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कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, कई IIT और IIM के डायरेक्टर प्रोफेसरों ने इन फर्जी जर्नल्स में अपने आर्टिकल्स छपवाए!

कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, कई IIT और IIM के डायरेक्टर प्रोफेसरों ने इन फर्जी जर्नल्स में अपने आर्टिकल्स छपवाए!
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शशांक मिश्र

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नार्थ हॉल में"शोध पत्रिकाओं के गुणवत्ता के प्रश्न" पर आयोजित सेमिनार में मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए इंडियन एक्सप्रेस नई दिल्ली के सीनियर एडिटर श्याम लाल यादव ने कहा कि उच्च शिक्षा में एपीआई आधारित शोध पत्रिकाओं का मानक न तो तर्कसंगत है और ना ही इसके लिए व्यापक कार्य योजना मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा बनाई गई है। लोग अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं का प्रकाशन अपने कस्बों में बैठकर कर रहे हैं और इसके लिए मानदंड भी अब तक तय नहीं है। हैदराबाद का एक प्रकाशक 785 जर्नल/ पत्रिकाओं का संपादन करता है और 2007 से अब तक 1000000 से ज्यादा आर्टिकल्स छाप चुका। कई अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाएं जिनका पता लंदन , ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका का होता है पता करने पर पता चला कि यही दिल्ली के किसी मोहल्ले से छपती हैं। ऐसे बहुत सारे पत्रिकाएं /जर्नल्स हैं जिन्हें आप पैसा देखकर कुछ भी छपवा सकते हैं और कितना भी छपवा सकता है । यह पत्रिकाएं दो-तीन साल पहले के इशू बना कर भी किसी का आर्टिकल छाप सकते हैं।यह इतना बड़ा धंधा हो गया है जिसमें पैसा देकर कुछ भी कराना संभव है। श्याम लाल ने कहा की कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, कई आईआईटी और आईआईएम के डायरेक्टर प्रोफेसरों ने इन फर्जी जर्नल्स में अपने आर्टिकल्स छपवाएं हैं।


श्याम लाल ने आरटीआई अधिनियम द्वारा मांगी गई सूचनाओं के आधार पर जो व्यापक रिपोर्ट तैयार की थी उस पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संज्ञान लेते हुए इस संबंध में यूजीसी को आवश्यक निर्देश दिए हैं।




श्याम लाल यादव ने अपनी अन्य आरटीआई आधारित आर्टिकल्स की भी चर्चा की जिसने केंद्र सरकार की नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जैसे जनधन खाते को जीवित कराने के लिए अनेक सरकारी क्षेत्र के बैंकों द्वारा करोड़ों खातों में एक ₹1 डालना मनमोहन सरकार में मंत्रियों के दौरे पर हुए खर्च केंद्र सरकार के नौकरशाहों द्वारा विदेश के दौरे सरकार द्वारा फोन टेप की जाने आदि ऐसे अनेक स्टोरीज का जिक्र किया आपकी गंगा प्रदूषण पर पर आधारित इंडिया टुडे के लेख को यूनेस्को ने 2010 में वैश्विक स्तर पर 20 सबसे उत्कृष्ट इनवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग में स्थान दिया ।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने इस बात पर जोर दिया कि बहुत सारे शोध आलेख और पुस्तकों के प्रकाशन के स्थान पर गुणवत्ता परक शोध आलेख और पुस्तकें प्रकाशित होनी चाहिए । उन्होंने जोर देकर कहा कि एक भी महत्वपूर्ण आलेख या पुस्तक पूरे विश्व में यश और प्रसिद्धि का आधार बन जाती है । इसलिए हमारे चिंतन और लेखन की यह दिशा होनी आवश्यक है उन्होंने उपस्थित शोध छात्रों प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों से गुणवत्तापरक लेखन का आह्वान किया।


कार्यक्रम का संचालन डॉ राजेश कुमार गर्ग एसोसिएट प्रोफेसर हिंदी विभाग ने किया। मुख्य अतिथि का स्वागत डॉ राकेश सिंह एसोसिएट प्रोफेसर हिंदी विभाग ने किया। श्याम लाल का अंगवस्त्रम एवम् प्रतीक चिन्ह भेंट करके कुलपति द्वारा स्वागत भी किया गया।


इस अवसर पर अनेक विभागों के आचार्य ,विभिन्न संकायों के शोध छात्र एवं प्राध्यापकों सहित लगभग 250 लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर रजिस्ट्रार प्रोफेसर हरिशंकर उपाध्याय, चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर रामसेवक दुबे, प्रोफेसर जगदंबा सिंह , प्रोफेसर हर्ष कुमार ,प्रोफेसर राणा कृष्ण पाल सिंह, डॉ मंजू सिंह, डॉ विवेक पांडे , प्रोफेसर शेखर अधिकारी , प्रोफेसर रविंद्र धर, प्रोफेसर अली अहमद फातमी, डाक्टर सुनील कांत मिश्र , डाक्टर उमेश प्रताप सिंह , प्रोफेसर मीरा दीक्षित, प्रोफेसर बी एन सिंह , प्रोफेसर भरत सिंह, डॉ शशिकांत शुक्ल , प्रोफेसर अनुपम दीक्षित , प्रोफेसर पंकज कुमार , प्रोफेसर शिव प्रसाद शुक्ल, प्रोफेसर संतोष भदौरिया, डॉ सुरभि त्रिपाठी, डॉक्टर सुधा त्रिपाठी, डॉ अमृता, डॉ दीनानाथ ,डाक्टर शिव कुमार यादव, डॉक्टर कुमार वीरेंद्र, डॉक्टर विनम्र सेन सिंह, डॉ सुजीत सिंह, डाक्टर हेमराज सहित अनेक आचार्य गण उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ राजेश कुमार गर्ग एसोसिएट प्रोफेसर हिंदी विभाग ने किया।

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