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जांच समिति की 9 पन्नो की रिपोर्ट मे VC को साबित किया पाक साफ , पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ने जांच समिति पर ही सवाल खड़े करते हुए VC पर लगाया ये बड़ा आरोप

जांच समिति की 9 पन्नो की रिपोर्ट  मे VC को साबित किया पाक साफ , पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ने जांच समिति पर ही सवाल खड़े करते हुए VC पर लगाया ये बड़ा आरोप
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शशांक मिश्रा

पिछले कुछ दिनों से इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कथित तौर से कुलपति के जिस ऑडियो टेप को लेकर विवाद का माहौल बना हुआ था, और इस विवाद के बाद ही न्यायमूर्ति अरुण टंडन की अध्यक्षता में जाँच कमेटी का गठन हुआ था, कल शाम को उस जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कार्यवाहक कुलपति को सौप दी। न्यायमूर्ति अरुण टंडन महोदय ने स्वयं यह रिपोर्ट कार्यवाहक कुलपति को सौंपी।

आपको बता दें कि 20 सितंबर 2018 को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति महोदय ने न्यायमूर्ति (अवकाश प्राप्त) अरुण टंडन के नेतृत्व मे एक जाँच समिति का गठन किया था। न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने कार्यवाहक महोदय को सौपी अपनी रिपोर्ट में काफी विस्तार से और बिंदुवार तरीके से उन सारे बिंदुओं पर विचार किया है जो कमेटी के सामने रखे गए थे। यह रिपोर्ट कुल 9 पन्ने की है।

न्यायमूर्ति ने पृष्ठ संख्या दो में अपनी रिपोर्ट देते हुए साफ-साफ लिखा कि 29 सितंबर 2018 को सुबह 10:40 पर उन्हें इस प्रकरण से संबंधित महिला के मोबाइल नंबर 9999***265 से एक मोबाइल मैसेज प्राप्त हुआ । इस संदेश में महिला ने साफ-साफ कहा कि " वह पिछले दस सालों से इलाहाबाद शहर से दूर हैं पर कुछ लोग उन्हें बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं।" न्याय मूर्ति को भेजे इस मोबाइल संदेश में सम्बंधित महिला ने अपना नाम और अपने पिता का नाम साफ़ साफ़ लिखा।

1अक्टूबर को उसी महिला ने , जिनका नाम इस प्रकरण से बार बार जोड़ा जा रहा है , उन्होंने न्यायमूर्ति को एक टाइप किया हुआ पत्र भेजा जिसमें उन्होंने साफ़-साफ कहा कि वह जाँच कमिटी को इस पूरे प्रकरण से संबंधित एक एफिडेविट दे रही है। साथ ही महिला ने कहा कि उसकी आवाज में लिए गए साक्षात्कारों को कई जगह लगातार गलत तरीके से प्रयोग किया जा रहा है। न्यायमूर्ति महोदय ने पेज संख्या पाँच में इसका विस्तार से जिक्र किया है। 1 अक्टूबर को प्रकरण से संबंधित महिला ने अपने हस्ताक्षर युक्त एक एफिडेविट जाँच कमेटी के सामने प्रस्तुत किया।जिसमें उन्होंने साफ-साफ लिखा कि वह इलाहाबाद शहर से पिछले 10 सालों से दूर हैं लेकिन कुछ लोग उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे रहे हैं । इस शपथ पत्र के साथ महिला में अपनी पहचान के लिए अपने पैन कार्ड की कॉपी भी साथ में संलंग्न की।

जांच कमेटी की रिपोर्ट में पेज संख्या 7 पर न्यायमूर्ति ने साफ-साफ लिखा कि महिला के एफिडेविट को पढ़ने के बाद स्पष्ट है कि कुछ लोगों द्वारा उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, तथा जिस महिला का नाम बार-बार इस प्रकरण में लिया जा रहा है उन्होंने कुलपति रतनलाल हांगलूं पर किसी भी प्रकार का कोई आरोप नहीं लगाया ।

न्यायमूर्ति ने अपनी जाँच रिपोर्ट की पेज संख्या आठ और नौ में अपना फैसला लिखते हुए कहा कि ' इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतनलाल हांगलूं के खिलाफ जो भी आरोप लगाए जा रहे थे उनमें से कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हो सका। साथ ही कुलपति पर आरोप लगाने वाला कोई भी व्यक्ति आरोपों की पुष्टि के लिए एफिडेविट के साथ-साथ प्रमाण लेकर जाँच कमिटी के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में कुलपति प्रो.रतन लाल हांगलूं पर लगाए गए सारे आरोप निराधार हैं। (पेज 9 पर यह टिप्पणी है। ) न्यायमूर्ति ने अपने फैसले के अंत में यह भी लिखा कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन को यह सलाह देना चाहेंगे कि अगर "भविष्य में विश्वविद्यालय के कुलपति पर या विश्वविद्यालय के किसी भी बड़े अधिकारी पर ऐसे आरोप लगते हैं तो बिना एफिडेविट के इन आरोपों का संज्ञान नहीं लेना चाहिए।"

इस मामले में जनसंपर्क अधिकारी इविवि चित्तरंजन कुमार ने बताया कि "जाँच कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कुलपति महोदय पर लगाए गए एक भी आरोप को सही नहीं पाया। जिन लोगों ने कुलपति पर मनगढ़ंत आरोप लगाए वे इसके लिए कोई भी प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। इस प्रकरण में जिस महिला का बार बार नाम लिया गया, उन्होंने जांच कमिटी को दिए हलफनामे में साफ़ साफ़ कहा कि कुछ लोग लगातार उनको बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन इस जाँच कमिटी की रिपोर्ट जल्द ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजेगा। "




वही special coverage news से पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रोहित मिश्रा ने कहा कि ये कोई जांच रिपोर्ट नहीं है यह विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लीपापोती की जा रही है! हम व्यभिचारी कुलपति को कैंपस में घुसने नहीं देंगे एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा चाहे कुछ भी हो जाए कुलपति को कैंपस में घुसने नहीं दिया जाएगा!




वहीं जांच कमेटी की रिपोर्ट पर special coverage news से पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने कहा कि यह कमेटी पूरी तरह से निराधार है एक कुलपति के ऊपर लगे किसी भी आरोप की जांच विश्वविद्यालय का कोई भी व्यक्ति नहीं कर सकता !कुलपति की जांच कुलपति खुद कैसे करवा सकते हैं!हम पहले ही दिन से कहते आ रहे हैं कि कुलपति द्वारा लाभान्वित व्यक्ति कैसे कोई निष्पक्ष जांच कर सकता है ! हम सब ने न्यायमूर्ति जी से मिलकर अपनी बात रखी तो उन्होंने कहा कि यह कोई मजिस्ट्रेट ,विभागीय जांच नहीं तो फिर जांच किस बात की! अगर वह बातचीत का ऑडियो अश्लील नही है जैसा कहा जा रहा है तो कुलपति जी यह भी बताएं अश्लीलता किसे कहते हैं अश्लीलता की परिभाषा क्या है? जिस महिला का ऑडियो रिलीज किया गया उस महिला ने बताया कि उसे कुलपति ने 50 लाख का लालच दिया है हमारे खिलाफ आरोप लगाने को ये पद के दुरुपयोग का मामला है जो बेहद गंभीर है! हम मानव संसाधन विकास मंत्रालय से उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हैं !हमने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर आगाह किया है कि अगर कुलपति विश्वविद्यालय कैंपस में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं तो जो कुछ भी होगा उसका जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन होगा!














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