल उनके बारे में सुनते ही थे मिलने के बाद वे उन से अत्यंत प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके और उसी साल भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए.

मुंबई में उनके दोस्तों फिल्मकार और अभिनेता स्वर्गीय नीरज बोरा, फिरोज नाडियावाला और बीजेपी के सांसद रह चुके परेश रावल के साथ मोदी और बीजेपी को लेकर कई कई बार लंबी गुप्तगू हुई. इस दौरान वे दिल्ली में कांग्रेस के कई नेताओं से भी मिलकर उन्हें समझ रहे थे. बीजेपी में जफर सबसे पहले तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिले थे. तभी जफर को लगने लगा कि उनकी राजनीति में उनको बीजेपी से ही कोई मुकाम हासिल हो सकता है.

इसके बाद भी अमित शाह और नरेंद्र मोदी से मिले और बीजेपी के ही होकर रह गए. जफर इस्लाम के दादा डॉक्टर कलीम उल्लाह मूल रूप से यूपी के बलिया जिले के थे. डॉक्टरी पेशे के चलते झारखंड के हजारीबाग में शिफ्ट हो गए. तो फिर वापस नहीं लौटे जफर ने भी अपनी शुरुआती पढ़ाई हजारीबाग स्कूल मोर थन कॉलेज आफ कमर से की है. मुंबई में रह रही पत्नी शीबा कमाल भी इन्वेस्टमेंट बैंकर है. जो उनकी मदद करती रहती हैं. सांसद बन जाने के बाद फिलहाल कोरोना से लड़कर ठीक हो चुके जफर का इरादा अब मुस्लिमों के सामने बीजेपी की बात पहुंचाने का है. ताकि मुस्लिमों में फैली बीजेपी विरोधी धारणा खत्म हो सके और मुस्लिमों का वोट बीजेपी की तरफ ट्रांसफर हो. इसमें कामयाब होते हैं निश्चित बीजेपी का एक बड़ा चेहरा बन जाएंगे.


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