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बंगाली बाबा बनकर ठगी करने वाले गिरोह के सरगना सहित 4 अभियुक्त गिरफ्तार

पुलिस ने मोबाइलों के जरिये डाटा खंगाला तो कई चौंकाने वाले तथ्यों और बैंक अकाउंट का पता चला

 Special Coverage News |  15 Feb 2019 12:33 PM GMT  |  दिल्ली

बंगाली बाबा बनकर ठगी करने वाले गिरोह के सरगना सहित 4 अभियुक्त गिरफ्तारघटना का खुलासा करते एसपी ग्रामीण अरविंद मौर्य

गाजियाबाद : बंगाली बाबा बनकर लोगों के इलाज के नाम पर है भय दिखा कर ठगी करने वाले गिरोह का गाजियाबाद पुलिस ने खुलासा किया है। जिनके कब्जे से ठगी करने में प्रयुक्त 13 अदद मोबाइल, बैंक आफ बड़ोदा की दो पासबुक व दो चेकबुक, इलाहाबाद बैंक और आडीबीआई बैंक की पासबुक व चेकबुक आरियंटल बैंक आफ कामर्स, एचडीएफसी बैंक, आईसीआसीआई बैंक की पर्चियों के अतिरिक्त चार वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस व 1460 रुपये बरामद किए गए है।

इस घटना का खुलासा तब हुआ जब इसी तरह इनके जाल में संभल में बहजोई की रहने वाली महिला कांस्टेबल अनीता भी फंस गई। वह फैफड़ों की बीमारी से परेशान थी। इन लोगों ने उसे पूरी तरह ठीक करने का झांसा दिया और उससे अपने खाते में कई बार में तीन लाख 33 हजार 200 रुपये ट्रांसफर करा लिए। ईलाज नहीं होने पर अनीता ने मुरादनगर थाने पर मुकदमा दर्ज करा दिया।




कैसे फंसाते हैं मासूम लोगों को ?

पूछताछ में अभियुक्त गणों द्वारा अपने काम करने के तरीके के बारे में बताया कि हम लोग फर्जी बंगाली बाबा बनकर पम्पलेट छपवा कर उसमें विज्ञापन चलाते हैं। जिसमें 'आल इंडिया खुला चैलेंज शक्ति चमत्कार देखें' दो घंटे में हंड्रेड परसेंट समाधान गारंटीड स्पेसलिस्ट- मनचाहा प्यार, वशीकरण, प्रेम विवाह, कारोबार, विदेश यात्रा, संतान प्राप्ति, ग्रह कलेश, शैतान, जादू टोना, किया कराया, भूत प्रेत, जुआ सट्टा, कैरियर में रुकावट, मियां बीवी के झगड़े, बीमारी में दवा न लगना, आदि का प्रचार करते हैं। पम्पलेट हम लोग ट्रेनों में बसों के ऊपर अन्य सार्वजनिक स्थानों के माध्यम से करते हैं। अखबारों में विज्ञापन छपवाते थे। पम्पलेट पर कई मोबाइल नंबर देते हैं जो फर्जी आईडी पर खरीदा हुआ होता था। तथा फर्जी आईडी पर ही बैंकों के अकाउंट खुलवाए गए थे। इसमें पीड़ितों से उनकी समस्या के समाधान के एवज में पैसे मंगवाते थे।

बताया गया कि ये लोग फर्जी आईडी पर सिम लेते थे और ठगी करने के बाद सिम बंद कर देते थे। अलग अलग शहरों में अलग अलग नंबर लेते थे। जिसके चलते ठगी का शिकार इन तक नहीं पहुंच पाते थे। पुलिस ने मोबाइलों के जरिये डाटा खंगाला तो कई चौंकाने वाले तथ्यों और बैंक अकाउंट का पता चला। बैंक एकाउंट की स्टेटमेंट के जरिये पता चला कि ये लोग 70-80 लाख रुपये की ट्रांजेक्शन बैंक करा चुके हैं।

इस कार्य में यह लोग लाखों रुपए ऐड एजेंसियों को दे देते हैं। इस कार्य के लिए इनके द्वारा जो फर्जी दस्तावेज लगाकर बैंक अकाउंट खोले गए थे। उस में करोड़ों रुपए के लेन-देन हुए। इनका गिरोह अंतरराज्यीय है। जिनकी ठगी के शिकार के अलग अलग शहरों के लोग हुए हैं। बताया गया कि ये गिरोह 2015 से इसकाम को पूरे देश में अंजाम दे रहा था।

आरोपियों के नाम शौकीन, नफीस, वसीम और साहिल है। चारों मुरादनगर के ही रहने वाले हैं। इनके महंगे विज्ञापन पर यकीन करके शिकार इन के जाल में आसानी से फंस जाया करता था। और अपना सब कुछ गंवा दिया करता था।

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