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कन्नौज अपहरण कांड की जांच में हीला-हवाली पर प्रमुख गृह सचिव को मानवाधिकार आयोग की फटकार

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव कन्नौज अपहरण कांड में सीबीसीआईडी की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें या मानवाधिकार आयोग के समक्ष व्यक्तिगत उपस्थित हों - एनएचआरसी

 Arun Mishra |  6 July 2018 1:04 PM GMT  |  दिल्ली

कन्नौज अपहरण कांड की जांच में हीला-हवाली पर प्रमुख गृह सचिव को मानवाधिकार आयोग की फटकार
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भरत गांधी व अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

लखनऊ : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नवीनतम आदेश से कन्नौज अपहरण कांड में चल रही सीबीसीआईडी जांच में हीला-हवाली अब संभव नहीं है। आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि या तो उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख गृह सचिव श्री अरविंद कुमार जी आयोग को जांच की रिपोर्ट 6 सप्ताह के भीतर 15 अगस्त से पूर्व प्रस्तुत करें या फिर आयोग की फुल बेंच के सामने व्यक्तिगत उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दें।

उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को सन 2012 में कन्नौज संसदीय क्षेत्र उपचुनाव में निर्विरोध घोषित किया गया था। वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रमुख भरत गांधी ने पूर्व मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी और कई अन्य लोगों पर आरोप लगाया था कि इन सभी लोगों ने डिंपल यादव के विरुद्ध नामांकन करने के लिए कन्नौज पहुंचे सभी लोगों का अपहरण कर लिया था। भरत गांधी कन्नौज अपहरण का यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट ले गए। वहां से उन्हें संतुष्टि नहीं मिली, तो बाद में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में वाद दायर किया और खुद बहस की।

सुप्रीम कोर्ट ने भरत गांधी को जांच करके पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया। लेकिन याचिकाकर्ता श्री भरत गांधी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन तत्कालीन अखिलेश सरकार ने नहीं किया। इसके बाद भरत गांधी ने 11 नवंबर 2013 को इस मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में प्रस्तुत किया। आयोग ने इस मामले में कई बार नोटिस जारी किया और जांच का आदेश दिया, किंतु तत्कालीन अखिलेश सरकार के अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच नहीं की। इससे दुखी होकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 24 फरवरी 2016 को याचिकाकर्ता और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रमुख भरत गांधी को पुलिस सुरक्षा देने और कन्नौज अपहरण कांड की जांच क्राइम ब्रांच से कराने का निर्देश उत्तर प्रदेश के प्रमुख गृह सचिव को दिया। किन्तु तत्कालीन अखिलेश सरकार ने इन आदेशों का अनुपालन नहीं किया। बाद में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो 1 साल से लटके राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आदेश का कार्यान्वयन हुआ और क्राइम ब्रांच को भरत गांधी की शिकायतों पर कन्नौज अपहरण के मामले की जांच करने के लिए शासनादेश जारी किया गया।

भरत गांधी ने कहा कि लगभग 1 वर्ष तक यह जांच सुचारु रूप से चली, लेकिन जैसे ही इस जांच में गवाहों ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के शामिल होने की बात क्राइम ब्रांच के सामने रखी, वैसे ही जांच ठंडी पड़ गई। विलंब होता देखकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गत 25 जनवरी को आदेश जारी करते हुए कहा कि यदि मामले की जांच रिपोर्ट आयोग के समक्ष तत्काल प्रस्तुत ना की गई, तो आयोग प्रमुख सचिव के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करेगा। इस आदेश के बाद प्रमुख सचिव ने आयोग से 3 महीने की और मोहलत मांगी। प्रमुख सचिव के आवेदन पर विचार करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ताजा आदेश जारी करते हुए कहा है कि प्रमुख गृह सचिव को इस आदेश के 6 सप्ताह के भीतर कन्नौज अपहरण कांड में चल रही जांच की रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। निश्चित समय बीत जाने पर उन्हें स्वयं आयोग के समक्ष उपस्थित होना होगा और विलंब के कारणों पर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा।

कन्नौज अपहरण मामले की ढीली ढाली जांच पर आयोग इतना क्षुब्ध है कि उसने भरत गांधी का मुकदमा अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पूर्ण पीठ को सुनवाई के लिए प्रेषित कर दिया है। विलंब के कारणों को बताते हुए वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रमुख और कन्नौज अपहरण कांड में याचिकाकर्ता भरत गांधी ने कहा है कि अखिलेश यादव का नाम आते ही क्राइम ब्रांच की जांच की गति धीमी पड़ गई है। इससे स्पष्ट है कि अखिलेश यादव की गिरफ्तारी क्राइम ब्रांच के गले की हड्डी बन गई है। सीबीसीआईडी पेशोपेश में है। इसीलिए सीबीसीआईडी कन्नौज अपहरण कांड की जांच रिपोर्ट प्रमुख गृह सचिव को नहीं सौंप रही है और परिणाम स्वरुप राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की फटकार प्रमुख सचिव अरविंद कुमार पर पड़ी है।

भरत गांधी ने प्रमुख सचिव गृह पर यह भी आरोप लगाया है की जांच में विलंब के लिए जांच एजेंसी जिम्मेदार हो सकती है। लेकिन बार-बार आदेश जारी करने पर भी याचिकाकर्ता को सुरक्षा ना देना गृह सचिव की गलती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के शासन के दौरान याचिकाकर्ता की सुरक्षा जांच की जिम्मेदारी ट्रांस गोमती के सर्किल ऑफिसर राजेश कुमार यादव को दी गई थी। उन्होंने एक फर्जी रिपोर्ट बनाते हुए यह लिखकर दे दिया याचिकाकर्ता भरत गांधी ने खुद ही कहा कि उनको सुरक्षा नहीं चाहिए। इस झूठी रिपोर्ट देने के अपराध में राजेश कुमार यादव को दंडित करने के लिए उन्होंने प्रमुख गृह सचिव को आवेदन दिए, लेकिन गृह सचिव ने उक्त सर्किल ऑफिसर राजेश कुमार यादव के खिलाफ कोई कार्यवाही अब तक नहीं की है। भरत गांधी ने यह भी आरोप लगाया है कि योगी सरकार के आला अधिकारी अभी तक अखिलेश यादव के इशारों पर काम कर रहे हैं और योगी सरकार का अपने ही अधिकारियों पर बस नहीं है।


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