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नमामि गंगे LIEV: नेशनल गंगा काउंसिल की बैठक शुरू, पीएम नरेंद्र मोदी मौजूद

गंगा और इसकी सहायक नदियों का प्रदूषण खत्म करने और इन्हें पुनर्जीवित करने के लिए 2014 में केंद्र सरकार ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट शुरू किया था।

 Sujeet Kumar Gupta |  14 Dec 2019 6:11 AM GMT  |  कानपुर

नमामि गंगे LIEV: नेशनल गंगा काउंसिल की बैठक शुरू, पीएम नरेंद्र मोदी मौजूद
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कानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'नमामि गंगे' प्रोजेक्ट की समीक्षा के लिए कानपुर पहुंच गए हैं. एयरपोर्ट पर सीएम योगी और यूपी बीजेपी के नेताओं ने पीएम मोदी का स्वागत किया. पीएम मोदी गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के प्रयासों के संबंध में मंथन करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शनिवार) कानपुर में नेशनल गंगा काउंसिल की बैठक में शामिल होंगे.

नमामि गंगा प्रोजेक्ट पर होने वाली बैठक में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत शामिल होंगे. पहले बिहार के सीएम नीतीश कुमार को भी बैठक में आना था लेकिन उनकी जगह डिप्टी सीएम सुशील मोदी बैठक में शामिल होंगे.

वहीं इस बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के अलावा गंगा किनारे स्थित सभी पांच राज्यों के कई मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव भी मौजूद रहेंगे. गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए अभी तक जो भी कार्य हुए हैं, पीएम मोदी उनकी समीक्षा करेंगे. इसके बाद आने वाले समय में गंगा को स्वच्छ और उसके किनारों को सुंदर बनाने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है, इसकी कार्ययोजना भी बनेगी. दोपहर में पीएम मोदी क्रूज से गंगा दर्शन भी करेंगे।

बैठक में पांच राज्यों यूपी, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पं बंगाल में गंगा की स्थिति को लेकर मंथन किया जाएगा। इन प्रदेशों में गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए अभी तक जो भी कार्य हुए हैं, मोदी उनकी समीक्षा करेंगे। इसके बाद आने वाले समय में गंगा को स्वच्छ और उसके किनारों को सुंदर बनाने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है, इसकी कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी।

बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी सभी मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और अधिकारियों के साथ अटल घाट से मोटर बोट के जरिए गंगा का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे सीसामऊ नाले के पास खड़े होकर सेल्फी लेंगे। सेल्फी लेने की वजह यह है कि लंबे समय से गंगा में गिरने वाले सीसामऊ नाले को मोड़ने में केेंद्र सरकार को सफलता मिली है।

गंगा सबसे ज्यादा कानपुर में प्रदूषित

2071 किमी भूभाग में प्रवाहित होने वाली गंगा नदी का कानपुर में पड़ने वाला हिस्सा सबसे अधिक प्रदूषित माना जाता है। कानपुर में होने वाली इस बैठक से सरकार संदेश देना चाहती है कि वह नमामि गंगे परियोजना के प्रति गंभीर है। गंगा और उसकी सहायक नदियों को अविरल बनाना भाजपा के एजेंडे में शामिल है। प्रधानमंत्री यहां नमामि गंगे परियोजना को लेकर कुछ घोषणाएं कर सकते हैं।

28 करोड़ की लागत से सीसामऊ नाला साफ किया गया

कानपुर में 128 साल पुराना सीसामऊ नाला एशिया में सबसे बड़ा है। अंग्रेजों ने शहर के गंदे पानी की निकासी के लिए इसका निर्माण किया था। करीब 40 मोहल्लों से सीसामऊ नाले से रोजाना 14 करोड़ लीटर प्रदूषित पानी गंगा में गिरता था। अब नमामि गंगे परियोजना के तहत 28 करोड़ रुपए की लागत से इसे साफ किया गया है। इसे डायवर्ट कर वाजिदपुर और बिनगवां ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जा रहा है।

क्या है नमामि गंगे प्रोजेक्ट?

गंगा और इसकी सहायक नदियों का प्रदूषण खत्म करने और इन्हें पुनर्जीवित करने के लिए 2014 में केंद्र सरकार ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट शुरू किया था। इस परियोजना की जिम्मेदारी केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा कायाकल्प को दी गई है। परियोजना की अवधि 18 साल है। सरकार ने 2019-2020 तक नदी की सफाई पर 20 हजार करोड़ रुपए का बजट तय किया है।

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