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बबली कोल ने कैसे रखा आतंक की दुनिया मेँ कदम, क्या था इसके पीछे रहस्य कि बना दस्यु सरदार ?

किया कुछ ऐसा कि बबली ददुआ से भी खतरनाक हो गया

 Special Coverage News |  17 Sep 2019 5:38 AM GMT  |  चित्रकूट

बबली कोल ने कैसे रखा आतंक की दुनिया मेँ कदम, क्या था इसके पीछे रहस्य कि बना दस्यु सरदार ?

चित्रकूट,आप ने फिल्म शोले तो देखी हैं ना जिसमे डकैत गब्बर सिंह का डायलॉग हैं यहाँ से पच्चास पच्चास कोस दूर जब कोई बच्चा रोता है तो माँ कहती हैं कि सो जा बेटा नही तो गब्बर आ जायेगा। वो फ़िल्म थी ये चित्रकूट के इलाके में दहशत की हकीकत थी यहां कें गब्बर कें रूप मेँ जाना जाता था बबली कोल जिसका आलम यह कि चाहे पुलिस हो, नेता हो, या आम आदमी कोई नही चाहता था कि बबली कोल की परछाई उन पर पड़े । महेज 35 साल कि उम्र लेकिन दो राज्यो की सरकार ने उस डकैत पर सात लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था शायद इतना इनाम मौजूदा वक्त में देश के किसी डकैत पर नही था।

लेकिन कर्मो का फल ही समझिए की गब्बर कोई भी हो आतंक कितना भी हो मरना तय हैं । यही हुआ इस चित्रकूट कें गब्बर यानि बबली कोल का जिसे सतना पुलिस कें एडी थानो कें प्रभारियों ने अपने मातहतों कें साथ ज़िले कें पुलिस कप्तान कें नेत्रत्व मेँ मार गिराने मेँ सफलता हासिल की हैं ।

बबली कोल ने कैसे रखा आतंक की दुनिया मेँ कदम, क्या था इसके पीछे रहस्य कि बना दस्यु सरदार ?

साल 1989 में रामचरन के घर मे बेटा पैदा हुआ नाम रख्खा गया बबली। बबली ने आठवीं तक की पढ़ाई चित्रकूट में ही की उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए बाहर चला गया बाहर ज्यादा दिन टिका नही वापस लौट आया। 2007 में तमंचा रखने और ठोकिया गैग की मदद करने के आरोप में यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था और पेशी मेँ जाते वक्त यह पुलिस सुरक्षा को भेद फरार हो लिया

4 अगस्त 2008 को ठोकिया को एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था । ये वो वक्त था जब पाठा के जंगलों में ठोकिया का राज हुआ करता था लेकिन ठोकिया के मारे जाने के बाद जो नाम था वह था स्वदेश पटेल उर्फ बलखड़िया का जिसने ठोकिया की जगह अपना वर्चस्व जमाया और अपराध करना सुरू कर दिया । साल 2012 मेँ शादी कें एक कार्यक्रम मेँ बबली की मुलाकात बलखड़िया से हुई ना जाने बलखडिया को इसमेँ क्या दिखा की बबली को अपनी गैग में शामिल करने को कह दिया और यह बलखड़िया गैग का शार्प सूटर हो गया।

किया कुछ ऐसा कि बबली ददुआ से भी खतरनाक हो गया

बलखड़िया गैग में शामिल होने के बाद साल 2012 मे बबली ने दो लोगो की हत्या कर दी और ये पहला मौका था जब बबली का नाम रजिस्टर पर आया दो साल हो गये टिकरी गाँव मे बबली ने पाँच और लोगो की हत्या कर दी ये घटना बेहद नस्कर थी इस घटना में जिन पाँच लोगो को मारा गया उसकी नाक काटी गयी थी उन्हे गोलियां मारी गयी थी उनके बाद पेट्रोल डाल कर जला दिया गया था बबली के खिलाफ लोग बोलने से कतराने लगे ये वो घटना थी जिसमे बबली कोल पर एक लाख का इनाम घोषित कर दिया गया। 31 दिसम्बर की रात खमरिया के जंगलों में दो लोगो की हत्या कर दी।इसके बाद मानिकपुर इलाके के निही चिरैया के गाँव मे राजू पॉल नाम के सक्स की हत्या की राजू पाल पहले बबली का मुखबिर था बाद में मध्यप्रदेश STF के लिए मुखबिरी करने लगा था । जब बबली को पता चला तो उसने राजू को मार दिया इसलिए मध्यप्रदेश के एक बहुत बड़े इलाके में उसका वर्चस्व हो गया और दहसत हो गयी ।

आकड़ो की बात करे तो 2012 से 2017 के बीच 70 लोगो की हत्या की उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में हत्या और हत्या की कोशिश, डकैती और वसूली कें 100 से ज्यादा मामले दर्ज थे।

सतना पुलिस की चहुँ ओर वाहवाही

यूँ तो विंध्य की तराई मेँ पिछले 4दशक से भी अधिक समय से दस्यु गेंगो का बोलबाला रहा हैं किन्तु बबली ददूआ कें बाद सब से महंगा इनामी डकेत माना जाता रहा हैं इसके दरिंदगी का एक चेहरा यह भी था ईसकी धमक से पूरा तराई व बीहड़ का इलाका दहल जाता था । जिसे दबोचने कें लिए दोनो राज्यो कि सरकारे पानी की तरह पैसा बहा रही थी उक्त डकेत को मारने कें लिए दोनो ही राज्यो की पुलिस ना जाने कितनी योजनाये बना अभियान चला रहे थे किन्तु यूपी पुलिस को करारा झटका दें कर आखिर कार सतना पुलिस ने बाजी मार ही दी और अपने कुशल मुखबिर तंत्र कें बदौलत आतंक का यह अध्याय ही बंद कर दिया जिसका नाम कभी बबली हुआ करता था।

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