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जन्माष्टमी आज, घरों व मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव की तैयारी पूरी

बिजली की रंगबिरंगी झालरों से जगमगाए मंदिर होती रही तैयारी। घर व मंदिरों में मनाया जाएगा कन्हैया का जन्मोत्सव। गृहस्थ आज और वैष्णव कल मनाएंगे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी।...

जन्माष्टमी आज, घरों व मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव की तैयारी पूरी
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पटना (शिवानंद गिरि)

भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव की तैयारी पूरी कर ली गई है।जगह जगह मेला भी लग रहे हैं। घरों व मंदिरों में शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। ग्रह-नक्षत्रों के संयोग से गृहस्थ आज और वैष्णव शनिवार को व्रत रखकर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे। घरों व मंदिरों में आकर्षक झाकियां सजाने के साथ ही कई धार्मिक अनुष्ठान होंगे। पंडित प्रभात मिश्र बताते हैं कि इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र व अष्टमी तिथि के साथ सूर्य और चंद्रमा उच्च राशि में होंगे। शुक्रवार की रात तीन बजकर 17 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी।

रात 12 बजकर 09 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र लग जाएगी। इस प्रकार मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। भगवान के प्राकट्य के समय चंद्रमा वृषभ राशि में थे, इस बार भी चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे। जबकि, सूर्य ग्रह अपनी राशि सिंह में हैं। शुक्रवार की मध्यरात्रि में बन रहे इस खास संयोग में गृहस्थ जन्माष्टमी मनाएंगे। पर्व को लेकर घरों व मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। घरों में झांकियों को अंतिम रूप दिया गया तो राधाकृष्ण मंदिरों को भी आकर्षक तरीके से सजाया गया।

झांकी सजाने की रही होड़

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर गुरुवार को झांकी सजाने की होड़ रही। कन्हैया के शृंगार और झांकियां सजाने को लेकर पूरे दिन बाजार में सजावटी वस्तुओं और राधाकृष्ण की लुभावनी पोशाक खरीदने के लिए दुकानों में लोगों का तांता लगा रहा। लोगों ने पूजा व व्रत के लिए फलों की खरीदारी की। मांग को देखते हुए फलों के दाम में काफी तेजी रही। सामान्य दिनों में बीस से तीस रुपये किलो बिकने वाला खीरा चालीस से पचास रुपये किलो तक बिका। वहीं नाशपाती 80 रुपये, सेब 60 से 80 रुपये और आम 65 से 80 रुपये प्रति किलो, जबकि केला 30 से 40 रुपये दर्जन तक बिका। बाजार में जगह-जगह धातु की बने झूले पर झुलते लड्डू गोपाल की दुकानें सजी रहीं।

चांदी के झूले पर झुलेंगे कान्हा

बिहार के बेगूसराय में यह काफी सहमधम से मनाया जाता है। मुजफ्फरपुर के हरिसभा चौक स्थित राधाकृष्ण मंदिर में इस साल भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की खास तैयारी की गई है। यहां चांदी के झूले पर भगवान को झुलाया जाएगा। पुजारी पं.रवि झा ने बताया कि जन्म के बाद मटकी फोड़ी जाएगी। इसकी पूरी तैयारी की गई है। भगवान के लिए वाराणसी से पोशाक मंगाई गई है। साथ ही साज-सज्जा के लिए बाहर से इवेंट मैनेजमेंट को बुलाया गया है। संध्या सात बजे से भजन का कार्यक्रम शुरू होगा। जो देर रात तक चलेगा। इसके लिए मुजफ्फरपुर व आसपास के जाने-माने कलाकारों को बुलाया जा रहा है।

ऐसे करें पूजा

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि भी कहा गया है। मान्यता है कि इस रात में योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान, नाम अथवा मंत्र जपते हुए जगने से संसार की मोह-माया से आसक्ति हटती है। इस त्योहार में भगवान नारायण की श्रीकृष्ण के रूप में पूजा की जाती है। इस अवसर पर मंदिरों को सुन्दर ढंग से सजाया जाता है तथा मध्यरात्रि में पूजा की जाती है। भगवान की मूर्ति को एक पालने में रखा जाता है तथा उसे धीरे-धीरे हिलाया जाता है। लोग सारी रात भजन गाते हैं तथा आरती की जाती है।

इस दिन घरों में भी भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति अथवा शालिग्राम का दूध, दही, शहद, यमुनाजल आदि से अभिषेक कर उसे अच्छे से सजाया जाता है। इसके बाद श्रीविग्रह का षोडशोपचार विधि से पूजन करते हैं। रात में बारह बजे शंख अथवा घंटे की ध्वनि से श्रीकृष्ण जन्म की उद्घोषणा होते ही भगवान की आरती उतार कर प्रसाद ग्रहण किया जाता है। हालांकि व्रत के दौरान फलाहार लेने में कोई मनाही नहीं है। व्रती को रात्रि भर भगवान की स्तुति, पौराणिक कथाओं व भजनों में लगे रहना चाहिए। दूसरे दिन प्रात:काल नित्य क्रिया के बाद श्रीकृष्ण की प्रतिमा का पूजन कर ब्राह्मणों को दान दिया जाता है। इसके बाद पारण कर व्रत को पूर्ण किया जाता है

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