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शिवपाल सिंह यादव कामयाब हो सकते हैं मगर!

 Majid Ali Khan |  2018-10-01 07:46:37.0  |  लखनऊ

शिवपाल सिंह यादव कामयाब हो सकते हैं मगर!

माजिद अली खान (राजनितिक संपादक)

उत्तर प्रदेश की राजनीति में खास मुकाम रखने वाले समाजवादी पार्टी के कर्णधार रहे पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव अपनी अलग दुनिया बसाने में लगे हैं. समजवादी पार्टी के संसथपाक मुलायम सिंह यादव के खानदान में मची लड़ाई ने इस परिवार को दो खेमो में बंटने पर मजबूर कर दिया है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष के तौर अखिलेश यादव की ताजपोशी ने इस मामले को और बिगड़ दिया था. शिवपाल सिंह यादव की अपने भतीजे से बिलकुल नहीं बन पायी जिस वजह से आज वह अपनी अलग ही राह पर चल निकलने पर मजबूर हैं.


शिवपाल सिंह यादव की अगर बात करें तो शिवपाल उत्तर प्रदेश के बेहद धर्मनिरपेक्ष नेताओ में गिने जाते हैं. मुलायम सिंह यादव के साथ कंधे से कन्धा मिला कर पार्टी को खड़ा करने में शिवपाल की भूमिका किसी भी सूरत में कम नहीं है. सही मायनो में देखा जाये तो अगर अखिलेश मुलायम सिंह के खानदानी वारिस हैं तो उसी प्रकार मुलायम सिंह की समाजवादी विरासत और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के असली वारिस शिवपाल हैं. समाजवादी पार्टी की सरकारों में सदा शिवपाल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. इसलिए उनका जनाधार भी राज्य में अच्छा खासा है. इसी जनाधार की बदौलत वह अपनी नई पार्टी के साथ मैदान में उतर रहे हैं तथा सेकुलर समाजवादी पार्टी के नाम से लोगों को संगठन से जोड़ने में व्यस्त हैं.


शिवपाल यादव इसमें कामयाब हो सकते हैं तथा अपनी भूमिका अगले चुनाव में दिखा सकते हैं लेकिन उनके बारे में फिकल रही कुछ अफवाहे उनका रस्ते की बाधा बन रही हैं. सबसे बड़ा इलज़ाम शिवपाल पर समाजवादी खेमे की और से ये लग रहा है की शिवपाल को भाजपा ने आर्थिक सहायता देकर खड़ा किया है. ये बात बड़े ज़ोर से समाजवादी पार्टी के लोगो द्वारा फैलाई जा रही है. जबकि शिवपाल यादव के क़रीबी लोगो का कहना है की शिवपाल यादव कभी सांप्रदायिक विचारो वाले नहीं रहे हैं. लेकिन सवाल तो सवाल है इसका जवाब शिवपाल सिंह यादव को मुखर होकर देना चाहिए.


आज के हालात में भाजपा का विरोध तीन स्तरों पर हो रहा है. मुस्लिम समुदाय तो पहले ही से भाजपा को सांप्रदायिक मानकर उससे दूरी बना कर चलता रहा है. लेकिन अब विरोध जातिगत आधार पर भी हो रहा है. सबसे बड़ा विरोध आर्थिक मोर्चे पर सरकार के नाकाम होने पर भी होना लाज़िमी है. यदि शिवपाल सिंह यादव इन तीनो बातो को ध्यान रखते हुए अपना पक्ष रखें तो कोई वजह नहीं की लोगो का समर्थन उन्हें न मिले. और वह एक ऐसे वर्ग का प्रतिनिधि बन जाएं जो सपा बसपा और कांग्रेस से नाराज़ है. वैसे तो शिवपाल सिंह यादव मंझे हुए खिलाडी हैं और वह लगातार यही बात कह रहे हैं की मुलायम सिंह यादव का असली समर्थन तो हमारे साथ है. मजबूरी में अखिलेश के साथ उन्हें खड़ा होना पड़ता है.


खैर कुछ भी हो शिवपाल को भाजपा के बारे में मुखर होना होगा जिससे उन्हें एक मज़बूत विकल्प के तौर पर जनता का समर्थन प्राप्त हो सके.

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