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यूपी में तीन दशक बाद मुलायम सिंह यादव परिवार का वर्चस्व खत्म, बीजेपी ने 311 में जीतीं 281 सीटें

यूपी कोआपरेटिव चुनाव परिणाम

 Shiv Kumar Mishra |  3 Sep 2020 8:46 AM GMT  |  लखनऊ

शिवपाल यादव
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शिवपाल यादव

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए यह जश्न का मौका है क्योंकि यहां पार्टी और उसके समर्थित उम्मीदवारों ने उत्तर प्रदेश सहकारी भूमि विकास बैंकों के चुनावों में 311 में से 281 सीटें जीत ली हैं। तीन दशक के बाद ऐसा हुआ है जब सहकारी भूमि विकास बैंकों से मुलायम सिंह यादव के परिवार का वर्चस्व खत्म हुआ है। मंगलवार को सहकारी भूमि बैंकों के चुनाव के लिए मतदान हुआ था। इस चुनाव में विपक्ष के रूप में समाजवादी पार्टी चुनी गई है। हालांकि एसपी को सिर्फ कुछ ही गिनी चुनी सीटें मिली हैं।

बीजेपी ने जीत का बताया ऐतिहासिक

चुनाव आयुक्त पी.के. मोहंती ने कहा कि शिकायतों के चलते 11 जगहों पर चुनाव रद्द किए गए थे। इस 'ऐतिहासिक जीत' को लेकर भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि विपक्षी उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ने की ही हिम्मत नहीं की। वहीं विपक्ष ने कहा कि कि राज्य की मशीनरी ने चुनावों को हाइजैक कर लिया था।

मंगलवार को हुए थे यूपी सहकारी भूमि बैंक के चुनाव

बीजेपी को 311 सीटों में से मिली 281 पर जीत, 11 जगहों के चुनाव हुए रद्द

2005 से तीन बार बैंक के अध्यक्ष रह चुके हैं शिवपाल सिंह यादव

तीन दशक से मुलायम का परिवार ही था इस पर काबिज

कांग्रेस को सिर्फ अमेठी के जगदीशपुर में ही मिली जीत

सिर्फ अमेठी की जगदीशपुर सीट पर मिली कांग्रेस को जीत

कांग्रेस गांधी परिवार की परंपरागत सीट अमेठी के जगदीशपुर में ही जीत दर्ज करा सकी, जहां राहुल गांधी 2019 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी से हार गए थे। विपक्षी दलों द्वारा जीती गई अन्य प्रतिष्ठित सीटों में वाराणसी, बलिया, गाजीपुर और इटावा थीं।

शिवपाल 2005 से लगातार रहे बैंक के अध्यक्ष

2005 से तीन बार बैंक के अध्यक्ष रह चुके प्रगतिवादी समाजवादी पार्टी लोहिया (पीएसपीएल) के अध्यक्ष शिवपाल यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने नियमों में बदलाव किया जिसने उन्हें चुनाव लड़ने में अयोग्य घोषित कर दिया।

नियमों में बदलाव के चलते नहीं लड़ सके चुनाव

शिवपाल ने कहा कि अध्यक्ष पद के लिए दो बार से ज्यादा चुनाव लड़ना अब वर्जित कर दिया गया है। उन्होंने इस नियम को अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने इशारों में कहा कि अगर यह नियम न आता तो इस बार भी उन्हें ही जीत मिलती।

(इनपुटः IANS)

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