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भाजपा जिलाध्यक्षों के बदलाव में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की ही चली

चौथी बार लगातार विधायक बने देवनानी और भदेल एक-दूसरे से पूछ रहे हैं कि हेड़ा की सिफारिश किसने की? जानकारों की माने तो हेड़ा की नियुक्ति से पहले दोनों विधायकों की राय भी नहीं ली गई।

 Special Coverage News |  29 Jan 2019 11:57 AM GMT  |  दिल्ली

कांग्रेस बीजेपी राजस्थानबीजेपी

एस.पी.मित्तल

28 जनवरी को राजस्थान के जो 15 भाजपा जिलाध्यक्षों का बदलाव किया है उसमें पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की चली है। भले ही बदलाव प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी के आदेश से हुए हो, लेकिन नए अध्यक्षों का चयन वसंुधरा राजे की सिफारिश से हुआ है। यही वजह है कि जिन जिलों में बदलाव हुआ है, वहां के भाजपाई आश्चर्यव्यक्त कर रहे हैं। इसका सबसे मजबूत उदाहरण अजमेर का है। अजमेर में भाजपा के दो जिला अध्यक्ष हैं एक शहर तथा दूसरा देहात। सैनी ने अरविंद यादव को हटा कर शिवशंकर हेड़ा को शहर अध्यक्ष नियुक्त किया है जबकि देहात अध्यक्ष के पद पर प्रो. बीपी सारस्वत को बनाए रखा गया है। सब जानते हैं कि पांच वर्ष पहले वसुंधरा राजे ने ही प्रो. सारस्वत को देहात अध्यक्ष बनाया था। सारस्वत तभी से देहात अध्यक्ष के पद पर चले आ रहे हैं। प्रो. सारस्वत की वफादारी पूरी तरह वसुंधरा राजे के साथ है। यदि प्रो. सारस्वत को वसुंधरा राजे का संरक्षण नहीं होता तो अरविंद यादव के साथ सारस्वत का भी पत्ता कट जाता। यादव को हटा कर हेड़ा को अध्यक्ष बनाए जाने पर शहर के दोनों भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल अचंभित हैं।


चौथी बार लगातार विधायक बने देवनानी और भदेल एक-दूसरे से पूछ रहे हैं कि हेड़ा की सिफारिश किसने की? जानकारों की माने तो हेड़ा की नियुक्ति से पहले दोनों विधायकों की राय भी नहीं ली गई। सब जानते हैं कि हेड़ा को वसुंधरा राजे ने सीएम रहते हुए अजमेर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया था। देवनानी और भदेल के मंत्री के रुतबे के आगे हेड़ा का रुतबा कमजोर न लगे, इसलिए हेड़ा को भी राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया गया। वसुंधरा राजे के खुले संरक्षण की वजह से हेड़ा ने प्राधिकरण के अध्यक्ष के तौर पर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई। प्राधिकरण के कार्यो के उद्घाटन और शिलान्यास स्वयं ने ही कर दिए। इसको लेकर दोनों मंत्रियों ने कई बार नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी से शिकायत भी की, लेकिन हेड़ा ने अपने नजरिए से ही प्राधिकरण के काम काज निपटाए। एक बार तो देवनानी ने खुला आरोप लगाया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में प्राधिकरण काम नहीं करवा रहा है। इसके बाद हेड़ा ने लिस्ट जारी कर बताया कि देवनानी के क्षेत्र में कितने विकास कार्य हुए है।


हेड़ा और वसुंधरा राजे के संबंधों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्राधिकरण का अध्यक्ष रहते हुए हेड़ा ने राजमाता विजयराधे सिंधिया के नाम से आवासीय काॅलोनी बसाई। विजयराजे वसुंधरा राजे की माताजी हैं। जनवरी 2018 में हुए लोकसभा के उपचुनाव में जब भाजपा को शहर की दोनों सीटों पर हार मिली तो हार का एक कारण प्राधिकरण के काम काज को भी बताया गया। हाल के विधानसभा चुनाव में जब शहर की दोनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवार विजयी हुए तब हेड़ा ने नसीराबाद विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई थी। तब हेड़ा को वसुंधरा राजे ने ही खासतौर पर नसीराबाद भेजा था। सब जानते हैं कि शहर की दोनों सीटों की जीत भाजपा उम्मीदवारों की अपनी है।

हेड़ा भले ही वसुंधरा राजे की सिफारिश से शहर अध्यक्ष बन गए हों, लेकिन उनके सामने चुनौती भी है। पांच माह बाद ही लोकसभा के चुनाव होने हैं और अजमेर शहर में भाजपा का दफ्तर तक नहीं है। संगठन की स्थिति जगजाहिर है। भाजपा का कार्यकर्ता उत्तर और दक्षिण में बंटा हुआ है। सत्ता में रहते हुए तो सब चल गया, लेकिन अब भाजपा को विपक्ष की भूमिका निभानी है। ऐसे में कम से कम एक दफ्तर तो होना ही चाहिए। सत्ता में रहते हुए होटल मालिक फ्री में सेवाएं दे देते थे, लेकिन अब ऐसी सेवाएं मिलना मुश्किल होगा। भाजपा विचारधारा के एक होटल मालिक ने तो साफ कह दिया कि अब उनका बेटा मैनेजमेंट संभालता है, इसलिए मुफ्त की सेवाएं बंद हो गई हैं। देखना होगा कि हेड़ा इन सब चुनौतियों से कैसे निपटाते हैं।

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