Top
Begin typing your search...

एक विवाह ऐसा भी, बेटी का कन्यादान कर उसी मंडप में 'मां' ने लिए सात फेरे

यूपी के जनपद गोरखपुर में में मां और बेटी दोनों का विवाह एक ही मंडप से संपन्न हुआ।

एक विवाह ऐसा भी, बेटी का कन्यादान कर उसी मंडप में मां ने लिए सात फेरे
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

विवाह तो आपने बहुत देखे होंगे और सुने भी होंगे लेकिन हम जिसके बारे में आपको बताने जा रहे हैं ऐसा शायद ही आपने सुना या देखा होगा। जी हाँ, ये आपको पढ़ने में भले ही अजीब लगे लेकिन सत्य है. यूपी के जनपद गोरखपुर में में मां और बेटी दोनों का विवाह एक ही मंडप से संपन्न हुआ। मां बेला देवी ने पहले बेटी का कन्यादान कर अपना फर्ज निभाया। इसके बाद खुद शादी का जोड़ा पहनकर उसी मंडप में अपने जीवनसाथी के साथ बैठीं।

बेटी की शादी के बाद मां बेला ने लिए सात फेरे

गोरखपुर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 63 जोड़ों की एक साथ शादी हुई। इस शादी की महफिल का दिल मां और बेटी ने जीत लिया। पिपरौली ब्लॉक की मां और बेटी ने भी यहां अपने-अपने जीवन साथी के साथ सात फेरे लिए।बताते चलें मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना तहत पिपरौली ब्लॉक की बेला देवी अपने पांच बच्चों में से चार की शादी कर चुकी हैं। इसी योजना में उनकी छोटी बेटी इंदु की शादी पाली के राहुल से हुई। खास बात यह रही कि बेटी का कन्यादान करने के बाद मां ने इसी मंडप में शादी की। 55 साल के जगदीश के साथ बेला देवी का विवाह हुआ। उम्र के आखिरी पड़ाव में जीवन साथी चुनकर दोनों ने जिंदगी की नई शुरुआत की है।

बेटे-बेटियों की शादी के बाद अकेले जिंदगी गुजारना बेला देवी के लिए आसान नहीं था। बेला और उनके जीवनसाथी जगदीश ने बच्चों और परिवार वालों के सलाह-मशविरा करने के बाद शादी का फैसला लिया। मां-बेटी की इस शादी की हर तरफ चर्चा हो रही है।

25 साल पहले विधवा हुईं बेला को मिला दूल्हा

पिपरौली ब्लॉक की कुरमौल निवासी बेला देवी के पति की मौत 25 साल पहले ही हो गई थी। पहले पति से बेला के दो बेटे और तीन बेटियां हैं। 25 साल से अकेले जिंदगी गुजार रहीं बेला ने परिवार की सलाह के बाद अपने ही देवर से शादी रचाई है। पिपरौली ब्लॉक के कुरमौल निवासी जगदीश तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं।

खेतीबाड़ी से अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले 55 वर्षीय जगदीश अविवाहित ही जिंदगी गुजार रहे थे। जब सामूहिक विवाह कार्यक्रम के बारे में दोनों को पता चला तो इसी मंडप में एक-दूजे के होने का फैसला कर लिया। बेटी की शादी होने के बाद उन दोनों ने भी अपने विवाह की रस्मों को पूरा किया। शादी में बीडीओ डॉक्टर सीएस कुशवाहा साक्षी के तौर पर मौजूद रहे।

Arun Mishra

About author
Sub-Editor of Special Coverage News
Next Story
Share it