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"चंदा रे, मेरे भइया से कहना, बहना याद करे..."

चंदा रे, मेरे भइया से कहना, बहना याद करे...
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कई युगों से रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। बहने अपने भाइयों की कलाई पर अपनी रक्षा व अपने भाई की तंदरुस्ती की कामना हेत रेशमी धागा बांधती आ रही है। ये सिर्फ रेशम का धागा न होकर बहनों के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। इसे बंधवाने के बाद भाई को भी अपनी बहनों की जिम्मेदारी का एहसास होता है। युग कोई भी हो लेकिन वहीं विश्वास व प्यार आज भी बहनों को याद आता है तो खुशी के मारे आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं... 26 अगस्त को पूरा देश भाई-बहन के त्योहार रक्षाबंधन को धूमधाम से मना रहा है। इस दिन बहनें अपने भाईयों की रक्षा की कामना करते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं। ऐसे में बॉलीवुड भी कहां पीछे रहने वाला है। इंडस्ट्री में रक्षाबंधन के पर्व पर कई सदाबहार और भावुक गीत फिल्माए गए हैं...!!

'राखी' और 'रक्षा-बंधन' पर अनेक फ़िल्में बनीं और अत्यधिक लोकप्रिय हुई, इनमें से कुछ के गीत तो मानों अमर हो गए। इनकी लोकप्रियता आज दशकों पश्चात् भी बनी हुई है। बहन-भाई के स्नेह पर सबसे पुरानी और लोकप्रिय फिल्मों में से एक है 1959 में बनी 'छोटी बहन', जिसका गीत, 'भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना' आज तक जनमानस गुनगुनाता है। सन 1962 की 'राखी' फ़िल्म के निर्माता थे -ए. भीमसिंह, कलाकार थे अशोक कुमार, वहीदा रहमान, प्रदीप कुमार और अमिता। इस फ़िल्म में राजेंद्र कृष्ण ने शीर्षक गीत लिखा था - 'राखी धागों का त्यौहार, बँधा हुआ इक-इक धागे में भाई-बहन का प्यार...'सन् 1971 में प्रदर्शित 'हरे रामा हरे कृष्णा' भी भाई-बहन के प्यार पर आधारित फिल्म थी। इस फ़िल्म का गीत, 'फूलों का तारों का सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है..' किसे याद न होगा...1974 में प्रदर्शित धर्मेद्र की सुपरहिट फिल्म 'रेशम की डोर' में सुमन कल्याणपुर द्वारा गाया गया यह गाना, 'बहना ने भाई की कलाई पे प्यार बाँधा है, प्यार के दो तार से संसार बाँधा है... 'भी लोकप्रियता की बुलंदियों को छूता हुआ आज तक गाया जाता है। चंबल की कसम' का 'चंदा रे मेरे भइया से कहना, बहना याद करे' गीत भी आज तक याद किया जाता है। रक्षा बंधन पर आधारित अन्य लोकप्रिय गीतों में 'अनपढ़' फ़िल्म का लता मंगेश्कर का गाया 'रंग बिरंगी राखी लेकर आई बहना' और 'काजल' का आशा भोंसले का गाया 'मेरे भइया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन' भी सम्मिलित हैं।

'रेशम की डोरी' फिल्म का एक गाना- "बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है..." की मधुरता और लोकप्रियता के बारे में भी बताने की ज़रूरत नहीं। सुमन कल्याणपुर की आवाज़ में ढला ये गाना आज भी रक्षाबंधन के मौके पर बजने वाला सबसे पसंदीदा गीत है। ऐसे एक-दो नहीं दर्जनों ऐसे गाने हैं जो दशकों से समाज में न सिर्फ भाई-बहन के पवित्र प्यार का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं बल्कि, रक्षाबंधन जैसे पुनीत पर्व की पारंपरिक महिमा को और मजबूत करते रहे हैं...!!

कहते हैं, स्वस्थ और सुंदर साहित्य समाज के लिए सच्चे मार्गदर्शक का काम करते हैं, तो सांस्कृतिक सुरीलेपन से सजा सिनेमा किसी भी समाज के लिए सबसे दमदार दर्पण की तरह होते हैं। उनमें सामाजिक रीति-रिवाजों और परंपराओं का सच्चा अक्स या प्रतिबिंब नज़र आता है। भारतीय समाज में भी फिल्मों की प्रासंगिकता को इसी शाश्वत सच ने असीमित आकाश दिया। करीब सौ सालों के फिल्मी सफर में सामाजिक सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी हर वह चीज दर्शकों तक मनभावन अंदाज में पहुंची जिसका पारंपरिक ताना-बाना सदियों नहीं हजारों साल पुराना है। फिर चाहे वो होली-दिवाली और ईद जैसे धार्मिक और सामाजिक उत्सव का त्योहार हो या राखी और भैयादूज जैसा पारिवारिक स्नेह का प्रतीक पर्व खासकर भाई-बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन जैसे पर्व ने तो इसी फिल्मी माध्यम के जरिये समाज की बहुसंख्यक आबादी तक अपनी विशेष पहचान बनाई। बिना किसी धार्मिक मुलम्मे या किसी अवतार के सहारे अगर राखी ने समाज में भाई-बहन के निश्छल और निस्वार्थ प्रेम को उत्सव का रूप दिया तो इसमें फिल्मों के योगदान से इनकार नहीं किया जा सकता। आम तौर पर नायक-नायिका के रोमांस और मोहब्बत के ख़लनायक के ईर्द-गिर्द घूमने वाली फिल्मों में भी जब कभी राखी के नजराने के तौर पर भाई-बहन के प्रेम को दर्शकों के सामने रखा गया तो उसे जबर्दस्त समर्थन और कामयाबी मिली...!!

हालांकि बाद के सालों में मसालेदार मनोरंजन वाले फिल्मी दौर ने भाई-बहन के भावनात्मक रिश्ते को ज्यादा जगह नहीं दी पर इस दौरान भी कभी 'अंधा कानून' तो कभी 'प्यारी बहना' जैसी फिल्मों ने इस रिश्ते को काफी सशक्त और सफल पहचान दिलाई। आज के दौर में भी भले ही भाई-बहन के रिश्ते को केंद्र में रखकर फिल्में बननी कम हो गई हों पर राखी के त्योहार पर गली-मोहल्ले हर जगह उन्हीं गानों की धूम होती है जिनमें एक भाई के लिए एक बहन के प्यार का और एक बहन के प्रति एक भाई के भरोसे की गूंज सुनाई दे। यही है कच्चे धागे के पक्के वादे की सबसे अनोखी और बुलंद पहचान...!!

खैर, इन गानों को सुनने के बाद कोई भी बिना भावुक हुए नहीं रह पाएगा। राखी के इस पावन त्योहार पर आप भी अपनी बहन और भाई को ये गीत सुनाएं...!!

सी पी सिंह जर्नलिस्ट
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