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सालो से वेतन नही मिलने से आत्मदाह करेंगे टीचर, प्रमुख सचिव से वार्ता तय

सालो से वेतन नही मिलने से आत्मदाह करेंगे टीचर, प्रमुख सचिव से वार्ता तय
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सदरूद्दीन अंसारी

बाराबंकी (उत्तर प्रदेश): केंद्र सरकार की मदरसा आधुनिकीकरण योजना सियासत की चक्की में गेंहू की तरह पीसी जा रही है । नतीजा ये है कि 66 माह से टीचरों को मानदेय नही मिल पाया है। परेशान टीचर लखनऊ के इको गार्डन में 55 दिन से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चित कालीन धरने पर बैठे है।

वर्षो से वेतन का मुह न देखने वाला ये समाज अब बड़े कर्जदार बनकर मुफलिसी के आंगन में खड़े सैकड़ो कर्मी आज भूखों मरने पर मजबूर है। इस योजना के लोग उस वक्त खुशी से झूम उठे थे जब भाजपा ने अपने घोषणा पत्र एलान किया था कि एक हाथ मे कम्प्यूटर और एक हाथ मे कुरान देखना चाहते है।

21 साल पुरानी है योजना

1993 की अटल सरकार में मानव संसाधन मंत्री रहे मुरली मनोहर जोशी ने इस मकसद से योजना बनाई थी कि मदरसों में दीनी तालीम के साथ आधुनिक विषय मैथ, अंग्रेजी, हिंदी, विज्ञान भी पढ़ाई जाए ताकि मदरसों के बच्चे भी बाहरी दुनिया से रूबरू हो सके । शिक्षक सिकन्द्र बाबा, अनंत प्रताप, कालीमुलल्ला, मुस्तकीम, फैसल, सफीक, अहमद, कहते है कि वक्त के साथ इस योजना पर राजनीति की तलवार चलती गयी । भाजपा हटी तो कांग्रेस ने मनमानी की अब भाजपा ध्यान देने किं जगह इसे मिटाने पर आमादा हो गयी।

प्रदेश में 25 हजार 5 सौ टीचर है नियुक्त

सूबे में करीब साढ़े पच्चीस हजार टीचर बिना मानदेय काम करने को मजबूर है। बाराबंकी जनपद में जंहा ये योजना लागू है वह 178 मदरसे है। जिसमे 390 टीचर नियुक्त है। खास बात ये है कि इस योजना में 40% गैर मुस्लिम टीचर मदरसों में तैनात है। मानदेय भुकतान में विभाग ने लाट सिस्टम बनाया है। लाट नम्बर 273 वालो को 66 माह 456 वालो को 54 माह से और 1506, 672, 2108,849,1891 लाट वाले को 36 माह के अलावा 1446 वाले टीचरों को 38 माह से मानदेय नही दिया गया है। यूपी में 8554 मदरसों में 25 हजार 5 सौ टीचर नियुक्त है। जो पूरी तरह टूट कर बिखर चुके है।

टीचरों का फूटा आक्रोश

शानिवार को सिकन्दर बाबा के नेतृत्व में सैकड़ो टीचरो ने इको गार्डन में जबरदस्त हंगामा किया रैली निकाली मजबूर हुआ प्रसाशन मजिस्ट्रेड भेज कर साशन से बात कराना सुनिश्चित कराया जो मंगलवार को वार्ता होगी। लखनऊ के इको गार्डन में धरना दे रहे है। लोगो का कहना है कि कोई सुनवाई नही हो रही है। घुट घुट कर मरने से अच्छा है । आरपार की लड़ाई छेडकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा । इसकी रणनीति बन चुकी है। विधान सभा के सामने आत्मदाह करने के एलान से हुकूमत में बैठे जिम्मेदार कारिंदों में अब फिक्र जागी है।

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