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जांच में पकड़ा गया घोटाला लाखो की हेराफेरी, मुख्य मत्स्य अधिकारी ने सौंपी जांच रिपोर्ट में प्रधान व सचिव दोषी

 Special Coverage News |  7 Dec 2019 11:44 AM GMT  |  बाराबंकी

जांच में पकड़ा गया घोटाला लाखो की हेराफेरी, मुख्य मत्स्य अधिकारी ने सौंपी जांच रिपोर्ट में प्रधान व सचिव दोषी
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बाराबंकी

रामनगर की ग्राम पंचायत किन्हौली में विकास कार्यो में घोटाले की शिकायत पर जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जांच में ग्रामीणो के आरोप सही पाए गए शौचालय और तालाब में भारी अनियमितता साबित हुई है। लाखो रुपया गबन के इस मामले में खूब खेल हुए। आखिकार जांच अधिकारी ने शुक्रवार को प्रधान और सचिव को दोषी ठहराकर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

पहली जांच में दबा दिया घोटाला

तहसील रामनगर की ग्राम पंचायत के सचिव और प्रधान पर ग्रामीणों रंजन मिश्रा आदि ने साक्ष्यों के साथ 13 बिंदुओं पर आरोप लगा कर विकास कार्यो में लाखों रुपया के घोटाला होने की पहली शिकायत 22 अगस्त 019 को जिला अधिकारी से की थी । इस मामले में गठित जांच टीम सहायक विकास अधिकारी पंचायत, सहायक विकास अधिकारी, अवर अभियंता ( ग्रा0अ0वि0 ) विकास खण्ड रामनगर के द्वारा संयुक्त रूप से कराई गई जिसमें प्रधान एवं ग्राम विकास अधिकारी को बरी कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बाद गांव वालों ने

दूसरी शिकायत दिनांक 4 जुलाई 19 को जिकाधिकारी डाक्टर आदर्श सिंह से ही मिलकर सबूतों और सपथी पत्रों के साथ शिकायत की मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने मुख्य मत्स्य अधिकारी विजय चौरसिया जो नोडल अधिकारी भी है को मामला सौंप कर 17 अगस्त 19 को पूरा करने को कहा था । लेकिन ये जांच टीम आदेश के 2 माह बाद तक गांव नही पहुची ।

इस पूरे मामले को मीडिया ने सुर्खी बनाई तो जांच टीम अगले ही दिन मौके पर पहुची। जांच अधिकारी के मुताबिक उन्होंने 13 बिंदुओं में सबसे पहले दर्जनों शौचालय देखा यंहा कुल 354 शौचालय का निर्माण हुआ है ज्यादातर अधूरे पाए गए । इसके बाद जो मनरेगा के अंतर्गत मंगतन तालाब 2010 में पूर्ण कराया गया था। उसी तालाब का नाम बदलकर मंगतही तालाब दिखा कर दुबारा बड़ी रकम निकाल ली गयी। के आरोप सही साबित हुए है। फिलहाल जांच टीम ने दो बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार करके ग्राम प्रधान और सचिव को दोषी माना है।

शिकायतकर्ता संतुष्ट नही

शिकायतकर्ता रंजन कुमार मिश्रा आदि ने बताया कि पंचायत में बहुत बड़ा घोटाला है को जांच में दबाया गया है महज शौचालय तालाब देखे जिसमे आरोप सही पाए गए है । इसी तरह शासकीय धन के दुरुपयोग के अन्य मामले

सहकारी समिति स्टोर से लवकुश के घर तक इंटरलॉकिंग कार्य अभिलेखों में दर्ज है। लेकिन सच्चाई ये है कि मौके पर लवकुश के घर से मैकू घर तक ही कार्य हुआ है। इस तरह स्थल बदलकर बड़ा घोटाला किया गया। अन्य विकास कार्यो में पुरानी ईंटे फर्जी विकास कार्यो के बिल के साथ पुरानी नालियों को नया निर्माण दिख कर खूब बंदरबांट किया गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि ह्यूमन पाइप क्रय दिखाकर कर धन निकाला गया जबकि पंचायत में कही पाइपों का इस्तेमाल नही हुआ। लोकनिर्माण विभाग के एक मार्ग मामले में विभाग से बिना एसओसी लिए इंटरलॉकिंग कगवा कर पूरी धनराशि का बंदरबांट कर लिया गया। आवास वितरण , खुली बैठक का न होना। अपूर्ण शौचालय निर्माण को पूर्ण दिखाकर लाखो का वारा न्यारा जैसी कई गंभीर मामले है जिसकी विधिवत जांच गांव वाले चाहते है।




उधर प्रधान पति लवकुश का कहना है कि पहली जांच में हम हम निर्दोष पाए गए है।

इस बाबत जांच अधिकारी मुख्य मत्स्य अधिकारी विजय चौरसिया ने बताया जांच में शौचालय अधूरे और तालाब में बड़ी अनियमितता पायी गयी जिसमे पंचायत सचिव और प्रधान जिम्मेदार माने गये है। पूरी रिपोर्ट डीपीआरओ को दी गयी है।

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