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UP पुलिस के इस अधिकारी की बजह से बची दो बच्चियों की जान, खुद के पैसे से कराया इलाज!

काश यूपी पुलिस में इस तरह के अधिकारी हो जायं तो किसी भी घायल व्यक्ति की मौत नहीं होगी?

 Arun Mishra |  11 Sep 2018 8:13 AM GMT  |  चंदौली

UP पुलिस के इस अधिकारी की बजह से बची दो बच्चियों की जान, खुद के पैसे से कराया इलाज!

चंदौली : जिले के सीओ सदर त्रिपुरारी पाण्डेय ने एक बार फिर एक मिशाल पेश कर अपना ही नहीं बल्कि अपने पुलिस विभाग और माँ बाप का नाम रोशन कर दिया है। उन्होंने एक एक्सीडेंट में घायल दो बच्चियों को तुरंत अस्पताल भिजवाया। जिसके बाद उनको इलाज के लिए BHU के ट्रामा सेंटर ले जाया गया। जहाँ उन बच्चियों के माँ बाप पर इलाज के लिए पैसा नहीं था तो डॉ. ने इलाज करने से मना कर दिया और कहा कि पहले पैसे जमा करवाओ तभी कुछ होगा। उसके बाद सीओ त्रिपुरारी पाण्डेय ने इलाज में लगभग डेढ़ लाख रुपया खर्च किया। उनके इस कार्य से पुलिस महकमा की जनपद ही नहीं प्रदेश में प्रशंसा हो रही है।

क्या था मामला

सकलडीहा कोतवाली के नरैना गांव के समीप देर शाम गांव की संजना कुमारी 5 वर्ष पुत्री राजेन्द्र कुमार व साथ मे अंतिमा कुमारी पुत्री जयराम 6 वर्ष दोनों सड़क के किनारे देर शाम शौच करने गई हुई थी। इस दौरान गांव में ही जा रहे मोटरसाइकिल सवार युवक की मोटरसाइकिल असंतुलितहो गयी और शौच करने जा रही बच्ची के ऊपर गिर गई जिससे दोनों बच्ची घायल हो गई।




वहीं ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर बाइक सवार व घायल बच्ची को तत्काल अपने निजी वाहन से जिला अस्पताल के लिये लेकर चले गए। वही मौके पर पहुचे कोतवाल लक्ष्मण पर्वत ने अपने कोतवाली वहां से संजना कुमारी को सकलडीहा सामुदायिक ले आई जहां इलाज के दौरान डॉ. धीरेंद्र कुमार ,व संतोष सिंह ने जिला अस्पताल पर रिफर कर दिया।




इस दौरान सूचना मिलते ही मौके पर सीओ त्रिपुरारी पाण्डेय पहुच कर घायल संजना को लेकर जिला अस्पताल चले गए। परिवार की स्थिति काफी खराब देख कर फिर तत्काल BHU के लिए रेफर कर दिया गया साथ मे पैसे की व्यवस्था करा कर सीओ ने फोर्स व परिवार को साथ भेजा। अब तक कुल 1लाख 35 हजार खर्च कर दोनों को बचाया गया। यह खर्चा सीओ त्रिपुरारी पाण्डेय के द्वारा उठाया गया है। उनके इस कार्य से क्षेत्र में पुलिस की बड़ी प्रशंसा हो रही है।




एक बच्ची संजना कुमारी पुत्री राजेंद्र कुमार और अंतिमा कुमारी पुत्री जयराम अब स्वस्थ है। इस पूरे इलाज का अगर श्रेय किसी को जाता है तो पुलिस उपाधीक्षक त्रिपुरारी पाण्डेय को जाता है। त्रिपुरारी पाण्डेय के इस नेक काम से यूपी पुलिस का नाम भी रोशन हुआ। काश यूपी पुलिस में इस तरह के अधिकारी हो जायं तो किसी भी घायल व्यक्ति की मौत नहीं होगी।


कौन है त्रिपुरारी पांडेय?

आज़मगढ़ जिले के भागमलपुर कस्बे के स्व उमापति पाण्डेय के घर संन 1967 में जन्में त्रिपुरारी पाण्डेय पुलिस विभाग में 1987 में नियुक्त हुए। उपनिरीक्षक से भर्ती त्रिपुरारी पाण्डेय अपनी एक अच्छी कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। 2005 में इनको इंस्पेक्टर बनाया गया तो 2015 में डिप्टी एसपी के पद पर नियुक्ति हुई। इस नियुक्ति के दौरान अपनी सोशल पुलिसिंग के तहत कार्य करने की मन में इच्छा जाग्रत रही जिसके तहत प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाना ही मुख्य उद्देश्य रहा।




त्रिपुरारी पाण्डेय पहले भी इस तरह के कार्य करते रहे हैं। एक बार चंदौली में बिजली विभाग की लापरवाही से एक बच्चे की मौत हो गई थी। गुस्साए लोगों को समझाने पहुंचे सीओ सदर त्रिपुरारी पाण्डेय खुद घटनास्थल की तस्वीर देख भावुक हो गए। उन्होंने ना सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक मदद की, बल्कि खुद बच्चे को गोद मे उठाकर पोस्टमार्टम करवाया।

त्रिपुरारी पाण्डेय ने बताया कि इन सब बातों के लिए हमारे उच्चाधिकारी भी फिकरमंद है। हमारे पुलिस महानिदेशक की मंशा और पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कुमार सिंह का हर समय साथ और आशीर्वाद ही हमको यह प्रेरणा देता है। हमारे एसपी साहब का निर्देश है कि पीड़ित को हर संभव न्याय उसके घर बैठे ही मिलना चहिये ताकि जनता में पुलिस की छवि बेहतर प्रस्तुत हो सके। इसी मानवता के तहत हमको लगा कि सबसे पहले इन बच्चियों का इलाज कराया जाय चाहे जो भी हो और हमने आपनी टीम से एक साथी सिपाही को इस कार्य पर लगाया। इन बच्चियों के इलाज में हुए खर्चे की चिंता नहीं है मुझे ख़ुशी इस बात की है कि उपर वाले की कृपा से आज वो सुरक्षित है। दो घरों में मुस्कान दौड़ रही है। मैंने पीएम ओर सीएम के बेटी बचाओ बेटी पढाओ नारे के तहत कार्य किया। भगवान ने भी हमारी पुकार सुन ली और वेटियाँ सुरक्षित है और स्वस्थ है।



पुलिस अधीक्षक चंदौली ने क्या कहा?

पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बताया कि अब सोशल पुलिसिंग का दौर आ चुका है, इस दौर में अच्छे करने वालों के साथ जनता भी खड़ी दिखती है। मैंने अपने कार्यकाल के दौरान नक्सल प्रभावित इलाके में स्किल डवलपमेंट के तहत सेना और अर्धसैनिक बल की भर्ती कराई। इलाके के युवाओं को सीआरपीएफ से ट्रेनिंग करवाई कुछ युवाओं को नाई, धोबी और कई तरीके के काम भी सिखाये गए उनको काम करने के लिए सामान की किट भी उपलब्ध कराई गई। इससे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में भी युवाओं को अपना जीवन बदलने की एक दिशा मिली रोजगार मिला इसमें हमारे सहयोगी सीओ सदर त्रिपुरारी पाण्डेय का काफी सहयोग रहता है। वो एक नेकदिल अधिकारी है। हमेशा पीड़ित और गरीब को न्याय दिलाना मेरी प्राथमिकता को सिरे चढाते है। मेरा उद्देश्य हर पीड़ित को घर बैठे न्याय दिलाना है, पीड़ित को थानों के चक्कर कटवाना हमारा काम नहीं है पुलिस को उनकी समस्या का निस्तारण उनके साथ मिलकर करना मेरी प्राथमिकता है।

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