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LIVE: अयोध्या जमीन मामला: सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू, रामलला के वकील ने किया बड़ा दावा

रोजाना सुनवाई के तहत हफ्ते में तीन दिन मंगल-बुध-गुरुवार को मामला सुना जाता है। लेकिन 8 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया कि वह हफ्ते में पांच दिन इस मामले को सुनेगा ।

 Sujeet Kumar Gupta |  13 Aug 2019 5:38 AM GMT  |  नई दिल्ली

LIVE: अयोध्या जमीन मामला: सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू, रामलला के वकील ने किया बड़ा दावा

लखनऊ। संविधान पीठ अयोध्या में विवादित 2.77 एकड़ भूमि तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला- के बीच बराबर बराबर बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर छह अगस्त से नियमित सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू यह मामले में दिन-प्रतिदिन की सुनवाई का आज 5 वां दिन है।

पांचवे दिन जब मामले की सुनवाई शरु हुई तो उस दौरान रामलला विराजमान की तरफ से के. परासरण ने कहा कि इस मामले को किसी तरह से टालना नहीं चाहिए, अगर किसी वकील ने ये केस हाथ में लिया है तो उसे पूरा करना चाहिए. बीच में कोई दूसरा केस नहीं लेना चाहिए. के. परासरण ने अपनी दलीलें पूरी कर दी हैं. अब रामलला की तरफ से एस. सी. वैद्यनाथन अपनी दलील रखे।

एस. सी. वैद्यनाथन ने कहा कि मस्जिद से पहले उस स्थान पर मंदिर था, इसका कोई सबूत नहीं है कि बाबर ने ही वो मस्जिद बनाई थी. मुस्लिम पक्ष ने दावा किया था कि उनके पास 438 साल से जमीन का अधिकार है, लेकिन हाईकोर्ट ने भी उनके इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया था।

रामलला की तरफ से वकील वैद्यनाथन ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने ही अपने एक फैसले में कहा था कि मंदिर के लिए मूर्ति होना जरूरी नहीं है. अब रामजन्मभूमि को लेकर जो आस्था है, वह सभी शर्तों को पूरा करती है।

वकील वैद्यनाथन ने मुस्लिम पक्ष की दलील को पढ़ा और कहा कि उनके पास कोई सबूत नहीं है कि उनके पास कब्जा है या कब्जा चला आ रहा है. उन्होंने ये भी कहा कि अगर कोई स्थान देवता है, तो फिर उसके लिए आस्था मान्य होनी चाहिए.

इस पर जस्टिस अशोक भूषण ने चित्रकूट में कामदगिरी परिक्रमा का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि लोगों की आस्था और विश्वास है कि वनवास जाते समय भगवान राम, लक्ष्मण और सीता ठहरे थे।

आपको बता दें कि 6 अगस्त से अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई है। रोजाना सुनवाई के तहत हफ्ते में तीन दिन मंगल-बुध-गुरुवार को मामला सुना जाता है। लेकिन 8 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया कि वह हफ्ते में पांच दिन इस मामले को सुनेगा । यानी अगले हफ्ते से ये केस पांच दिन सुना जाएगा। सोमवार को ईद था इसलिए सुप्रीम कोर्ट बंद था, ऐसे में 13 अगस्त से लेकर 16 अगस्त तक मामला सुना जाएगा। वैसे अब हर हफ्ते सोमवार से शुक्रवार तक केस की सुनवाई अदालत में होगी।

अयोध्या मामले में अब तक क्या हुआ?

मध्यस्थता पैनल द्वारा मामले का समाधान नहीं निकलने के बाद कोर्ट 6 अगस्त से सुनवाई कर रहा है। यह नियमित सुनवाई तब तक चलेगी, जब तक कोई नतीजा नहीं निकल जाता। मंगलवार को सुनवाई के पहले दिन निर्मोही अखाड़ा ने पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर अपना दावा किया। कहा था कि पूरी विवादित भूमि पर 1934 से ही मुसलमानों को प्रवेश की मनाही है। बुधवार को बेंच ने पक्षकार निर्मोही अखाड़े से संबंधित 2.77 एकड़ भूमि के दस्तावेज पेश करने को कहा था। इस पर अखाड़े ने कहा था कि 1982 में वहां डकैती हुई, जिसमें सभी दस्तावेज खो गए।

शीर्ष अदालत ने राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील अयोध्या प्रकरण में तीसरे दिन की सुनवाई में कहा सुप्रीम कोर्ट के सामने रामलला के वकील ने कहा कि जन्मस्थान को सटीक स्थान की आवश्यकता नहीं है. रामलला के वकील परासरन ने कहा जन्मभूमि बहुत महत्वपूर्ण होती है. राम जन्मस्थान का मतलब है एक ऐसा एरिया जहां सभी की आस्था और विश्वास है। जहां तक हिन्दू देवताओं का संबंध है तो उन्हें कानून में कानूनी व्यक्ति माना गया है जो संपत्ति का स्वामी हो सकता है और मुकदमा भी कर सकता है।

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