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करवा चौथ व्रत : ऐसे रखेंगी व्रत तो मिलेगा पति और सास का प्यार

करवा चौथ के दिन कुछ खास बातों का ख्याल रखें तो यह विशेष फलदाई हो सकता है?

 Special Coverage News |  17 Oct 2019 4:25 AM GMT  |  दिल्ली

करवा चौथ व्रत : ऐसे रखेंगी व्रत तो मिलेगा पति और सास का प्यार

यूं तो पति-पत्नी के झगड़ों के किस्से आम हैं, लेकिन करवा चौथ का दिन दोनों में आपसी प्रेम बढ़ाता है। यह और फलदाई हो सकता है कुछ बातों का अगर ख्याल रखा जाए। पंडितों का कहना है कि इस दिन कोई भी महिला या पुरुष अपने बड़ों का अपमान करता है तो इस व्रत का फल नहीं मिलता। इस दिन भूलकर भी झगड़ा न करें। महिला हैं तो पति या सास से अपशब्द न कहें। इस दिन हो सके तो शादी का जोड़ा पहने ऐसा करना शुभ माना जाता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिला इस दिन अपने पति या किसी बड़े का अपमान करती है तो उसे करवा चौथ का जो फल मिलना चाहिए नहीं मिलता है। यही नहीं अपने श्रृंगार का सामान दूसरे को नहीं देना चाहिए। दूसरे के सामान से अपना श्रंगार नहीं करना चाहिए। इसके अलावा करवा चौथ व्रत रखने वाली नवविवाहिता को शादी के जोड़े में व्रत खोलना चाहिए इस दिन सास बहू के कपड़े देती है सुख कारी माना जाता है।

पति की लंबी उम्र के लिए किया गया करवा चौथ का व्रत रात को चांद के साथ पति के दीदार से खुलता है। इस दिन कुछ खास बातों का ख्याल रखें तो यह विशेष फलदाई हो सकता है। इस दिन पति के साथ ही जल ग्रहण करें इससे आपसी प्रेम भी बढ़ेगा।

8 : 16 बजे होगा चाँद का दीदार?

इस बार करवा चौथ पर खास संयोग बन रहा है। 70 साल बाद रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग बन रहा है। यह योग बहुत ही मंगलकारी है। करवा चौथ पर पूजा के मुहूर्त का समय 5:50 से रात 7:05 तक रहेगा। वहीं, करवा चौथ व्रत का समय सुबह 6:30 से रात 8:16 तक रहेगा। व्रत की कुल अवधि 13 घंटे 53 मिनट रहेगी।

करवा चौथ में पूजन विधि-

व्रत के दिन भोर के वक्त स्नान के बाद करवा चौथ व्रत का आरंभ करें. सूर्योदय के बाद पूरे दिन निर्जला रहें. दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें. आठ पूरियों की अठावरी, हलवा और पक्के पकवान बनाएं। पीली मिट्टी से गौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेशजी बनाकर बिठाएं.

शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर कथा सुनें. करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासू मां के पैर छूकर आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें. इसके बाद रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें. पति से आशीर्वाद लें. उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें. पूजन के बाद अन्य महिलाओं को करवा चौथ की शुभकामनाएं देकर व्रत संपन्न करें.

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