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सात दिन के बाद विकास दुबे हुआ आखिरकार गिरफ्तार, जानें सात दिन में कब क्या-क्या हुआ?

उसके रिश्तेदारों ने पहले ही पुलिस को मना कर दिया था, कि उन्होंने विकास दुबे को पनाह दिया है।

 Shiv Kumar Mishra |  9 July 2020 7:02 AM GMT  |  उज्जैन

सात दिन के बाद विकास दुबे हुआ आखिरकार गिरफ्तार, जानें सात दिन में कब क्या-क्या हुआ?
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रजत शर्मा

सात दिन की लुकाछिपी के बाद विकास दुबे को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। उज्जैन के महाकाल मंदिर से इसकी गिरफ्तारी की गई है। जानकारी के मुताबिक उज्जैन ने महाकाल मंदिर में खुद अपनी पहचान उजागर की। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. खबर है कि उज्जैन में महाकाल दर्शन के बाद उसने सरेंडर किया है, लेकिन कुछ सूत्रों का कहना है कि विकास दुबे को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने विकास दुबे की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

खबरों के मुताबिक उज्जैन में आज विकास दुबे पुलिस की गिरफ्त में आ गया है। सरेंडर करने के पहले उसने महाकाल मंदिर में दर्शन किए। उसने मास्क लगा रखा था। गौरतलब है कि विकास दुबे की तलाश में कई राज्यों की पुलिस लगी हुई थी। विकास दुबे उस एनकाउंटर का मुख्य आरोपी है, जिसमें यूपी के 8 पुलिसकर्मी मारे गए थे। यूपी में हुई इस घटना के बाद से विकास दुबे फरार था। तभी से उसकी तलाश थी। विकास दुबे के एमपी कनेक्शन को लेकर जांच जारी थी। मध्यप्रदेश पुलिस इसे लेकर हाईअलर्ट पर थी। ग्वालियर-चंबल के 15 बदमाशों के विकास दुबे से कनेक्शन का सुराग भी पुलिस के हाथों से लग चुके थे, जिसके बाद एसटीएफ ने अपनी जांच तेज कर दी थी। विकास दुबे के पकड़े जाने के बाद कई सवालों के जवाब मिल सकेंगे। लॉकडाउन की अवधि में यूपी से उज्जैन तक चोरी-छिपे पहुंचना आसान नहीं था। लेकिन वह पुलिस को चकमा देते हुए पहुंच गया। उसके रिश्तेदारों ने पहले ही पुलिस को मना कर दिया था, कि उन्होंने विकास दुबे को पनाह दिया है।

इससे पहले यूपी पुलिस ने यूपी पुलिस ने विकास दुबे के एक और साथी को मार गिराया। इटावा हाईवे पर बदमाशों और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में गोली लगने से बदमाश की मौत हो गई उसके ऊपर 50 हजार का इनाम था। वहीं तीन बदमाश भागने में सफल रहे। वहीं दूसरी तरफ विकास दुबे का करीबी प्रभात मिश्रा कानपुर के पास पनकी में स्टेप मुठभेड़ में मारा गया। कल प्रभात मिश्रा को फरीदाबाद में दो साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया था। यूपी पुलिस ने अदालत से ट्रांजिट रिमांड की मांग की थी तथा ट्रांजिट रिमांड के दौरान पूछताछ के लिए एसटीएफ उसे कानपुर ले जा रही थी। बताया जाता है कि पनकी के पास प्रभात मिश्रा ने एक दरोगा की पिस्टल छीनकर भागने का प्रयास कर रहा था तभी पुलिस मुठभेड़ में पुलिस ने उसे मार गिराया।

जानें सात दिन में कब क्या-क्या हुआ

- गुरूवार दो जुलाई की रात 12 बजे शिवराजपुर, बिल्हौर, चौबेपुर, शिवली थाने के 35 पुलिसकर्मियों ने चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरु गांव निवासी कुख्यात अपराधी विकास दुबे के घर दबिश देने गई थी।

- विकास के गांव के ही रहने वाले राहुल तिवारी नाम के युवक ने विकास के खिलाफ धमकी और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।

- विकास दुबे को गुरुवार पुलिस कार्रवाई के साढ़े पांच घंटे पहले ही इस बात का पता चल जाता है कि 35 पुलिसकर्मी दबिश देने आ रहे हैं।

- विकास ने अपने साथियों को हथियारों के साथ बुलाया और घर के बाहर जेसीबी खड़ा करवा कर रास्ता बंद कर दिया, ताकि पुलिस वाले भाग न पाए।

– पुलिस कार्रवाई से पहले पुलिस विभाग में सक्रिय विकास के भेदियों ने सबस्टेशन फोन कर लाइन टूट जाने की फर्जी सूचना देकर बिकरू गांव की लाइट गुल करा दी।

- रात करीब 1.30 पर विकास की घेराबंदी में उसके गर्गों ने करीब सौ राउंड फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई भी हुई, लेकिन सीओ समेत 8 पुलिसकर्मियों को घेरकर मौत के घाट उतार विकास भाग निकलता है।

- इसके करी दो घंटे बाद करीब एक दर्जन थानों की पुलिस और सीओ सर्किल की फोर्स में मौजूद 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने बिकरू समेत आसपास के पांच गांवों को घेर लिया। पूरी रात सर्च आपरेशन चला।

तीन जुलाई

– सुबह डीजीपी के निर्देश पर एसटीएफ के तेज तर्रार जवानों की मौजूदगी में पुलिस ने घेराबंदी और तगड़ी की। बिकरू से 10 किलोमीटर दूर हुई मुठभेड़ में विकास दुबे के दो सहयाेगी मार गिराए जाते हैं।

– एडीजी ला एंड आडर, डीजीपी दोपहर 12 बजे के आसपा बिकरू गांव पहुंचे।

– साठ से अधिक पुलिस की टीमें, 1500 से अधिक जवान, क्राइम ब्रांच की कई टीमें अपराधियों की तलाश में जुटी।

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कानपुर पहुंचे और शहीद के परिजनों को एक एक करोड़ रुपये देने का ऐलान किया।

– विकास दुबे के लिए मुखबिरी के शक में चौबेपुर थाने के इस्पेक्टर विनय तिवारी को सस्पेंड कर दिया जाता है।

चार जुलाई

– पुलिस विकास तिवारी के घर पर बुलडोजर चलवा देती है। उसकी लग्जरी कारें तोड़ दी जाती है। पूरी रात सर्च आपरेशन चला।

- रात में आई जी मोहित अग्रवाल ने कहा कि सूचना थी कि विकास ने अपने घरों की दीवारों में चुनवाकर छिपाए हैं हथियार इसलिए की जा रही है कार्रवाई।

पांच जुलाई

– विकास के घर में तलाशी में मिले तयखाने में पुलिस की विस्फोटकर सामग्री और कई हथियार मिले।

– विकास का नौकर और शार्प शूटर कल्लू शहर से भागने की फिराक में था तभी कल्याणपुर में मुढभेड़ के बाद धर दबोचा।

छह जुलाई

– पुलिस ने कल्लू की पत्नी समेत हमले में मदद करने वाले विकास के साढ़ू समेत तीन लोगों को किया गिरफ्तार।

- उधर, डीजीपी ने आईजी मोहित अग्रवाल की सिफारिश पर विकास की इनामी राशि ढाई लाख कर दी।

सात जुलाई

– पुलिस विकास के 15 साथियों का पोस्टर जारी करती है।

– देर रात पुलिस को हरियाणा के फरीदपुर के एक होटल में विकास दुबे की लोकेशन मिलती है।

– पुलिस के पहुंचने से पहले ही विकास वहां से फरार।

– इस मामले में विनय तिवारी पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप में तत्कालीन डीआईजी अनंत देव का एसटीएफ डीआईजी के पद से तबादला कर दिया जाता है।

– चौबेपुर थाने के सभी 68 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया।

आठ जुलाई

– सुबह विकास का सबसे करीबी अमर दुबे को पुलिस हमीरपुर के पास मुठभेड़ में मार गिराती है।

– इसके बाद विकास दुबे का एक और साथी श्यामू बाजपेई को चौबेपुर पुलिस ने मुठभेड़ के बाद किया गिरफ्तार। श्यामू बाजपेई पर है ₹25000 का इनाम।

– विकास दुबे पर ढ़ाई लाख से इनाम बढ़ा कर पांच लाख किया जाता है।

नौ जुलाई

– सुबह कानपुर में विकास का साथी प्रभात और इटावा में प्रवीण एनकाउंटर में मारे जातेे हैं

– उज्जैन में विकास दुबे गिरफ्तार

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