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कोटा में जब एक साथ जली 21 चिताएं, गमगीन माहौल में हर एक आंख थी नम

 Arun Mishra |  27 Feb 2020 11:53 AM GMT  |  दिल्ली

कोटा में जब एक साथ जली 21 चिताएं, गमगीन माहौल में हर एक आंख थी नम

राजस्थान : बूंदी में बुधवार को मेज नदी में बस के गिर जाने से एक ही परिवार के 24 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे की खबर से पूरा इलाका गमगीन है। मारे गए 24 लोगों में से 21 रिश्तेदार हैं। 21 लोगों की अंतिम यात्रा कोटा के जवाहर नगर से एक साथ निकली। मरने वालों में दो परिवार ऐसे थे, जिनमें पति-पत्नी और एक-एक बच्चे की मौत हो गई तथा एक-एक बच्चा बच गया। बूंदी बस हादसे में मारे गए लोगों की अंतिम यात्रा में लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला भी शामिल हुए।

ये हादसा उस वक्त हुआ जब परिवार के लोग सवाई माधोपुर शादी समारोह में शरीक होने जा रहे थे। बताया जा रहा है कि लाखेरी के पास मेज नदी की पुलिया पर संतुलन बिगड़ जाने से बस नदी में गिर गई और बस में सबार सभी 24 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि 5 लोगों को आसपास के लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाला गया। मरने वालों में से 21 आपस में रिश्तेदार थे, जिनका अंतिम संस्कार भी एक साथ हुआ। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भी हादसे की सूचना पाकर कोटा पहुंचे। एक साथ इतनी चिताओं को जलते देख ओम बिरला की आंखें भी नम हो गईं।

वहीं आज अंतिम संस्कार के लिए शवयात्रा निकली तो 21 अर्थियों को देख पूरा शहर गमगीन हो गया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भी इस दुख की घड़ी में शवयात्रा में शरीक हुए। सभी 21 रिश्तेदारों का अंतिम संस्कार किशोरपुरा मुक्तिधाम में हुआ। मरने वालों में दो परिवार ऐसे थे, जिनमें पति-पत्नी और उनके एक-एक बच्चे की भी हादसे में मौत हो गई। वे सभी घर से भात की रस्म में गए थे, जिसमें होने वाली दुलहन की मां को भेंट दी जाती है। इसके अलावा 2 शवों को बारां जिले के पलायथा गांव और कोटा के श्रीनाथपुरम इलाके में भेज दिया गया। वहीं 4 साल की कन्नू के शव को दफनाया गया।

इस दर्दनाक हादसे की खबर से पूरा इलाका सन्न है। हालांकि ग्रामीण और आसपास के लोगों ने पीड़ित परिवार का हौसला बढ़ाया और बेटी का शादी न रोकने का आग्रह किया। शादी समारोह में मौजूद लोगों ने दिल पर पत्थर रखकर किसी तरह बेटी के हाथ पीले किए। दुल्हन और उसकी मां को इस हादसे का अहसास तक नहीं होने दिया। सभी ने तय किया कि चाहे जो हो जाए मां-बेटी को इस हादसे की भनक ही नहीं लगने देंगे। सभी ने हाथों हाथ वहां मौजूद महिलाओं की भीड़ को दूर किया। बेटी एवं पत्नी के मोबाइल भी उनसे ले लिए गए थे। इस कारण उनका किसी से सीधा संवाद नहीं हो पाया है।

रमेशचन्द्र ने सुबह हादसे से लेकर रात को बेटी के विदा होने तक पूरे दिन जो दोहरा जीवन जीया वह शायद ही कोई दूसरा जी पाए। हादसे से अंदर तक टूट चुके रमेशचन्द्र बेटी और पत्नी से नजरें बचाकर भले ही इधर-उधर छिपकर बार-बार सिसकियां भरते रहे हों, लेकिन उनके सामने इस बात का तनिक भी अहसास नहीं होने दिया कि वह किस मुश्किल घड़ी और द्वंद से गुजर रहे हैं। जिसने भी देखा वह या तो रमेश की हिम्मत की दाद दे रहा था या फिर उसे गले लगा कर सांत्वना।

रमेशचन्द्र का पूरा परिवार बुधवार को सुबह मैरिज गार्डन में बेटी के विवाह तैयारी में जुटे थे। सुबह 11 बजे भात भरने की रस्म होनी थी. रमेशचन्द्र की पत्नी भात की तैयारियों में मशगूल थी। वह पलक पावड़े बिछाए भातवियों के आने का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान रमेशचन्द्र को सुबह जैसे ही सूचना मिली की भात लेकर आ रहे लोगों की बस मेज नदी में गिर गई और उसमें सवार लोगों में 24 की मौत हो गई तो वह गश खाकर गिर पड़े। उस समय मैरिज गार्डन के शानदार हॉल में उनका पूरा परिवार मौजूद था. कोई नाच रहा था तो कोई शादी की दूसरी रस्मों में व्यस्त था।

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