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अखिलेश के खिलाफ बोलकर मुलायम ने खेला ये फिर अपना पहलवानी दांव

 Special Coverage News |  22 Feb 2019 12:10 PM GMT  |  लखनऊ

अखिलेश के खिलाफ बोलकर मुलायम ने खेला ये फिर अपना पहलवानी दांव
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सपा बसपा गठबंधन के बारे में मुलायम सिंह यादव के बयान के बाद लखनऊ के राजनीतिक हल्के में गहमा-गहमी मची हुई है. गठबंधन के विरोधी नेता इसे अखिलेश का विरोध बताने में लगे हुए हैं. लेकिन मुलायम सिंह यादव को करीब से जानने वाले लोग इस बयान का राजनीतिक मायने तलाशने में लगे हुए हैं. मुलायम को करीब से जानने वाले एक नेता का दावा है कि मुलायम ने जो भी कहा है वो अखिलेश के फायदे के लिए कहा है. उनका तर्क है कि जब-जब अखिलेश का पार्टी में विरोध शुरू होता है. मुलायम उस समय विरोध का झंडा सबसे पहले उठाते हैं.


2016 में अखिलेश यादव और शिवपाल जब आमने सामने आए तो मुलायम सिंह यादव शिवपाल के खेमे में नजर आए. एक बार तो हालात ऐसे हो गए कि अखिलेश यादव को मुलायम का माइक तक छिनना पड़ा. लेकिन जब पार्टी में अखिलेश का विरोध कमजोर पड़ने लगा और शिवपाल के साथ खड़े लोगों का उत्साह कम हो गया. तब मुलायम सिंह भी शिथिल हो गए. जब पार्टी की सिंबल की लड़ाई अखिलेश के पक्ष में हुई. तब मुलायम बेटे अखिलेश के साथ खड़े नजर आए.


इस बार मुलायम कुछ ऐसा ही दांव खेल रहे हैं. मुलायम को इस बात का अंदाजा है कि जिन बड़े नेताओं का टिकट गठबंधन के कारण कटेगा वे समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के खिलाफ खड़े हो जाएगें. इसका सीधा नुकसान अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को आम चुनावों में होगा. ऐसे में मुलायम ने अखिलेश से नाराजगी का ट्रंप कार्ड चल दिया है. ताकि विरोध करने वाले नेता मुलायम की छत्र-छाया में इकठ्ठा हो और मुलायम सिंह यादव चुनाव तक उनके विरोध के स्वर को कम कर दे या उसे पूरी तरह शांत कर दे.


अखिलेश को स्थापित करने का मुलायम प्लान

वरिष्ट पत्रकार अंबिकानंद सहाय की माने तो मुलायम ने अखिलेश के स्थापित करने के लिए तीन चरणों की योजना बनाई. इसके पहले चरण में उन्होंने बेटे अखिलेश को मुख्यमंत्री की कुर्सी दी. मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलने के बाद भी जब अखिलेश को पार्टी में स्वीकार नहीं किया गया, तो मुलायम ने दूसरा दाव खेला भाई शिवपाल यादव और बेटे अखिलेश की लड़ाई का. शिवपाल के साथ खड़े मुलायम सिंह ने भाई को ही कमजोर किया और धीरे-धीरे अखिलेश की पकड़ पार्टी पर पूरी तरह मजबूत हो गई. तब मुलायम ने शिवपाल का साथ छोड़ दिया.


मुलायम ने इसलिए की प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ

अखिलेश की जनता में और दूसरे दलों में स्वीकार्यता अभी बाकि है. ऐसे में मुलायम सिंह यादव ने प्रधानमंत्री मोदी की तारिफ कर अखिलेश को संदेश दिया कि राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन और दोस्त नहीं होता है. आज भले ही मुलायम सिंह यादव की पहचान बीजेपी विरोधी हो, लेकिन जीवन भर मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस के विरोध की राजनीति की है. 1977 और 1989 का चुनाव बीजेपी के साथ लड़ने वाले मुलायम मुस्लिम वोटों के लिए बीजेपी के सबसे बड़े दुश्मन बन गए. ऐसे में मुलायम ने लोकसभा के चुनावों में वोटों की गिनती के बाद अखिलेश के लिए रास्ता खुला रहा है और वो भी बिना मुस्मिल वोटरों के विश्वास को कमजोर किए.

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