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कांग्रेस को अब क्यों आई पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की याद? सोनिया और राहुल गांधी की तारीफ के क्या हैं मायने

राहुल गांधी ने भी राव के प्रति सम्मान जाहिर करते हुए उन्हें आधुनिक भारत को आकार देने वाला बताया है

 Arun Mishra |  24 July 2020 1:41 PM GMT  |  दिल्ली

कांग्रेस को अब क्यों आई पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की याद? सोनिया और राहुल गांधी की तारीफ के क्या हैं मायने
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पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को नजरअंदाज किए जाने को लेकर लगातार आरोपों का सामाना करती रहीं कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को उनकी जमकर तारीफ की। 24 जुलाई 1991 को आर्थिक उदारीकरण वाले बजट को पेश किए जाने के 29वें सालगिरह पर सोनिया ने नरसिम्हाव राव के नेतृत्व को मजबूत बताते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में कई राजनीतिक, सामाजिक और विदेश नीति की उपलब्धियां अर्जित की गईं। राहुल गांधी ने भी राव के प्रति सम्मान जाहिर करते हुए उन्हें आधुनिक भारत को आकार देने वाला बताया है।

और क्या कहा सोनिया गांधी ने?

सोनिया गांधी ने कहा कि पीवी नरसिम्हा राव की जन्मशताब्दी हमारे लिए सबसे विद्वान शख्सियत को याद करने और श्रद्धांजलि देने का अवसर है। राज्य और केंद्र की राजनीति में लंबे समय तक काम करने के बाद वह प्रधानमंत्री ऐसे समय में बने जब देश में गंभीर आर्थिक संकट था। उनके मजबूत नेतृत्व की वजह से देश कई चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सका। 24 जुलाई 1991 के केंद्रीय बजट ने देश में आर्थिक रूपांतरण का रास्ता साफ किया। उनके कार्यकाल में देश ने कई सामाजिक, राजनातिक और विदेश नीति की उपलब्धियां हासिल हुईं। इन सबसे बढ़कर वह एक समर्पित कांग्रेसी थे, जिन्होंने कई जिम्मेदारियों पर काम करते हुए पार्टी की पूरी तन्मयता से सेवा की। मैं एक वर्ष तक चलने वाले आयोजनों के लिए तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमिटी को बधाई देती हूं। पीवी नरसिम्हाव राव बहुत सम्मानित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शख्सियत थे। कांग्रेस पार्टी को उनकी उपलब्धियों और योगदान पर गर्व है।

क्या हैं राजनीतिक मायने

राजनीतिक विश्लेषकों को यह घटना साधारण नहीं लगती। वह इसे एक पार्टी अध्यक्ष द्वारा अपने पूर्व प्रधानमंत्री को याद किए जाने भर की औपचारिकता नहीं मानते, बल्कि इसके पीछे कई कारणों की तलाश में जुटे हैं। ऐसा इसलिए कि नरसिम्हा राव और सोनिया गांधी के बीच रिश्ते सहज नहीं थे।

दोनों के बीच कितनी तल्खी थी इसको इस बात से समझा जा सकता है, रशीद किदवई की किताब '24, अकबर रोड ' के विमोचन के मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रह चुके संजय बारू ने कहा था कि कांग्रेस ने दिल्ली में उनका अंतिम संस्कार तक नहीं होने दिया और नरसिम्हा राव के परिवार को मजबूर किया गया कि वे उनके शव को हैदराबाद ले जाएं।

डैमेज कंट्रोल की कोशिश?

इसे कांग्रेस के डैमेज कंट्रोल की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। हाल के कुछ सालों में कांग्रेस पार्टी ने देखा है कि बीजेपी खासकर पीएम नरेंद्र मोदी ने किस तरह देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को नजरअंदाज किए जाने को लेकर कांग्रेस को घेरा है। कहा जाता है कि बीजेपी ने सफलतापूर्वक कांग्रेस पार्टी से पटेल की विरासत को छीन लिया है। नरसिम्हाव राव को लेकर भी कुछ यही स्थिति है। बीजेपी लगातार नरसिम्हा राव के प्रति सम्मान जता रही है। इसके अलावा तेलंगाना की राजनीति में भी पूर्व प्रधानमंत्री का नाम भुनाया जा रहा है। नरसिम्हा राव की जन्म शताब्दी शुरू होने पर KCR की तेलंगाना सरकार ने इस साल जनू में वहां के अखबारों ने फुल पेज विज्ञापन दिया था। जिसमें लिखा था- तेलंगाना का बेटा… भारत का गर्व। माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी देर से ही सही लेकिन नुकसान की भरपाई में जुट गई है।

'कोर्स करेक्शन के मूड में कांग्रेस'

वरिष्ठ पत्रकार सतीश के सिंह कहते हैं, ''पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की विरासत पर भारतीय जनता पार्टी और दूसरे राजनीतिक दलों ने दावा ठोका हुआ था। कांग्रेस पर लांछन लगाते थे, बदनाम करते थे। यह कांग्रेस की ओर से कोर्स करेक्शन है। अभी राव के जन्मशताब्दी के अवसर पर दौरान कांग्रेस पार्टी ने श्रद्धांजलि दी थी, लेकिन पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की ओर से कुछ नहीं कहा गया था। इसको लेकर काफी सवाल उठाए गए थे। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि नरसिम्हा राव और 10 जनपथ के संबंध के बहुत खराब थे। 10 जनपथ के करीबी नेता नरसिम्हा राव पर कांग्रेस पार्टी को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते थे। अर्जुन सिंह, नारायण दत्त तिवारी, माधोराव सिंधिया जैसे नेताओं ने तो अलग पार्टी बना ली थी।''

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