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ठाकरे की ठोकशाही के डर से भक्तों ने साधी चुप्पी!

 अश्वनी कुमार श्रीवास्त� |  21 April 2020 4:11 PM GMT  |  लखनऊ

ठाकरे की ठोकशाही के डर से भक्तों ने साधी चुप्पी!
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- ठाकरे परिवार के खिलाफ भीतर से खूब भरे होने के बावजूद पालघर मसले को हिन्दू-मुसलमान बनाने के लिए सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर झूठ और नफरत फैलाना तो दूर थोड़ी सी भी चूं- चपड़ नहीं कर रहे भक्त

- क्योंकि अभी तो महाराष्ट्र में सरकार है इसलिए पुलिस/जेल का लग रहा डर

- मुंबई/ महाराष्ट्र वाले भक्तों को तो सरकार नहीं भी रही तो भी शिवसेना की ठोकशाही में ठोंके जाने का सता रहा है डर

एक कहावत है, 'जबरा मारे और रोने भी न दे।' मुंबई में रहने वाले मेरे दो-तीन मित्र हैं, जिनका हाल आजकल इसी कहावत जैसा है। दरअसल, मेरे ये मित्र परम कैटेगरी वाले भक्त हैं और सोशल मीडिया पर हिन्दू-मुसलमान और मोदी भक्ति में तमाम तरह की फेक न्यूज़ या जहरीली पोस्ट लिखने/ शेयर करने और व्हाट्सएप फॉरवर्ड करने के बेहद माहिर खिलाड़ी हैं। लेकिन जब से वहां उद्धव ठाकरे ने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के भक्त गणों की धर पकड़ झूठ या नफरत फैलाने वाली पोस्ट के लिए करनी शुरू कर दी है, तब से इन भक्तों की बोलती सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर भी बंद हो गई है।

हालांकि सिर्फ मुम्बई ही नहीं बल्कि ठाकरे की चेतावनी और कार्यवाही का असर देशभर के भक्तों पर काफी गहरा पड़ा है इसलिए तकरीबन पूरे देश में ही भक्त सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर लगभग मौन साधे हैं या संभल कर कोई पोस्ट लिख या शेयर कर रहे हैं। वरना पालघर की घटना पर तो इन भक्तों ने शुरुआती दो तीन दिन जमकर फर्जी पोस्ट शेयर कर करके खूब हिन्दू मुसलमान वाला माहौल बना ही दिया था।

वैसे, मुम्बई या महाराष्ट्र के बाहर के लोग भले ही पालघर की घटना पर खामोश हो गए हों और झूठ या नफरत का जहरीला खेल अब न खेल पा रहे हों लेकिन उद्धव सरकार का विरोध अब भी जारी रखे हुए हैं। जबकि मुंबई या महाराष्ट्र में कहीं भी रहने वाले भक्तगणों का हाल तो इस समय उसी कहावत जैसा ही है, जिसका जिक्र मैंने शुरू में ही किया। भक्त पालघर और ठाकरे के खिलाफ अंदर से खूब भरे बैठे हैं मगर डर के मारे चूं तक नहीं कर पा रहे।

दिलचस्प बात यह है कि यह डर केवल अभी ठाकरे सरकार के रहने तक ही नहीं है बल्कि ठाकरे परिवार और उनकी शिव सेना की ठोंकशाही का डर उन पर इसी तरह बना ही रहना है। उन्हें पता है कि सरकार है तो शायद अभी पुलिस और जेल तक में ठाकरे परिवार उन्हें बख्श देगा लेकिन सरकार नहीं हुई और तब कहीं भक्तों ने वहीं रहकर ठाकरे परिवार की शान में गुस्ताखी की तो शिव सैनिक उनकी ज्यादा खातिरदारी भी कर सकते हैं।

बहरहाल, लोहा ही लोहे को काटता है इसलिए आज अगर कट्टरपंथी ताकतों को झूठ और नफरत फैलाकर अराजकता या गुंडई की राजनीति करने से अगर कोई रोक पा रहा है तो वह केवल ठाकरे परिवार ही है....जिसे मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में अपनी ठोंकशाही के राज के लिए ही जाना जाता है।

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