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यूपी में बीजेपी इन पच्चीस सांसदों का काट सकती है टिकिट

 Special Coverage News |  7 March 2019 5:11 PM GMT  |  लखनऊ

कांग्रेस बीजेपी राजस्थान
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देश के जिस सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश से 2014 में बीजेपी को सबसे अधिक 71 सीटें मिली थी, उसी सूबे में बीजेपी अपने सिटिंग सांसदों का सबसे अधिक टिकट काटने जा रही है. भारतवर्ष को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने यूपी के कम से कम 25 बीजेपी सांसदों का टिकट काटने का मन बना लिया है. जिन नेताओं का टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है, उनमें कुछ अपने इलाके के बड़े नेता भी शामिल हैं.

हालांकि बीजेपी को लगता है कि सर्जिकल स्ट्राइक पार्ट 2 के बाद एक बार फिर से बीजेपी के पक्ष में माहौल तेजी से बनने और बदलने लगा है फिर भी पार्टी रिस्क लेने के मूड में नहीं है. पहले गोरखपुर, फूलपुर और फिर कैराना उपचुनाव में मिली हार पार्टी को अभी साल रही है. मुद्दे चाहे बदल जाएं पर दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर ही गुजरेगा. पिछले चुनाव में 80 में से 71 सीटें पाने वाली बीजेपी इसे अच्छी तरह समझती है.

चुनाव अभी डेढ़ महीने दूर हैं. वैसे भी बिहार-यूपी में रातोंरात चुनावी फिजा बदल जाया करती है. लिहाजा एयर स्ट्राइक के सहारे विपक्ष पर पॉलिटिकल वार कर रही बीजेपी खास रणनीति पर काम कर रही है. पार्टी ने बूथ लेवल तक जाकर फीडबैक हासिल किया है. ये फीडबैक अपने ही 71 सांसदों के बारे में है. इसके आधार पर आकलन पूरा हो चुका है. 71 में से 25 सांसदों की रिपोर्ट ठीक नहीं निकली. बीजेपी इन्हें बाहर का रास्ता दिखाने वाली है.

यानी 25 सीटों पर नए उम्मीदवार उतारे जाएंगे. इसका मकसद पार्टी के अलावा उम्मीदवारों के खिलाफ बने माहौल को साधने का है . स्थानीय फीडबैक के आधार पर बीजेपी राजस्थान और गुजरात में इस रणनीति को सफलतापूर्वक आजमा चुकी है. इसलिए अमित शाह की टीम आश्वस्त है. यूपी प्रभारी गोवर्धन झड़पिया इलेक्शन स्ट्रेटेजी के माहिर खिलाड़ी हैं. लिहाजा इस बड़े फैसले में वो शामिल हैं. मुहर लग गई है. औपचारिक एलान बाकी है.

इन 25 सांसदों में कई कद्दावर नेता शामिल हैं. बहराइच से सावित्री बाई फूले पहले ही कांग्रेस का दामन थाम चुकी है. एक सीट पर काम आसान ऐसे ही हो गया. अब अगर अल्फाबेट के हिसाब से चलें तो जिनका पत्ता गोल होना तय है उनमें अकबरपुर से देवेंद्र सिंह पहला नाम है. 2014 में उन्होंने दोबारा सांसदी का दावा कर रहे कांग्रेस के राजा रामपाल को तीन लाख 84 हजार मतों से हराया था.

बड़े नामों में एक इलाहाबाद से सांसद श्यामा चरण गुप्ता का है. ये श्यामा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक हैं. इन्होंने सपा के रेवती रमण सिंह को लगभग 80 हजार वोटों से हराया था. अंबेडकर नगर के सीटिंग एमपी हरि ओम पांडे का भी टिकट कटना तय है. 2014 में इन्होंने बसपा के राकेश पांडे को हराया था. ये इस सीट पर जीतने वाले बीजेपी के पहले नेता हैं. पर, फीडबैक ठीक नहीं है. इसलिए 2019 में बदले जाएंगे.

आंवला से धर्मेंद्र कुमार का टिकट कटना भी तय है. ये सपा के कुंवर सर्वराज सिंह को हरा कर संसद पहुंचे थे. बलिया से भरत सिंह भी रेस से बाहर हैं. इनकी उम्र 70 साल से ज्यादा है. लिहाजा ये भी एक बड़ा कारण बनी. उन्होंने चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को 2014 में मात दी थी.

बस्ती से हरीश चंद्र और भदोई से वीरेंद्र सिंह का टिकट भी काटा जाएगा. यहां से नए युवा उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं. धौराहरा से पिछला चुनाव जीती रेखा वर्मा की रिपोर्ट भी निगेटिव है. उधर मुलायम के गढ़ इटावा से अशोक कुमार दोहारे के बदले किसी नए उम्मीदवार को उतारने की तैयारी चल रही है.

दो चौंकाने वाले नाम भी हैं. संभल से सांसद सत्यपाल सिंह की चुनावी राजनीति ठहरने वाली है. फतेहपुर की फायरब्रांड सांसद साध्वी निरंजन ज्योति भी इस बार रेस से बाहर हो चली हैं. वहीं घोसी से हरिनारायण राजभर की छुट्टी होगी.

सभी 25 सीटों की सूची और मौजूदा सांसदों के नाम इस प्रकार हैं जहां बीजेपी उम्मीदवारों को बदलने वाली है..

अकबरपुर – देवेंद्र सिंह

इलाहाबाद – श्यामा चरण गुप्ता

अंबेडकर नगर – हरि ओम पांडे

आंवला – धर्मेंद्र कुमार

बहराइच – सावित्री बाई फूले

बलिया – भरत सिंह

बस्ती – हरीश चंद्र

भदोई – वीरेंद्र सिंह

धौराहरा – रेखा वर्मा

इटावा – अशोक कुमार दोहारे

फतेहपुर – निरंजन ज्योति

फतेहपुर सिकरी – बाबूलाल

घोसी – हरिनारायण राजभर

हमीरपुर – कुंवर पुष्पेंद्र सिंह

हरदोई – अंशुल वर्मा

जॉनपुर – कृष्णा प्रताप

कुशीनगर – राजेश पांडे

मछलीशहर – राम चरित्र निशाद

मेरठ – राजेंद्र अग्रवाल

मिसरिख – अंजू बाला

रामपुर – डॉ. नेपाल सिंह

रॉबर्ट्सगंज – छोटेलाल

सलेमपुर – रवींद्र कुशवाहा

संभल – सत्यपाल सिंह

श्रावस्ती – दद्दन मिश्रा

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