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विवेक हत्याकांड: सिपाही सर्वेश ने लिखा था, मैंने दिए हैं सिपाही को पैसे, मुझे बर्खास्त करो फिर डीजीपी ने किया ये आदेश!

 Special Coverage News |  2018-10-05 07:20:57.0  |  लखनऊ

विवेक हत्याकांड: सिपाही सर्वेश ने लिखा था, मैंने दिए हैं सिपाही को पैसे, मुझे बर्खास्त करो फिर डीजीपी ने किया ये आदेश!

विवेक तिवारी हत्याकांड के बाद आरोपी सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर डीजीपी ओपी सिंह को चुनौती देने वाले एटा के सिपाही सर्वेश चौधरी को निलंबित कर दिया गया है. उसके खिलाफ विभागीय जांच का भी आदेश दिया गया है.


साथ ही सोशल मीडिया पर फोर्स के खिलाफ आक्रोश पैदा करने वाले अभियान में शामिल सिपाहियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. इतना ही नहीं सिपाहियों को भड़काने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ राजधानी लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है. डीजीपी मुख्यालय ने बर्खास्त सिपाहियों के संगठनों द्वारा शुक्रवार को काला दिवस मनाने को लेकर भी अलर्ट जारी किया है.


गुरुवार को डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से असंतोष फैलाने का प्रयास किया जा रहा है. इसमें कुछ बर्खास्त और सेवारत सिपाहियों के शामिल होने की जानकारी मिली है. इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो फर्जी आईडी से खुद को पुलिस बताते हुए सोशल मीडिया पर भड़काऊ व आपत्तिजनक पोस्ट कर रहे हैं. ऐसे सिपाहियों पर केस दर्ज कर इनकी जांच की जा रही है. पुलिस में किसी भी तरह की असंतोष की स्थिति नहीं है.

सर्वेश ने लिखा था- मैंने दिए हैं सिपाही को पैसे, मुझे बर्खास्त करो

विवेक हत्याकांड के बाद से ही सिपाहियों का एक वर्ग आरोपी सिपाही के पक्ष में खड़ा है. पहले तो आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी की पत्नी राखी के खाते में पैसा जमा करने का अभियान छेड़ा गया और अब 5 अक्टूबर को काला दिवस मनाने और 6 अक्टूबर को इलाहाबाद में एसोसिएशन की बैठक बुलाने का मैसेज वायरल हो रहा है. 25वीं बटालियन पीएसी से संबद्ध मथुरा के रहने वाले सर्वेश ने इसी बात को लेकर एक पोस्ट किया था. इसमें लिखा था कि 'मुझे बर्खास्त करो मैंने दिए हैं सिपाही को पैसे.'


बता दें कि जिस तरह इस मुद्दे को सोशल मिडिया पर फेम मिल रही है उससे पूरे प्रदेश का नुकसान हो रहा है. पुलिस की जब जब इज्जत और आबरू पर हमला हुआ है पुलिस प्रदेश में उतनी ही कमजोर हुई है. हालांकि डीजीपी सुलखान सिंह और जावीद अहमद के समय में एसा नहीं हुआ है.

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