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इस उद्धरण में दो बातें साफ़ हैं- हत्‍यारों की पहचान और हत्‍या की पृष्‍ठभूमि व सुनियोजित साजिश

इस उद्धरण में दो बातें साफ़ हैं- हत्‍यारों की पहचान और हत्‍या की पृष्‍ठभूमि व सुनियोजित साजिश
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Subodh Kumar Singh
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पूरे चौबीस घंटे बाद। इन्‍हीं चौबीस घंटों में बुलंदशहर पूरे देश तक पहुंचा है। कल रात तक लोगों को इस घटना के बारे में बहुत ज्‍यादा पता नहीं था। आज का पूरा दिन खबर और छिटपुट प्रोपगंडा के बीच झूलता रहा। दिन भर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं देखता रहा। तकरीबन एक ही तरह की प्रतिक्रिया। हत्‍यारों की पहचान, साजिश की थियरी और मारे गए इस्‍पेक्‍टर के लिए संवेदना से युक्‍त। अब तक सोशल मीडिया पर ''हिंदू भीड़ के हाथों हिंदू इंस्‍पेक्‍टर के मारे जाने'' के नैरेटिव का मुकम्‍मल काउंटर स्‍थापित नहीं हो सका है। मुझे लगता है अगले दो दिन में यह हो जाएगा। चौराहे की फुसफुस से इसका कुछ अंदाज़ा लगा है।

आम रातों के मुकाबले आज सामूहिक नहीं, वन टु वन बातें हो रही थीं। मुझसे भी किसी ने कोने में ले जाकर पूछा- ''आपको क्‍या लगता है, कोई साजिश वगैरह है क्‍या?'' ''मैंने तो फॉलो नहीं किया इस खबर को, दूसरे कामों में लगा हुआ था... आप बताइए, क्‍या चल रहा है मार्केट में।'' इसके बाद की बात जस का तस रख रहा हूं: ''इंस्‍पेक्‍टर ठीक नहीं था। गंदा आदमी था। मने जहां जहां गाय काटी जाती थी, वहां से पैसा लेकर अपनी जेब में रख लेता था। जब से आया था, पुलिस वाले बहुत नाराज़ थे उससे। सबकी कमाई बंद हो गई थी। बजरंग दल वाला और पुलिस वाला इसीलिए मिल के मारा है। ऐसा सुनने में आया है। फलाने साहब बता रहे थे। ढेकाने भी आए थे। उनका पुलिस महकमे में बढि़या पहुंच है। कह रहे थे दादरी वाले मामले में भी यही दरोगा था। पहले से निशाने पर था। सब मिल के मारा है।''

इस उद्धरण में दो बातें साफ़ हैं- हत्‍यारों की पहचान और हत्‍या की पृष्‍ठभूमि व सुनियोजित साजिश। ये दोनों बातें आज दिन भर चली हैं, एफआइआर में भी वर्णित हैं, इसलिए इन्‍हें झुठलाना संभव नहीं। असल काउंटर दरोगा के ''ठीक नहीं'' होने में है। दरोगा ''ठीक नहीं'' था, इस प्रस्‍थापना से दो निष्‍कर्ष निकलते हैं: उसे मारा जाना ''ठीक'' है और उसे मारने वाले भी ''ठीक'' हैं। देखिए, कितनी आसानी से नैरेटिव उलट गया। अब कल को अगर गिरफ्तार लोगों को बेल मिलती है और कोई नेता जाकर उन्‍हें माला पहना देता है, तो काउंटर-नैरेटिव ही एविडेंस बन जाएगा। ''ठीक'' हिंदू और ''बेठीक'' हिंदू का एक और पाला खिंच जाएगा।

है किसी के पास इसका जवाब?

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