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Vikas Dubey Encounter EXCLUSIVE: 6 जुलाई क्यों हुआ था विकास दुबे व अमर दुबे में विवाद? अब कभी नहीं चलेगा पता

 Shiv Kumar Mishra |  13 July 2020 3:47 AM GMT  |  दिल्ली

Vikas Dubey Encounter EXCLUSIVE: 6 जुलाई क्यों हुआ था विकास दुबे व अमर दुबे में विवाद? अब कभी नहीं चलेगा पता
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अभय त्रिपाठी

फरीदाबाद के घर में जबरन रुकने के दौरान हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का अपने बेहद करीबी अमर दुबे से क्यों विवाद हुआ था? यह अब दुनिया कभी नहीं जान पाएगी, क्योंकि विवाद के दौरान मौजूद प्रभात मिश्रा के साथ विकास दुबे और अमर दुबे पुलिस एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश के हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद परिवार से बातचीत में खुलासा हुआ है कि फरीदाबाद में रुकने के दौरान उसका अपने बेहद करीबी अमर दुबे के साथ झगड़ा हुआ था। यह किस बात पर हुआ था, यह रहस्य अब कभी नहीं खुलेगा, लेकिन दोनों के बीच विवाद जोरदार हुआ था। यह खुलासा किया है अंकुर की मां शांति देवी व पत्नी गुंजन मिश्रा ने। बता दें कि फरीदाबाद में जिस घर में विकास दुबे अपने दोनों साथियों (अमर दुबे और प्रभात मिश्रा) के जबरन घर में रुका वह मिश्रा परिवार का है। जिस समय तीनों घर में दाखिल हुए उस समय ये दोनों महिलाएं ही घर में थीं।

अंकुर की मां शांति देवी व पत्नी गुंजन मिश्रा का कहना है कि यह झगड़ा 6 जुलाई (मंगलवार) को हुआ था, विवाद इस कदर बढ़ा कि अमर दुबे अपने आका विकास दुबे और प्रभात मिश्रा का साथ छोड़कर चला गया, जिसकी अगले ही दिन यानी बुधवार तड़के हमीरपुर में एनकाउंटर में मौत हो गई। दरअसल, बुधवार तड़के यूपी एसटीएफ ने हमीरपुर के मौदहा में विकास के सबसे करीबी साथी अमर दुबे को एनकाउंटर में मार गिराया था। बताया जाता है कि विकास के एक इशारे पर अमर दुबे किसी पर भी फायरिंग कर उसे मार डालता था। राइफल चलाने में माहिर अमर दुबे को विकास दुबे का दाया हाथ कहा जाता था।

विकास ने अंकुर को फर्श पर गिरा दिया था

परिवार के सदस्यों की मानें तो फरीदाबाद में मिश्रा परिवार के यहां रुकने के दौरान मंगलवार रात को 10 बजे विकास दुबे फिर आया था। साढ़े 10 बजे जब अंकुर काम से घर लौटा, तो उसने भी उन्हें घर से चले जाने को कहा, मगर विकास दुबे, प्रभात मिश्रा और अमर दुबे ने अंकुर को धमकी देकर नीचे फर्श पर लिटा दिया।

अंकुर के पहचान पत्र पर बुक कराया था होटल

परिवार के सदस्यों की मानें तो रात में अंकुर और श्रवण के पहचानपत्र विकास और उसके गुर्गों ने ले लिए थे। इसके बाद विकास अंकुर को अपने साथ लेकर चला गया और उसके नाम पर होटल में कमरा बुक कराया। इस दौरान प्रभात और अमर दुबे यह सुनिश्चित करने के लिए उनके घर पर ही रहे कि परिवार के सदस्य पुलिस को सूचना ना दे पाएं। बाद में अमर दुबे का विकास व प्रभात के साथ विवाद भी हुआ और वो उसी दिन निकल गया था। अगले दिन अंकुर के बारे में बदमाशों ने बताया कि वो वहीं से काम पर चला गया है। सात जुलाई को विकास तो दिन में ही निकल गया था। उसके बाद शाम को पुलिस उनके घर आई। घर का कोना-कोना छान मारा। इस दौरान कोई फायरिंग नहीं हुई। शांति देवी के अनुसार, बाद में उनके पति व बेटे से उनकी मुलाकात खेड़ी थाने में हुई। अब इस सारे प्रकरण में उनका कोई दोष हो तो कोई बताए।

विकास दुबे न मरता, तो हम पर आफत का पहाड़ टूटना तय था

'पंडित, तुम आठ-आठ पुलिस वालों को मारकर यहां क्यों आए हो। तुम्हारे साथ हम भी फंस जाएंगे। जाओ और सरेंडर कर दो। हमने विकास दुबे को किसी तरह से अपने घर से चले जाने को कहा, पर जवाब में विकास और उसके गुर्गों ने हमें धमकाकर कहा कि चुपचाप एक तरफ होकर बैठ जाओ। ऐसा न हो कि कहीं तुम ही इस दुनिया से सरेंडर हो जाओ। बताओ, इसके बाद घर में हम अकेली महिलाएं क्या करतीं।' यह कहना है अंकुर की मां शांति देवी व पत्नी गुंजन मिश्रा ने। उन्होंने बताया कि बदमाशों ने हमारे फोन भी अपने कब्जे में ले लिए। ऐसे में न तो हम शोर मचा सकीं और न पुलिस को सूचित कर सकीं।


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