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अब पिछड़ों की लड़ाई में फंसे सवर्ण वोट किधर जायें?

 Special Coverage News |  27 April 2019 11:27 AM GMT

अब पिछड़ों की लड़ाई में फंसे सवर्ण वोट किधर जायें?

देश में जबसे धर्म और जातीयता की राजनीत शुरू हुई तबसे लेकर आज तक कोई भी राजनैतिक पार्टी इस बात से अछूती नहीं बची. जो इस बात से बची उसका अस्तित्व ही समाप्त होता गया है. जो इसी पेटर्न पर चली उसको जीत मिलती गई. पिछले लोकसभा चुनाव में भ्रष्टाचार , देश की सुरक्षा , राम मंदिर , डीजल पेट्रोल की कीमतें, गिरता रुपया, समेत कई मुद्दे थे, जिनमे एक मुद्दा कांग्रेसियों को जेल भेजना भी था. पांच साल तक इन मुद्दों पर सरकार ने कितना काम किया.


अब लोकसभा चुनाव में फिर से सभी पार्टियाँ लड़ रही है. लगभग आधा से ज्यादा सीटों पर चुनाव हो चुका है. अभी तक सभी पार्टियाँ आपसी हमला कर रहे है. राहुल , मोदी पर मोदी राहुल पर बोलते है. बीजेपी सबसे ज्यादा कांग्रेस और इंदिरा परिवार पर बात करती है. जबकि राहुल गाँधी चौकीदार और अमित शाह पर बोलते है. जबकि बीजेपी के पिलर नेता नितिन गडकरी , राजनाथ सिंह समेत कई ऐसे चेहरे है जिन्हें कोई इस चुनाव पूंछ नहीं रहा है. बीजेपी सिर्फ दो चेहरों के इर्द गिर्द घूम रही है जबकि कांग्रेस राहुल प्रियंका के सहारे पार होना चाहती है.


पीएम मोदी ने आज कन्नौज में कहा कि हमारे देश में ऐसे बुद्धिमान भी हैं जो आलू से सोना बना देते हैं. हम या हमारी पार्टी ऐसा नहीं कर सकती. हम झूठ नहीं बोल सकते भाई. इसलिए जिनको आलू से सोना बनवाना हो वे उनके पास जा सकते हैं. नया हिंदुस्तान अब डरेगा नहीं. नया हिंदुस्तान आतंकियों के घर में घुसकर मारेगा. जब देश सुरक्षित होगा तभी सामान्य लोगों का जीवन सही से चलेगा.


पीएम मोदी ने कहा कि आज जितने लोग खुद को भावी PM बता रहे हैं, इन्होंने देश को मजबूत बनाने की, जवानों की रक्षा की कोई योजना सामने रखी है क्या? जो मोदी को हराने के लिए, पाकिस्तान के झूठ को सच मानते हों, पाकिस्तान का हीरो बनना चाहते हों, उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है. उन्होंने कहा कि में पिछड़ा वर्ग से नहीं अति पिछडा वर्ग से आता हूँ. में पिछडा वर्ग को भी अगड़े वर्ग में शामिल करना चाहता हूँ.


अब आप स्पष्ट मानिए कोई भी नेता और पार्टी चुनाव जीतने के लिए धर्म , समाज और जातियों को किस हद तक तोड़ना चाहता है. लिहाजा आप वोट डालते समय एक बार जरुर यह सोचें कि मैंने अपना वोट देश हित में दिया है. आप किसी भेदभाव और अनर्गल धोखेबाजों से जरुर बचें. हो सके तो आने वाले नेताओं से जरू पूंछे कि आप सत्ता में हो तो आपने क्या किया. और जो सत्ता में नहीं है उन्होंने जब थे तो जनहित का क्या क्या काम किया. जिस दिन आप जागरूक हो गये उस दिन आप जो चाहेंगे वाही सरकार को करना पड़ेगा.


अब बात सवर्णों को लेकर आई जब अखिलेश , मायावती , मोदी समेत सभी नेता पिछड़ों के हो गए तो अब अगड़ों की राजनीत कौन करेगा. अब अगड़े अपना नेता किसे मानेगें.

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