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उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा की गाड़ी अब पटरी पर - राज्यपाल रामनाइक

उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा की गाड़ी अब पटरी पर - राज्यपाल रामनाइक
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शार्टकट से आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। आत्मपरीक्षण करने से अपनी कमियां सामने आयेंगी और सफलता चरण चूमेगी।

शशांक मिश्रा

उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय का 13वां दीक्षान्त समारोह मंगलवार को सरस्वती परिसर स्थित पं0 मदन मोहन मालवीय दीक्षान्त समारोह स्थल में आयोजित किया गया। दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री राम नाईक ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में दीक्षान्त समारोह में उपाधि प्राप्त छात्र छात्राओं को बधाई देते हुये कहा कि भारत के विकास के लिये यह आवश्यक है कि यहां का प्रत्येक नागरिक अत्याधुनिक ज्ञान-विज्ञान युगानुकूल शिक्षा ग्रहण करे। उन्होंने कहा कि बदलती हुई दुनिया में आगे बढ़ने के लिये कड़ी प्रतिस्पर्धा है। आगे बढ़ने के लिये कड़ी मेहनत के साथ-साथ प्रमाणिकता और पारदर्शिता आवश्यक है। शार्टकट से आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। आत्मपरीक्षण करने से अपनी कमियां सामने आयेंगी और सफलता चरण चूमेगी।


राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा की गाड़ी अब पटरी पर आयी है। नकल विहीन परीक्षायें सभी विश्वविद्यालयों में संचालित की जा रही है। इसके साथ ही दीक्षान्त समारोह का कलेण्डर भी 84 दिनों का तैयार किया गया है जिसके अन्तर्गत 24 अगस्त से 15 नवम्बर 2018 तक प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में दीक्षान्त समारोह करा लिये जायेंगे। उन्होंने कहा कि गत वर्ष का दीक्षान्त समारोह का कैलेण्डर 253 दिनों में 09 सितम्बर 2017 से लेकर 19 मई 2018 तक सम्पन्न हुआ। इस बार प्रदेश के सभी कुलपतियों को निर्देश दिया गया कि इसे तय समय सीमा में आयोजित किया जाय। उन्होंने दीक्षान्त समारोह में महिला अभ्यर्थियों को दिये गये पदकों की संख्या पर खुशी जाहिर करते हुये कहा कि महिलाओं में शिक्षा का बढ़ता प्रभाव भविष्य के लिए एक शुभ संकेत है। नैतिक मूल्यों के सृजन के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति सहज निष्ठा एवं श्रद्धा का भाव रखकर भारतीय जीवन दर्शन का अनुगामी बनना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरू का गौरव प्राप्त रहा है। विश्व बन्धुत्व की भावना का संदेश आज पुनः पूरे देश में फैलाने की आवश्यकता है।




राज्यपाल नाईक ने कहा कि भारत की शिक्षित युवा पीढ़ी का अधिकांश भाग भौतिकवादी पाश्चात संस्कृति की चकाचैध से चैंधियाया हुआ है एवं वास्तविक स्वरूप पर आवरण है। ऐसी स्थिति में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की डोर कमजोर होती जा रही है। गांव और शहरों का अन्तर बढ़ता जा रहा है। जिस कारण विकास का असन्तुलित दृश्य परिलक्षित होता है। इसका कारण शिक्षा व्यवस्था से मूल्य आधारित शिक्षा का दूर होना है।अगले वर्ष प्रयाग में लगने वाले महाकुम्भ की एतिहासिकता का जिक्र करते हुये कहा कि देश विदेश से आने वाले 12 करोड़ श्रद्धालुओं के मेजबानी के लिए राजर्षि टण्डन जैसे मनीषी के नाम पर स्थापित इस मुक्त विश्वविद्यालय की अहम भूमिका रहेगी।


मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रोफेसर नागेश्वर राव ने दीक्षान्त भाषण देते हुये कहा कि शिक्षा मनुष्य के मानवीय गुणों तथा व्यक्तित्व विकास का एक सशक्त माध्यम है। शिक्षा का उद्देश्य संकीर्णताओं, रूढ़ियों तथा अंधविश्वास को दूर कर हृदय के अंतःस्थल में मानव मूल्यों का बीजारोपण करना है। प्रो0 राव ने कहा कि शिक्षा के द्वारा ही संकीर्णताओं व रूढ़िवादिता को नष्ट कर एक सुसंस्कृत एवं सभ्य समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थियों के कंधों पर ही सभ्य सुसंस्कृत समाज के निर्माण का दायित्व है।

प्रो0 राव ने कहा कि शिक्षार्थी ऐसी शिक्षा ग्रहण करें जो उन्हें विश्व-बन्धुत्व का पाठ पढ़ाये। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले शिक्षार्थियों से कहा कि मात्र औपचारिक शिक्षा ग्रहण करने के स्थान पर वे अपने अंतःस्थल को ज्ञान से प्रकाशित करने का प्रयास करें तथा अपने आचरण की शुद्धता की ओर अवश्य ध्यान दें। इग्नू के कुलपति प्रो0 राव ने कहा कि शिक्षा के साथ युवाओं के अंदर धार्मिक सहिष्णुता एवं सद्भाव का होना आवश्यक है। मनुष्य के अंदर विद्यमान नैतिक गुण ही उसका गौरव है। उन्होंने कहा कि आदर्श राष्ट्र की स्थापना के लिए हम सभी को सभ्य सुसंस्कृत एवं नैतिक गुणों से पूर्ण होना होगा। उच्च शिक्षा के द्वारा ही स्वतंत्र चिन्तन का विकास होता है जो भविष्य में उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। प्रो0 राव ने योग शिक्षा की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि वे योग विद्या अर्जित कर अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को और मजबूत बनायें। शारीरिक स्वास्थ्य भी शिक्षा का एक महत्वपूर्ण अंग है और स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है। प्रो0 राव ने विश्वविद्यालय से जुड़ी अपनी यादों को साझा किया।

इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह ने अतिथियों का स्वागत तथा कुलपति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि इसी सत्र से कर्मचारियों के हित संरक्षण के लिए कर्मचारी कल्याण कोष की स्थापना की गयी है।


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