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बलरामपुर में हाथरस जैसी हैवानियत, गैंगरेप के बाद दलित छात्रा की कमर और टांगे तोड़ी, मरने से पहले मां से बोली ये बात

यूपी में आज खबर लिखते लिखते हाथ पाँव कापने लगे है.

 Shiv Kumar Mishra |  30 Sep 2020 5:45 PM GMT  |  बलरामपुर

बलरामपुर में हाथरस जैसी हैवानियत, गैंगरेप के बाद दलित छात्रा की कमर और टांगे तोड़ी, मरने से पहले मां से बोली ये बात
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अब बलरामपुर में, हाथरस से भी भयानक और दिल दहलाने वाली वारदात हुई है। दलित समाज की एक बच्ची के साथ गैंगरेप हुआ है.उसके दोनों पैर तोड़ दिए गए। कमर तोड़ दी गई। मुंह बंद करने के लिए घातक इंजेक्शन ठूंस दिया और फिर हत्या कर दी गई। आखिर यूपी में कानून नाम की चीज बची है या नहीं?

हाथरस में गैंगरेप मामले को लेकर देशभर में उबाल है, इसी बीच यूपी के बलरामपुर में दलित युवती के साथ हैवानियत बरती गई। 22 साल की दलित छात्रा के साथ गैंगरेप के बाद उसकी कमर और दोनों पैर तोड़ दिए गए। इसके बाद छात्रा को रिक्शे में बिठाकर घर भेज दिया गया, जहां कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया है।

मृतक युवती की मां का आरोप है कि उसकी बेटी के साथ इंजेक्शन लगाकर हैवानियत की वारदात को अंजाम देने के बाद उनकी बेटी का कमर और दोनों टांगों को तोड़कर रिक्शे पर बैठाकर घर भेज दिया गया जिसके बाद वो कुछ भी बोल नहीं पा रही थी। वह सिर्फ इतना कह पाई, 'बहुत दर्द है अब मैं बचूंगी नहीं।'

सूत्रों की मानें तो गैगरेप के बाद युवती के आंतरिक और बाहरी अंगों में काफी चोटें आई हैं जिसके कारण उसकी मौत हो गई। घटना को लेकर पुलिस अधीक्षक देव रंजन वर्मा ने बताया कि मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। घटना की जांच की जा रही है। घटना बलरामपुर के गैसड़ी कोतवाली क्षेत्र की है। युवती के परिजनों का आरोप है कि 22 साल की दलित छात्रा 29 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे बीकाॅम में एडमिशन कराने घर से निकली थी लेकिन घर नहीं लौटी। शाम को करीब 5 बजे उसकी खोजबीन शुरू हुई। करीब 7 बजे शाम को पीड़ित युवती एक रिक्शे से बुरी तरह से घायल अवस्था में घर पहुंची। उसकी ये हालत देख घर वालों ने पूछताछ करने की कोशिश की तो वह दर्द से कराहने लगी।

गांव के दो डॉक्टरों को दिखाने के बाद परिजन जिला मुख्यालय पर इलाज करवाने के लिए परिजन उसे लेकर रवाना हुए लेकिन कुछ दूरी पर ही छात्रा की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जब छात्रा घर पहुंची तो कीचड़ से लथपथ थी और उसके हाथ में ग्लूकोज चढ़ाने वाला वीगो लगा था। परिजनों ने जब गांव में पता करने की कोशिश की तो पता चला की गांव के ही एक डॉक्टर को गांव के ही एक लड़के ने एक घर में युवती की इलाज के लिए बुलाया था।

परिजनों ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि जब युवती पचपेड़वा के विमला विक्रम महाविद्यालय में एडमिशन कराकर लौट रही थी तो गांव के ही 5 से 6 लड़कों ने उनका अपहरण कर लिया और गांव के ही एक घर में ले जाकर गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। जिस रिक्शे पर युवती को घर पहुंचाया गया उसपर खून के घब्बे और रास्ते में उसकी जूती भी पाई गई है।

जघन्य गैंगरेप की शिकार पीड़ित दलित छात्रा मेधावी थी। करीब दो साल वह एक संस्था के जरिए किसानों को आधुनिक खेती करने के लिए जागरूक करने का काम भी करती थी। घटना के बाद पुलिस ने युवती के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संयुक्त जिला चिकित्सालय स्थित पोस्टमॉर्टम हाउस में करीब 6 घंटे तक युवती का पोस्टमार्टम 4 डाक्टरों के पैनल ने किया। बलरामपुर के सीएमओ को भी पोस्टमार्टम हाउस तक आना पड़ा। देर शाम युवती का शव परिजनों को सौंपा गया।

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