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क्या गोरखपुर को जीत पायेंगे योगी या फिर से हार जायेंगे!

योगी ने वाहिनी की कमान अब अपने ख़ास पी.के. मल्ल को सौंप दी है और कई बार इसके कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर उन्हें बीजेपी प्रत्याशी रविकिशन के लिए जुटा दिया है।

 Special Coverage News |  14 May 2019 2:44 AM GMT  |  गोरखपुर

क्या गोरखपुर को जीत पायेंगे योगी या फिर से हार जायेंगे!

कुमार तथागत

पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपने मज़बूत क़िले गोरखपुर को बचाने के लिए योगी आदित्यनाथ ने सब कुछ दाँव पर लगा दिया है। सोमवार से चुनाव तक योगी हर रात गोरक्षनाथ मठ में गुजारेंगे। अगले पाँच दिन में 19 जनसभाएँ, कार्यकर्ताओं की एक दर्जन बैठकें लेंगे और हर एक पेंच सुलझाएँगे। फूट कर बिखर चुकी अपनी सेना हिन्दू युवा वाहिनी को फिर से संजो कर योगी ने गोरखपुर का क़िला बचाने में लगा दिया है।

दरअसल, उप-चुनाव में झटका खा चुके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बार गोरखपुर में कोई मौक़ा छोड़ना नहीं चाहते हैं। उत्तर प्रदेश में सातवें और आख़िरी चरण में जिन लोकसभा सीटों पर 19 मई को मतदान होना है उनमें योगी का अपना क़िला गोरखपुर शामिल है। एक उप-चुनाव हार जाने के बाद योगी का यह क़िला उतना महफ़ूज़ नहीं माना जा रहा है। ऊपर से बीजेपी प्रत्याशी को लेकर असंतोष ने और भी परेशानी पैदा कर दी है। शायद इन्हीं सबको ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने अब पूरा एक हफ़्ता वहीं गुज़ारने का फ़ैसला किया है। इस हफ़्ते योगी गोरखपुर और आसपास के इलाक़े में ही 19 जनसभाओं को संबोधित करेंगे, जबकि कार्यकर्ताओं के साथ एक दर्जन बैठकें करेंगे। प्रदेश बीजेपी नेताओं का कहना है कि सोमवार से लेकर मतदान तक योगी गोरखपुर में अपने मठ गोरक्षनाथ पीठ में ही हर रात गुज़ारेंगे और इस दौरान रोज सभाएँ, बैठक और प्रचार करेंगे।

अंतिम चरण में गोरखपुर मंडल के तहत आने वाली सभी छह लोकसभा सीटों पर मतदान होगा। ये सीटें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव वाली जानी जाती हैं। पिछले लोकसभा चुनावों में इन सभी सीटों पर बीजेपी ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी। सातवें चरण में 19 मई को गोरखपुर मंडल में गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर, सलेमपुर, बाँसगाँव और देवरिया सीटों पर मतदान होना है। इसके अलावा इसी दिन वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर, बलिया और घोसी की सीटों पर भी वोट डाले जाएँगे।

उप-चुनावों से सबक़ मिलने के बाद ख़ुद संभाली कमान

क़रीब एक साल पहले गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उप-चुनावों में मिली हार के बाद अब योगी का ख़ास ध्यान अपनी सीट पर है। पिछले साल हुए उप-चुनावों में बीजेपी प्रत्याशी उपेंद्र शुक्ला को इस सीट पर सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद के हाथों मात मिली थी। बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ख़ुद इस सीट को खाली किया था और यहाँ से उनकी और गोरक्षनाथ मठ की प्रतिष्ठा जुड़ी थी। इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस सीट पर योगी के पसंद के उम्मीदवार भोजपुरी स्टार रविकिशन शुक्ला को खड़ा किया है। बीते एक पखवाड़े में योगी गोरखपुर में दो दर्जन सभाएँ कर चुके हैं और ख़ुद ही रविकिशन शुक्ला को चुनाव प्रचार अभियान की कमान संभाल ली है।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि योगी अंतिम चरण के चुनाव प्रचार की देखरेख गोरक्षनाथ मठ में रहते हुए ही करेंगे। बंगाल और बिहार की बची हुई सीटों पर भी चुनाव प्रचार करने योगी गोरखपुर से ही जाएँगे।


योगी की ही हिन्दू युवा वाहिनी बनी है चुनौती

गोरखपुर में योगी के लिए एक और चुनौती ख़ुद उनके बनाए संगठन हिन्दू युवा वाहिनी के लोग भी हैं। कभी बीजेपी के समानांतर योगी ने वाहिनी का गठन किया था। योगी के ख़ास और हिन्दू युवा वाहिनी के पूर्व में अध्यक्ष रहे सुनील सिंह अब बाग़ी हो चुके हैं और गोरखपुर में अपने समर्थकों के साथ बीजेपी के ख़िलाफ़ गठबंधन प्रत्याशी का प्रचार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने वाहिनी को भंग कर दिया था और सभी पदाधिकारियों को हटा दिया था। सुनील सिंह ने ख़ुद भी गोरखपुर से नामांकन दाखिल किया था। तकनीकी कारणों से उनका नामांकन रद्द हो गया है और अब वह मुख्यमंत्री योगी को इसका दोषी बताते घूम रहे हैं। हिन्दू युवा वाहिनी का अध्यक्ष रहते योगी से बग़ावत करने पर सुनील सिंह पर कई मुक़दमे लगाकर उन्हें आठ महीने जेल में रखा गया था। आज सुनील पूरे पूर्वांचल में घूम-घूम कर ख़ुद पर हुए अत्याचार की कहानी सुना रहे हैं और सपा-बसपा गठबंधन को जिताने की अपील कर रहे हैं।

गोरखपुर चुनाव में वाहिनी का महत्व जानते हुए योगी ने फिर से इस संगठन को पुनर्जीवित करते हुए उसे काम पर लगा दिया है। योगी ने वाहिनी की कमान अब अपने ख़ास पी.के. मल्ल को सौंप दी है और कई बार इसके कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर उन्हें बीजेपी प्रत्याशी रविकिशन के लिए जुटा दिया है।

निषाद वोटों को साधने के लिए प्रवीण निषाद को लगाया

गोरखपुर में बीजेपी की जीत में सबसे बड़ा रोड़ा बड़ी तादाद में यहाँ केवट बिरादरी के वोटों की मौजूदगी है। गठबंधन ने इस बिरादरी के मज़बूत प्रत्याशी रामभुवाल निषाद को खड़ा किया है जो मुसलिम, दलित और यादव वोटों के साथ कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं।

बीते साल हुए उप-चुनावों में बीजेपी को हराने वाले प्रवीण निषाद को पार्टी में शामिल कर योगी ने गोरखपुर की पड़ोस की सीट संतकबीरनगर से टिकट दिया है। संतकबीरनगर में रविवार को मतदान ख़त्म हो जाने के बाद प्रवीण निषाद को भी गोरखपुर में प्रचार में लगा दिया गया है। गोरखपुर में गठबंधन प्रत्याशी रामभुवाल निषाद की पकड़ सजातीय वोटों पर कमज़ोर करने के सासंद प्रवीण निषाद का उपयोग किया जा रहा है। हालाँकि इसके मुक़ाबले के लिए सपा ने इसी इलाक़े के बड़े केवट नेता जमुना निषाद और राजमति निषाद को अपने पाले में लाने में सफलता पायी है।

साभार

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