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गुरुग्राम के कैमरा म्यूजियम, यात्रा का वृतांत और इसकी विस्तृत जानकारी

यह कैमरा के दीवानो, फोटोग्राफी के परवानों, इतिहास के मस्तानों और पुरातन वस्तुओं के शौकीनों के लिए एक नायब तोहफा है। यहाँ बच्चों के साथ एक बार अवश्य जाना चाहिए।

 Shiv Kumar Mishra |  17 Oct 2020 6:21 AM GMT  |  गुरुग्राम

गुरुग्राम के कैमरा म्यूजियम, यात्रा का वृतांत और इसकी विस्तृत जानकारी
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मनीष कुमार गुप्ता

अगर आपको फोटोग्राफी और कैमरे का शौक है और आपको फोटोग्राफी कैमरे का इतिहास, ऐतिहासिक महत्व के कैमरों एवम् इनके विकास की कहानी के बारे में जानने की दिलचस्पी है तो गुरुग्राम के चकरपुर नामक स्थान पर आइए। जहां स्थित है एक शानदार कैमरा म्यूजियम लेखक का विश्वास है कि यह प्रदेश ही नहीं बल्कि भारतवर्ष का सबसे पहला और दुर्लभ कैमरों का विशाल संग्रहालय है।

गुरुग्राम के निवासी जाने माने फोटोग्राफर आदित्य आर्य ने गुरुग्राम नगर निगम के सहयोग से सेक्टर 28 में वर्ष 2018 में कैमरा म्यूजियम की स्थापना की है और इसका नाम कैमरा म्यूजियो रखा गया। यह संग्रहालय कुल 18,000 वर्ग फुट निर्माण में साढ़े तीन मंज़िल में बनाया गया है जहाँ इस अनोखे संग्रहालय में 3000 से अधिक विंटेज कैमरों के कलेक्शन व अन्य वस्तुओं के साथ प्रदर्शनी लगी हुई है जिसमें पुरातन समय से लेकर आज तक के कैमरे, फोटोग्राफी के विविध उपकरण, 200 साल से भी ज्यादा पुरानी फोटोग्राफी तस्वीरें, पुराने समय के फोटोग्राफी स्टूडियो आदि के बारे में जानकारी मिलती है। यहां पर एक स्थान पर 100 से अधिक देशों से प्राचीन कैमरे प्रदर्शित किये गए हैं। यहां के केंद्रीय हॉल में एक शानदार फानूस लगाया गया है जो कि कमरों के द्वारा ही बनाया गया है। यह एक ऐसा केंद्र है जिसके माध्यम से कला, नये विचार और हमारे समय के फोटोग्राफी से संबंधित विषयों का पता चलता है तथा पेशेवरों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए फोटोग्राफी को सीखने और अनुभव करने का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है। इस म्यूजियम में आपको पुराने जमाने में जासूसी के लिए बनाए गए घड़ी के आकार वाले विदेशी कैमरे से लेकर दूसरे विश्वयुद्ध में जापान के हिरोशिमा-नागासाकी पर अमेरिका द्वारा परमाणु बम गिराने की एयरक्राफ्ट से तस्वीर लेने वाला के-20 कैमरा भी देखने को मिलेगा।


भूतल यानी ग्राउंड फ्लोर पर एक डार्क रूम और कैमरों को रखने के लिए म्यूजियम बनाया है। और साथ ही मोमेंटो बिक्री सेंटर, सूचना केंद्र एवम् कैफेटेरिया बनाया गया है। इसके अलावा एक फोटोग्राफर्स आदि के लिए कॉन्फ़्रेंस रूम, इसी विषय से सम्बंधित खास पुस्तकालय, और 2 अलग अलग प्रदर्शनी कक्ष बनाये गये हैं। यहाँ बच्चों और युवाओं को फोटोग्राफी सिखाने के लिए बड़ा ट्रेनिंग सेंटर भी बनाया गया है जिसमें 80 से अधिक लोगों के बैठने की क्षमता है। वर्तमान में यहाँ एक विशाल कक्ष में गाँधी जयंती के अवसर पर महात्मा गाँधी फोटो प्रदर्शनी और दूसरे में अरावली की फोटो प्रदर्शनी लगाई गई है समय समय पर इसके विषय बदलते रहते है। अगर आप के पास स्वये के खींच गये अच्छे चित्र है तो आप उन्हें यहां भेज सकते है। पसंद आने पर चित्रों को यहां पर स्थान दिया जा सकता है।


आदित्य आर्य ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन कॉलेज से इतिहास में ग्रेजुएशन करने के बाद 1980 में फोटोग्राफी की शुरुआत की थी। अस्सी के दशक के शुरू में फिल्म उद्योग में फोटोग्राफर मुंबई फिल्म उद्योग में एक संक्षिप्त कार्यकाल के बाद वह वापस दिल्ली चले आए और वह विज्ञापन और कॉर्पोरेट के क्षेत्र में सेवायें देने लगे और उनके काम को दुनिया भर में पुस्तकों और यात्रा पत्रिकाओं में व्यापक रूप से सराहा किया गया। फोटोग्राफी के साथ ही उन्होंने देश-विदेश के पुराने कैमरों का कलेक्शन शुरू कर दिया। विश्व भर में भ्रमण के दौरान ऐतिहासिक वस्तुओं के व्यापारियों, फिल्म निर्माताओं और शौकिया व्यवसायियों आदि से सैकड़ों कैमरे खरीदे और अपने जीवन भर की जमा पूंजी इस ऐतिहासिक संग्रह को बनाने में सिर्फ इसलिए खर्च कर दी कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक ऐसा जहाँ बने जो आने वाले सैकड़ों वर्षों तक कैमरे के क्रमिक विकास, उदभव से पराभव की कहानी समेटे हो और जब कोई पधारे तो इस परिसर में आने पर अपने विशिष्ट संग्रह से उसे आल्हादित कर दे।


जैसा कि हम जानते हैं कि 19 अगस्त 1839 को पहले फोटो कैमरा का आविष्कार किया गया था। तब से लेकर आज तक कैमरे की तकनीकों पर इसका आकार घटाने एवम् सुविधाओं में वृद्धि में विशेषज्ञ लगे रहे। आज मोबाइल फोन और कैमरे के बेहतरीन संयोजन ने कैमरे की आवश्यकता तो घटाई है लेकिन प्रोफेशनल कैमरे की मांग और महत्व आज भी बढ़ रहा है। जिसमें फोटो खींचने के लिए प्रयोग होने वाले कैमरों के साथ उनका पूरा इतिहास मौजूद है।

यह कैमरा के दीवानो, फोटोग्राफी के परवानों, इतिहास के मस्तानों और पुरातन वस्तुओं के शौकीनों के लिए एक नायब तोहफा है। यहाँ बच्चों के साथ एक बार अवश्य जाना चाहिए। म्यूजियम की टिकट बड़ों और बच्चों के लिए 200 और 100 रुपए की है। यह गुरुग्राम स्थित चकरपुर में उप महापौर के कार्यालय के बिलकुल बराबर में स्थित है जहाँ गूगल मैप (Google Map) की मदद से बिलकुल आसानी से पहुंचा जा सकता है। गुरुग्राम सिटी बस के द्वारा भी यहाँ आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां कारों व बसों की लिये पार्किंग की उत्तम व्यवस्या है।

लेखक सीए मनीष कुमार गुप्ता है जिन्होंने अपना यात्रा वृतांत लिखा है 9810771477

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