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2017 में चुनाव बसपा और भाजपा के मध्य होगा - कल्बे जब्बाद

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लखनऊः कानपुर में शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद का कहना है कि यूपी सरकार ने हिंदू मुस्लिम दोनों को ठगा है। यूपी सरकार आम जनता को लाभ पहुंचाने के बजाय कुछ चुनिंदा लोगों को ही फायदा पहुंचा रही है। कानपुर के हाजी सैय्यद नजरे हसन हाल में मजलिस पढऩे आए मौलाना ने कहा कि यूपी सरकार कुछ नाममात्र के धार्मिक नेताओं से घिरी हुई है। सरकार का पूरा लाभ यही लोग उठा रहे हैं। आगामी 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए उन्होंने कहा कि यह सपा पर भारी पड़ेगा। यह चुनाव बसपा और भाजपा के मध्य होगा। मंत्री आजम खां आरएसएस से मिले हैं। धार्मिक टिप्पणियों के सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी धर्म के खिलाफ किसी को कुछ भी बोलने का हक नहीं है।



मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नायब सदर मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि असहिष्णुता को लेकर देश के मौजूदा हालात ठीक नहीं है। इस माहौल को बदलने की जरूरत है। अमरोहा के धनौरा रोड स्थित स्कूल में हुई बोर्ड कार्यकारिणी की बैठक की सदारत करते हुए मौलाना ने कहा कि बोर्ड इस माहौल को बदलने के लिए देश के साथ है। माहौल बिगडऩा नहीं चाहिए। बोर्ड का दायरा बढ़ाने के लिए 31 सदस्यों ने सहमति जताई। इसके लिए फैसला लिया गया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सभी धर्मों के अल्पसंख्यकों को जोड़ेगा, ताकि इन सभी को फायदा पहुंचे। इसकी जल्दी ही शुरुआत की जाएगी। बैठक में फैसला लिया गया कि बोर्ड की संवैधानिक पीठ को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि कानूनी तौर पर किसी प्रकार की अड़चन न आ सके। बैठक में बोर्ड के सचिव मौलाना वली रहमानी, सुल्तान अहमद व कमाल फारूखी भी रहे।


दीन-दस्तूर बचाओ कांफ्रेंस में अमरोहा पहुंचे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव मौलाना वली रहमानी ने कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद देश का मुसलमान खौफजदा नहीं बल्कि फिक्रमंद है कि दीन व दस्तूर को कैसे बचाया जाए। स्कूलों में सूर्य नमस्कार, गीता पाठ व योग के साथ वंदे मातरम शरीयत के मुताबिक ठीक नहीं है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इसकी मुखालफत करता रहेगा, क्योंकि इससे दीन को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम, जिसका मतलब जमीन को सजदा है, मुसलमानों के लिए हराम है। मुल्क की जमीन हमारे लिए भी उतनी ही है जितनी दूसरे धर्म के लोगों के लिए।





पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट द्वारा तलाक के मसले पर की गई टिप्पणी के बारे में उन्होंने कहा कि शरीयत एक्ट 1937 तलाक के मसले पर सही है। अगर सुप्रीम कोर्ट इसमें बदलाव करेगा तो वह शरीयत में बदलाव होगा, जिसे बोर्ड नहीं होने देगा। गो मांस पर हंगामे के बारे में मौलाना ने कहा कि इसका जवाब सच्चर कमेटी ने दे दिया है। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद देश के मुसलमानों को बोर्ड किस नजरिए से देखता है? इस पर उन्होंने कहा कि देश के मुसलमान किसी सूरत में खौफजदा नहीं हैं। मदरसों में छात्रों के शोषण को उन्होंने बेबुनियाद बताया।



सऊदी अरब, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात में भारत के राजदूत रह चुके तलमीज अहमद ने कहा कि 1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद ही राजनीतिक इस्लाम की शुरुआत हुई। 1980 के दशक में अफगानिस्तान में अलकायदा के बढ़ते प्रभाव के कारण ग्लोबल जिहाद को बढ़ावा मिला। तलमीज अहमद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 'राजनीतिक इस्लाम व ग्लोबल जिहाद' पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में वहाबी इस्लाम आगे बढ़ा तो सल्फी जिहाद ने आक्रामक तेवर दिखाए।



पूर्व राजदूत ने कहा कि इस्लाम न्याय व दया का धर्म है, लेकिन इसका इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है। कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने कहा कि पूरी दुनिया में मुस्लिम समाज संकट से गुजर रहा है। मुस्लिम महिलाओं को पूरी आजादी व समानता के अवसर नहीं मिल रहे। जिहाद शब्द का गलत अर्थों में इस्तेमाल किया जा रहा है। हमें अशिक्षा के खिलाफ जिहाद छेडऩा चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय मुसलमान इस्लामिक स्टेट के खिलाफ हैं।
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